अगवानी पृ-41

ज्ञानकोश से
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अरविन्द लेक्सीकॉन के बारे में आपने सुना होगा। यह एक अनोखा सॉफ्टेवयर है, जिसमें नौ लाख से ज़्यादा अभिव्यक्तियाँ हैं। विश्व का सबसे बड़ा द्विभाषिक कोर्पस है। श्री अरविन्द कुमार और उनकी पत्नी श्रीमती कुसुम कुमार ने मिलकर पैंतीस साल की साधना के बाद इसे तैयार किया है। केंद्रीय हिंदी संस्थान से उनका सक्रिय जुड़ाव रहा है। उनके पुत्र और पुत्री ने मिलकर विराट डेटाबेस के आधार पर यह सॉफ्टवेयर बना दिया। ऐसा बना दिया कि बहुत शीघ्र आप इसे अपने मोबाइल पर भी देख सकेंगे। माउस के एक-एक क्लिक पर हिंदी की अपार शब्द संपदा में से इच्छित सामग्री मिल जाएगी। हमारे लिए यह एक वरदान है जो हमें अरविन्द लेक्सीकॉन की ओर से मिला है।

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श्री अरविन्द कुमार
श्री आदित्य चौधरी

यहाँ बैठे हैं श्री आदित्य चौधरी। इनकी विकास कहानी बड़ी दिलचस्प है। उन्होंने विकीपीडिया की तर्ज पर भारतकोश नाम का एक पोर्टल बनाया है। अनेक वर्ष से बिना किसी वित्तीय सहयोग के ये लगे हुए हैं। एक टीम सतत काम करती रहती है। इनके पास बहुत सारी ज़मीनें थीं। थोड़े-थोड़े अंतराल में अपना एक खेत बेच देते हैं और फिर से जुट जाते हैं पोर्टल पर जिसे ये ज्ञान का महासागर कहते हैं। इनका मानना है कि क्योंकि भारत संबंधी जानकारी एक ही वेबसाइट पर हिंदी में उपलब्ध नहीं थी, जो कुछ भी था अंग्रेजी में था, या अलग-अलग ब्लॉग्स में बिखरा हुआ था। इनको कांटा चुभा, कसक हुई और हिंदी की ठसक दिखा दी। इन्होंने 2006 में भारतकोश बनाने की योजना बनाई थी। भारतकोश का स्वरूप इतना विशाल और व्यापक था कि इन्होंने इसकी शुरुआत केवल ब्रज क्षेत्र से ही की ताकि इनका आत्मविश्वास जागे। 2006 से ही इन्होंने 'भारतकोश' और 'ब्रज डिस्कवरी' के लिए पुस्तक संग्रह, अनुवाद और टंकण प्रारम्भ कर दिया। 2008 में यूनिकोड के साथ 'ब्रज डिस्कवरी' नामक वेबसाइट बनाई। 2009 में कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ इसे दोबारा शुरू किया। सत्रह हज़ार से ज़्यादा पृष्ठ हैं। 1000 पुस्तकों से लिए गए 7000 लेख हैं। विभिन्न लेखकों से मौलिक लेखन कराते हैं। भारतकोश में इस समय- इतिहास, भूगोल, विज्ञान, धर्म, दर्शन, संस्कृति, पर्यटन, साहित्य, कला, राजनीति, जीवनी, उद्योग, व्यापार, खेल आदि पर प्रचुर सामग्री है। भारत गणराज्य संरचना में अभी दो हज़ार पृष्ठ हैं। 'मेरा गाँव मेरा देश' के अंतर्गत लगभग सात लाख पृष्ठ होंगे, ऐसा ये बताते हैं कि प्रत्येक गाँव का अपना पन्ना होगा। एक अकेला आदमी जो किसी संस्था की तरह काम कर रहा है।



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अगवानी स्वर्ण जयंती की
41
केंद्रीय हिंदी संस्थान
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अगवानी अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. अगवानी आवरण पृष्ठ 1
2. अगवानी स्वर्ण जयंती की 3
3. श्री कपिल सिब्बल संदेश 4
4. एक कविता 5
5. शुभकामना प्रो. अशोक चक्रधर 6
6. संपादकीय प्रो. के. बिजय कुमार 7
7. केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल : एक परिचय 8
8. मुख्यालय एवं केंद्र 10
9. मुख्यालय एवं केन्द्रों की गतिविधियां 14
10. शिक्षण-प्रशिक्षण एवं नवीकरण 18
11. पुरस्कार 19
12. प्रकाशन 20
13. अंतरराष्ट्रीय मानकहिंदी पाठ्यक्रम 21
14. विदेशी भाषा के रूप में हिंदी 22
15. हिंदी कॉर्पोरा परियोजना 24
16. भाषा-साहित्य सीडी निर्माण परियोजना 26
17. हिंदी लोक शब्दकोश 27
18. भव्य झांकियाँ 28
19. संस्थान की गतिविधियाँ 34
20. उद्धोधन 36
21. ज्योतित हो जन-जन का जीवन 37


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