एक विहंगावलोकन पृ-49

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अध्याय-8
हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका


हिंदी भाषा की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका और विश्व में हिंदी भाषा के महत्त्व पर हिंदी-जगत में बराबर चर्चा होती रही है। ट्रिनीडाड, मॉरीशस, फ़िजी, सूरीनाम, डायाना आदि देशों में बसे अप्रवासी अपनी अस्मिता की तलाश में और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत की ओर देखते हैं और भारत के साथ संपर्क के लिए हिंदी भाषा के अर्जन पर बल देते हैं। उनके लिए हिंदी विरासत की भाषा है और स्थानीय रूप से भी कुछ विशिष्ट सुयोजनों की पूर्ति करती है। यू.के, अमेरिका, कनाडा, आदि देशों में हाल में जाकर बसे भारतीय सांस्कृतिक सूत्र को सुदृढ़ करने के लिए हिंदी भाषा को सुरक्षित रखने के लिए प्रयत्नशील हैं।

विश्व में बढ़ते सम्मान के अनुरूप हिंदी भाषा के शिक्षण और अर्जन को महत्त्व दिया जाता है। विश्व में आज लगभग 150 विश्वविद्यालयों और प्रमुख शिक्षा संस्थानों में हिंदी भाषा के अध्ययन की व्यवस्था है। यह अनुभव किया जाता है कि आने वाले युग में इनकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है।


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केंद्रीय हिंदी संस्थान
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स्वर्ण जयंती 2011
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विहंगावलोकन अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. आमुख 3
2. अनुक्रमणिका 4
3. केंद्रीय हिंदी संस्थान के पचास वर्ष 7
4. संस्थान एक परिचय 17
5. नये युग में प्रवेश 25
6. शिक्षण कार्यक्रम 29
6. शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम 34
7. शोध और सामग्री निर्माण 38
8. संस्थान प्रकाशन 41
9. प्रसार कार्यक्रम 44
10. हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका 49
11. आधारिक संरचनाएँ 53
12. स्वर्ण जयंती वर्ष : कुछ नए संकल्प 56
13. संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र दिल्ली 61
14. हैदराबाद 70
15. गुवाहाटी 75
16. शिलांग 78
17. दीमापुर 82
18. मैसूर 84
19. भुवनेश्वर 87
20. अहमदाबाद 90
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