एक विहंगावलोकन पृ-3

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18 मार्च, 2011 को केंद्रीय हिंदी संस्थान अपनी विकास यात्रा के पचास वर्ष पूरे कर रहा है। इन पचास वर्षों में हिंदी के पठन-पाठन को मानक रूप देने के साथ-साथ हिंदी को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पढ़ाने के लिए और शिक्षण पद्धति में एकरूपता लाने के उद्देश्य से संस्थान ने अपने कार्यक्रमों के माध्यम से अपने प्रयास निरंतर जारी रखे हैं।

हिंदी के अखिल भारतीय स्वरूप को समस्तरीय बनाने के लिए तथा संपूर्ण राष्ट्र में इसके शिक्षण को मजबूत आधार प्रदान करने के उद्देश्य से 19 मार्च, 1960 ई. को भारत सरकार के तत्कालीन शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय ने स्वायत्तशासी संस्था 'केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल' का गठन किया। मंडल के प्रमुख कार्य निर्धारित किए गए-


  1. हिंदी शिक्षकों को प्रशिक्षित करना।
  2. हिंदी शिक्षण के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करवाना।
  3. उच्चतर हिंदी भाषा एवं साहित्य और भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी के तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अध्ययन के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करवाना।
  4. हिंदीतर प्रदेशों के हिंदी अध्येताओं की समस्याओं को सुलझाना।
  5. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 में उल्लिखित हिंदी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप के विकास के लिए प्रदत्त निर्देशों के अनुसार हिंदी को अखिल भारतीय भाषा के रूप में विकसित करने के लिए समुचित कार्यवाई करना।

भारत सरकार द्वारा आगरा स्थित 'केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल' को अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय के संचालन का दायित्व सौंपा गया। इस महाविद्यालय का नाम 1 जनवरी, 1963 को 'केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय' रखा गया तथा दिनांक 29 अक्टूबर, 1963 को संपन्न शासी परिषद् की बैठक में इसे बदलकर 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' कर दिया गया।

एक स्थानीय प्रशिक्षण महाविद्यालय के रूप में प्रारंभ हुई यह संस्था पिछले 50 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय गतिविधियों के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलते हुए कई महत्वपूर्ण पड़ावों को पार कर चुकी है और कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति प्राप्त कर चुकी है। संस्थान ने भाषाविज्ञान की अधुनातन प्रवृत्तियों को समविष्ट करते हुए भाषा शिक्षण की नयी मान्यताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित किए, संबंधित शोध कार्यों को बढ़ावा दिया और साहित्य, भाषा, संस्कृति, मनोविज्ञान, शिक्षा संबंधी संगोष्ठियों के माध्यम से वैचारिक मंथन को उद्वेलित किया। भाषा शिक्षण में प्रयोजनमूलक दृष्टि को अखिल भारतीय स्तर पर प्रचारित करने का श्रेय संस्थान को जाता है। इन सब कार्यों को नेतृत्व देने वाले स्व. मोटूरि सत्यनारायण और स्व. ब्रजेश्वर वर्मा को और उनके हम आभारी हैं। मंडल के माननीय अध्यक्ष श्री कपिल सिब्बलजी, के मंडल के माननीय उपाध्यक्ष प्रो. अशोक चक्रधर जी के तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. अनिता भटनागर जैन जी के जो संस्थान के कार्यक्रमों को सफल बनाने में न केवल रूचि लेते हैं, बल्कि संस्थान को निरंतर विकास पथ पर ले जाने के लिए अपना संरक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान करते रहते हैं। हमें विश्वास है कि इन सभी के नेतृत्व में संस्थान अपनी योजनाओं को साकार करने में सफल होगा। विचारों को कार्यरूप देने वाले पहले के तथा वर्तमान कार्यकर्ताओं को संस्थान सदैव स्मरण करेगा।

हिंदी के प्रचार-प्रसार का संस्थान का कार्य आज भी गतिमान है। देश के विभिन्न स्थानों में क्षेत्रीय केंद्र स्थापित कर संस्थान ने अपना कार्यक्षेत्र बढ़ाया है। हिंदी भाषा के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप को पहचानकर संस्थान ने विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण कार्य को महत्व दिया है। आगामी युग में देश के कोने-कोने में और विदेशों में संस्थान के केंद्र स्थापित होंगे और हिंदी बलवती होगी, यही हमारी कामना है।

संस्थान सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और दूर शिक्षा के माध्यम से शिक्षण की अतंत संभावनाओं के प्रति सजग है और इस ओर कदम बढ़ाने का उपक्रम कर रहा है। इन सब प्रयत्नों से हम अपने उद्देश्यों की पूर्ति में निश्चय ही सफल होंगे।

हम आभारी हैं मंडल के माननीय अध्यक्ष श्री कपिल सिब्बल जी के, मंडल के माननीय उपाध्यक्ष्य प्रो. अशोक चक्रधर जी के तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की संयुक्त सचिव डॉ. श्रीमती अनिता भटनागर जैन जी के जो संस्थान के कार्यक्रमों को सफल बनाने में न केवल रूचि लेते हैं, बल्कि संस्थान को निरंतर विकास पथ पर ले जाने के लिए अपना संरक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान करते रहते हैं। हमें विश्वास है कि इन सभी के नेतृत्व में संस्थान अपनी योजनाओं को साकार करने में सफल होगा।


के. विजय कुमार
निदेशक


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केंद्रीय हिंदी संस्थान
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विहंगावलोकन अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. आमुख 3
2. अनुक्रमणिका 4
3. केंद्रीय हिंदी संस्थान के पचास वर्ष 7
4. संस्थान एक परिचय 17
5. नये युग में प्रवेश 25
6. शिक्षण कार्यक्रम 29
6. शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम 34
7. शोध और सामग्री निर्माण 38
8. संस्थान प्रकाशन 41
9. प्रसार कार्यक्रम 44
10. हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका 49
11. आधारिक संरचनाएँ 53
12. स्वर्ण जयंती वर्ष : कुछ नए संकल्प 56
13. संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र दिल्ली 61
14. हैदराबाद 70
15. गुवाहाटी 75
16. शिलांग 78
17. दीमापुर 82
18. मैसूर 84
19. भुवनेश्वर 87
20. अहमदाबाद 90
वैयक्तिक औज़ार

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