एक विहंगावलोकन पृ-7

ज्ञानकोश से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज
Khs-logo-001.png
15 मार्च 1951
केन्द्रीय हिंदी संस्थान के पचास वर्ष

इतिहास के पन्नों से

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के मार्गदर्शन में लालकिले में आयोजित अखिल भारतीय संस्कृति सम्मेलन में सर्वसम्मति से हिंदी को प्रशासनिक माध्यम और सामाजिक संस्कृति की संवाहिका के रूप में विकसित करने के लिए एक अखिल भारतीय स्तर की संस्था को स्थापित करने का निश्चय।

1952

अखिल भारतीय हिन्दी परिषद् की आगरा की स्थापना।
परिषद् द्वारा अखिल भारतीय हिंदी महाविद्यालय की स्थापना।
पं. देवदूत विद्यार्थी महाविद्यालय के संचालक और डॉ. सत्येन्द्र प्राचार्य नियुक्त।
हिंदीतर भाषा, भाषी राज्यों के हिंदी प्रचारकों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रारम्भ।

1953

अखिल भारतीय हिंदी परिषद् को शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से आंशिक अनुदान स्वीकृत।

1954

डॉ. कैलाशचन्द्र मिश्र महाविद्यालय के संचालक नियुक्त।

1955

श्री एम. सुब्रह्मण्यम महाविद्यालय के संचालक नियुक्त।
शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा परिषद् को पूर्ण अनुदान देने की स्वीकृति।

1959

महाविद्यालय के वार्षिक समारोह में राज्य सभा के उपाध्यक्ष श्री एस. बी. कृष्णमूर्ति राव ने अपने अध्यक्षीय भाषण में संस्था को राष्ट्रीय शिक्षा का गुरुकुल बताया और कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में इसे महत्व मिलना चाहिए।

19 मार्च,1960

शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा अखिल भारतीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय की आगरा में स्थापना।
महाविद्यालय के संचालन के लिए केंद्रीय हिंदी शिक्षण मण्डल का गठन। श्री मोटूरि सत्यनारायण मण्डल के अध्यक्ष मनोनित।

1 नवंबर, 1960

सोसायटीज़ एक्ट में मण्डल का पंजीकरण।

30 अप्रैल,1961

केन्द्रीय हिंदी शिक्षण मण्डल की प्रथम बैठक आयोजित। बैठक में हिंदी शिक्षण प्रवीण, हिंदी शिक्षण पारंगत और हिंदी शिक्षण निष्णात पाठ्यक्रम संचालित करने का निर्णय।

27 अक्टूबर, 1961

मंडल की प्रबंध परिषद् की बैठक आयोजित। बैठक में विकास समिति का गठन।

1961-62

महाविद्यालय में "हिंदीतर भाषी प्रदेशों में हिंदी सीखने की समस्याएँ" विषय पर संगोष्ठी आयोजित।
मण्डल के निर्णयानुसार हिंदी शिक्षण प्रवीण, हिंदी शिक्षण परंगत और हिंदी शिक्षण निष्णात पाठ्यक्रमों का संचालन।
छात्रों की वार्षिक पत्रिका "समन्वय" का प्रकाशन प्रारंभ।
अर्धवार्षिक शोध पत्रिका "गवेषणा" का प्रकाशन प्रारंभ।

1962

महाविद्यालय के प्रथम निदेशक के रूप में डॉ. विनय मोहन शर्मा द्वारा मई, 1962 में कार्यभार ग्रहण।
श्री मोटूरि सत्यनारायण का मण्डल के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र। श्री बालकृष्ण राव मण्डल के अध्यक्ष मनोनीत।
डॉ. विनय मोहन शर्मा का निदेशक पद से त्यागपत्र।

1963

फ़रवरी, 1963 में डॉ. ब्रजेश्वर वर्मा द्वारा महाविद्यालय के निदेशक पद का कार्यभार ग्रहण।
अखिल भारतीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय का नाम बदलकर 'केंद्रीय हिंदी संस्थान' किया गया।
"सार्वदेशिक हिंदी का भावी रूप" विषय पर संगोष्ठी का आयोजन। संस्थान में अनुसंधान कार्यो का आरंभ।


पीछे जाएँ
6
केंद्रीय हिंदी संस्थान
7
स्वर्ण जयंती 2011
8
आगे जाएँ


विहंगावलोकन अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. आमुख 3
2. अनुक्रमणिका 4
3. केंद्रीय हिंदी संस्थान के पचास वर्ष 7
4. संस्थान एक परिचय 17
5. नये युग में प्रवेश 25
6. शिक्षण कार्यक्रम 29
6. शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम 34
7. शोध और सामग्री निर्माण 38
8. संस्थान प्रकाशन 41
9. प्रसार कार्यक्रम 44
10. हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय भूमिका 49
11. आधारिक संरचनाएँ 53
12. स्वर्ण जयंती वर्ष : कुछ नए संकल्प 56
13. संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र दिल्ली 61
14. हैदराबाद 70
15. गुवाहाटी 75
16. शिलांग 78
17. दीमापुर 82
18. मैसूर 84
19. भुवनेश्वर 87
20. अहमदाबाद 90
वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता