एक विहंगावलोकन पृ-65

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4. हिंदी नवीकरण प्रशिक्षण पाठ्यक्रम

केंद्रीय हिंदी संस्थान के मुख्यालय में तथा बाद में स्थापित अन्य केंद्रों में विस्तार कार्यक्रमों के अतंर्गत विभिन्न क्षेत्रों के हिंदी के अध्यापकों के लिए लघु अवधि के नवीकरण पाठ्यक्रमों का नियमित आयोजन होता आ रहा है।

1985 में जब गहन हिंदी शिक्षण पाठ्यक्रम विधिवत रूप से गृह मंत्रालय के पास चला गया तो दिल्ली केंद्र को पंजाब तथा जम्मू कश्मीर, दो प्रदेशों में नवीकरण पाठ्यक्रम आयोजित करने के लिए प्राधिकृत किया गया।

नवीकरण पाठ्यक्रम सामान्य रूप से तीन सप्ताह की अवधि के होते हैं, जिनमें प्रतिभागी अध्यापकों को भाषा-शिक्षण-विधि, सामग्री-निर्माण, कौशल-शिक्षण, मूल्यांकन आदि विषयों में अद्यतन स्थिति से परिचित कराया जाता है और उनसे तत्संबंधी व्यावहारिक कार्य भी कराए जाते हैं। दिल्ली केंद्र ने पिछले 25 वर्षों में अब तक पंजाब राज्य के विभिन्न स्थापनों पर तथा जम्मू कश्मीर के लिए जम्मू, श्रीनगर, लेह आदि स्थानों पर पाठ्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में अब तक पंजाब तथा जम्मू-कश्मीर के हिंदी के अध्यापकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।


5. शोध कार्यक्रम

संस्थान में शोध और सामग्री निर्माण के कार्य मुख्य रूप से मुख्यालय आगरा में संचालित होते रहे हैं, परंतु क्षेत्रीय केन्द्र भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कुछ शोध और सामग्री-निर्माण का कार्य भी करते रहे हैं। इस दृष्टि से दिल्ली केंद्र विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

दिल्ली केंद्र में अब तक तीन प्रमुख शोध तथा सामग्री निर्माण की योजनाएँ सम्पन्न हो चुकी हैं-

(1.) दिल्ली केंद्र में लद्दाखी भाषा संबंधी शोध का प्रकोष्ठ अस्सी के दशक में स्थापित हुआ था, जिसमें संयुक्ता कौशल कार्यरत थीं। इस योजना के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र में भाषा-सामग्री का संकलन किया गया और उसके लिप्यंकन के पश्चात लद्दाखी भाषा का विवरणात्मक अध्ययन किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत ‘कंवर्सेशनल लद्दाखी' और लद्दाखी ग्रामर' पुस्तकों का प्रकाशन हुआ है।

(2.) गहन हिंदी शिक्षण कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए गृह मंत्रालय ने संस्थान को डाक तार विभाग के डाकियों को देवनागरी लिपि से परिचित कराने के लिए एक लघु अवधि के पाठ्यक्रम का निर्माण करने का कार्य सौंपा था। दिल्ली केंद्र ने यह पाठ्यक्रम तैयार किया, जिसमें हस्तलिखित पतों को पढ़ने का अभ्यास भी शामिल किया गया था। यह सामग्री गृह मंत्रालय द्वारा प्रकाशित की गयी और पूरे देश में यह पाठ्यक्रम चलाया गया था।

(3.) वर्ष 1988-89 में तत्कालीन इलैक्ट्रॉनिक विभाग ने संस्थान के दिल्ली केंद्र को कम्प्यूटर द्वारा भाषा शिक्षण के लिए सामग्री निर्माण की परियोजना का कार्य सौंपा था, जिसके संयोजक थे तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक प्रो. मा. गो. चतुर्वेदी। यह सामग्री 'कम्प्यूटर संसाधित हिंदी शिक्षण एवं सर्जनात्मक लेखन शिक्षण' के शीर्षक से 1989 में संस्थान द्वारा प्रकाशित की जा चुकी है। कम्प्यूटर की सहायता से विदेशी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण और हिंदी कॉर्पोरा और कोश निर्माण के लिए संस्थान के दिल्ली केंद्र के तत्कालीन प्रभारी प्रो. मा. गो. चतुर्वेदी ने एक प्रस्ताव भारत सरकार के इलैक्ट्रॉनिक विभाग को अनुदान के लिए प्रेषित किया था। प्रस्ताव के अनुसार यह कार्य दिल्ली के आई.आई.टी. के कम्प्यूटर विभाग के साथ मिलकर किया गया था। इसके लिए दस लाख चालीस हजार रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ था। प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद इस परियोजना पर कार्य प्रांरभ किया गया। संस्थान के दिल्ली केंद्र ने 'देवनागरी (वर्ण) शिक्षक' नाम से एक प्रोग्राम विकसित किया है तथा ऐसे ही अन्य मॉड्यूल बनाए हैं, जिनका उपयोग शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों कर सकते हैं।


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विहंगावलोकन अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. आमुख 3
2. अनुक्रमणिका 4
3. केंद्रीय हिंदी संस्थान के पचास वर्ष 7
4. संस्थान एक परिचय 17
5. नये युग में प्रवेश 25
6. शिक्षण कार्यक्रम 29
6. शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम 34
7. शोध और सामग्री निर्माण 38
8. संस्थान प्रकाशन 41
9. प्रसार कार्यक्रम 44
10. हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका 49
11. आधारिक संरचनाएँ 53
12. स्वर्ण जयंती वर्ष : कुछ नए संकल्प 56
13. संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र दिल्ली 61
14. हैदराबाद 70
15. गुवाहाटी 75
16. शिलांग 78
17. दीमापुर 82
18. मैसूर 84
19. भुवनेश्वर 87
20. अहमदाबाद 90
वैयक्तिक औज़ार

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