एक विहंगावलोकन पृ-57

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पंजाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अध्यापकों को प्रशिक्षण दे रहा है। इनके साथ विश्व के पचास से अधिक देशों के छात्रों को हिंदी सिखा रहा है। पूर्वोत्तर भारत में संस्थान के शिलांग, गुवाहाटी और दीमापुर केंद्रों द्वारा न सिर्फ अध्यापकों को हिंदी में प्रशिक्षित किया जा रहा है, बल्कि खासी, अंगामी और मिजोउ जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को हिंदी के साथ जोड़ने का उद्यम किया जा रहा है। लोक संस्कृति के विभिन्न आयामों पर काम हो रहा है। अहमदाबाद केंद्र ने गुजरात, महाराष्ट्र और दमन-दीव में हिंदी के प्रचार-प्रसार को गति दी है। उत्कल की शस्य-श्यामला भूमि में हिंदी की उर्वरता को बढ़ाने का कार्य भुवनेश्वर केंद्र कर रहा है। दक्षिण भारत में दो केंद्र हैं, पहला हैदराबाद में और दूसरा मैसूर केंद्र। दक्षिण भारत से लेकर अंडमान-निकोबार द्वीप तक वहाँ की संस्कृतियों को हिंदी से जोड़ने में पुल का काम कर रहा है।

पचास से अधिक देशों के हजारों विद्यार्थी संस्थान से हिंदी सीख कर अपने-अपने देश में हिंदी के अघोषित सांस्कृतिक राजदूत बन कर हिंदी और भारत का नाम ऊँचा कर रहे हैं। देश की अग्रणी नेता श्रीमती सोनिया गांधी भी संस्थान में हिंदी सीख चुकी हैं।

संस्थान हिंदी के बहुआयामी विकास के लिए क्रांतिकारी परियोजनाएँ संचालित करता आ रहा है। जैसे, भारतीय बहुभाषिक परिवेश और हिंदी समाज का भाषावैज्ञानिक सर्वेक्षण। हिंदी की समकालीन शब्द संपदा का संकलन और विश्लेषण। भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के साथ मिल कर हिंदी कॉर्पोरा परियोजना के तहत विभिन्न विषय-क्षेत्रों के दो करोड़ शब्दों के विशाल कॉर्पस का निर्माण। हिंदी की अड़तालीस लोकभाषाओं के डिजिटल त्रिभाषी लोक-शब्दकोश निमार्णाधीन। हिंदी शिक्षण को सूचना प्रौद्योगिकी से जोड़ने के लिए मल्टीमीडिया कार्यक्रमों की तैयारी। साहित्यकारों के जीवन और रचनाओं पर आधारित ऑडियो-वीडियो प्रस्तुतियाँ। लोक साहित्य का हिंदी में संकलन और प्रकाशन। हिंदीतर राज्यों के लिए पाठ्यपुस्तकों का निर्माण। लघु हिंदी विश्वकोश परियोजना। कम्प्यूटर के माध्यम से हिंदी सिखाने के लिए ई-बुक तैयार करने की दिशा में प्रयास। विभिन्न क्षेत्रों के हिंदी-सेवियों का सम्मान।

संस्थान के स्वर्ण जयंती वर्ष में हमें कुछ नये संकल्प लेने हैं, विज़न ट्वेंटी-ट्वेंटी वन।

आधुनिकतम संचार माध्यमों और सूचना प्रौद्योगिकी का हिंदी भाषा-शिक्षण और दूर-शिक्षा के लिए अधिकाधिक प्रयोग हो। माइक्रोसॉफ्ट ने हिंदी को वैश्विक बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। एपल, उबंतू, लाइनेक्स ने भी हिंदी को स्थान दिया है। माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के विंडोज़ नाइंटी एट के बाद हमारे पास विंडोज़ टू थाउजैंड, एक्सपी, विस्टा आए, और आज विंडोज़ सेवन है। विंडोज टू थाउजैंड के बाद सभी में हिंदी ऐसे ही अंतर्भूत है, जैसे कबीर ने कभी गया था- 'मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे मै। तो तेरे पास में' आज हिंदी हर कम्प्यूटर में अतंस्थ है। हमें सिर्फ देखना है कि कैसे कंट्रोल पैनल में जाकर हम रीजनल लैग्वेज ऑप्शन्स में उसको एक्टिवेट करते हैं और मानवांछित की बोर्ड का चयन करते हैं।

यूनीकोड का व्यापक प्रचार और प्रसार हो। यूनीकोड एक ऐसी एनकोडिंग तंत्र प्रणाली है, जिसने संसार की सभी महत्त्वपूर्ण भाषाओं के लिए निजी और स्वतंत्र कोडिंग-एनकोडिंग तंत्र विकसित किया। आज हिंदी किसी की मोहताज नहीं है। साथ ही हमें एक बात की ओर ध्यान देना होगा कि हिंदी का विकास अब अकेले संभव नही है। हमें जो शुद्धतावादी हैं, उनको अपना हृदय थोड़ा सा उदार करना होगा। हिंदी का विकास अब अंग्रेजी तथा अन्य भारतीय भाषाओं के साथ ही संभव है। अंग्रेजी के ख़िलाफ दुर्भाव समाप्त हो जाना चाहिए। अंग्रेजी भी हमारे देश की भाषा है। इसके कारण आज हमारा देश इतना उन्नत है कि हम वैश्विक क्षितिज पर अपने हस्ताक्षार कर रहे हैं। निरंतर आगे बढ रहे हैं।

एक विशाल पोर्टल और बहुभाषी वेबसाइट हो। हमारी वेबसाइट अभी वैसी नहीं है जैसी कि होनी चाहिए। देशी-विदेशी सभी छात्रों का डेटा-बेस हो। पूर्व छात्रों की परिषद् का मंच हो। हमारे यहाँ से कितने विद्यार्थी हिंदी पढकर गए, अलग-अलग देशों में। कोई, दुभाषिया बन गया, कोई हिंदी शिक्षक बन गया। यहाँ से गए छात्र हिंदी के राजदूत बन गए। उन्होंने अपने-अपने देश में हिंदी का परचम फैलाया। कोई चीन में, कोई मोस्कों में, कोई कोरिया में, जापान में, कोई ऑस्ट्रलिया में।


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विहंगावलोकन अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. आमुख 3
2. अनुक्रमणिका 4
3. केंद्रीय हिंदी संस्थान के पचास वर्ष 7
4. संस्थान एक परिचय 17
5. नये युग में प्रवेश 25
6. शिक्षण कार्यक्रम 29
6. शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम 34
7. शोध और सामग्री निर्माण 38
8. संस्थान प्रकाशन 41
9. प्रसार कार्यक्रम 44
10. हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका 49
11. आधारिक संरचनाएँ 53
12. स्वर्ण जयंती वर्ष : कुछ नए संकल्प 56
13. संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र दिल्ली 61
14. हैदराबाद 70
15. गुवाहाटी 75
16. शिलांग 78
17. दीमापुर 82
18. मैसूर 84
19. भुवनेश्वर 87
20. अहमदाबाद 90
वैयक्तिक औज़ार

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