गवेषणा 2011 पृ-145

ज्ञानकोश से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


शातिर बना फरार। छोटे शहरों में भी टेलेंट। टाइम मैंनेजमेंट जरूरी। हॉंबीज एंड इंटरेस्ट। ....... भारत को खतरा............। सत्तर करोड़ डॉलर किए खर्च। थाने पर पहुँचे लोग। फैशन परस्त। सिटी के टूरिज्म ट्रेड से..........। ...को थोड़ी खुशी। मेहनत की जरूरत..........। स्टेट गवर्नमेंट की पॉलसीज.........। ......अलग ही रास्ता अख्तियार.....। गरमी न जलाई सब्जियाँ। ....90 परसेंट फसल खराब। जॉंब अपॉंचयुनिटीज से। एडमिशन फार्म। .75 हजार फीस। .....फीस।...फांसी है।........सितम से अजिज। एंबूलेस से मौत का सफर....अपने करियर से भटकना ...। ....फ्रेंडली विहेन करके.....। हर स्टूडेंटस में.........। शातिर कैदियों से मुलाकाती। होगा बेरीफिकेशन। .....खराब कोच मढ़ दिये मत्थे। ट्रेन कब आयेगी और कब जाएगी.........।फैमिली ने किया विरोध। ......पाया कि नाराजगी खास है...। फाइनेंस मिनिस्टर......। गांव, गरीब, घोषणाएँ........। मंहगा बजट। ....खजाना। मामले की जांच करने की मांग.......। टीवी पर दिखाए दगांई। गांधी मेरे हीरो। कहां जाएगी 300 फेमिलीज। इश्क फरमाने मे.। फ्रीडम एक्सप्रेशन। .....इंटरटेंनमेंट...। इश्क ने बख्श दी जिंदगी। आस्था के साथ खूबसूरती भी। गोरे में .........। मंहगा होगा सोना। बैकिंग व रियल्टी पर पड़ी मार। बेकार गई फिफटी। सबसे यादगार सेंचुरी। बिंबलडन के मिक्सड डबल्स के फाइनल में। गंवाया शुरूआती एंडवाटेज 'सेलेक्टर्स बने, खिलाड़ी। जहीर की वापसी। फेडरर है असली चेंपियन्स। नंबर दो पर पहुंचे युवराज।....श्रीलंका का दूसरी इनिंग्स।

1.3.1 अपेक्षित/शुद्ध रूप - उपर्युक्त उदाहरण केवल शीर्षकों, उशीर्षकों से लिए गए हैं क्योंकि छोटे टाइप में छपे मुख्य समाचारों को पढ़ने की हमारी क्षमता समाप्त हो गई है। उपर्युक्त उदाहरणों में विद्रूपित वर्तनी का सम्बन्ध भूलत संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी से हिंदी में आगत शब्दों से है तथा कुछ का सम्बन्ध सीधा हिन्दी से है। ऐसे शब्दों का अपेक्षित/शुद्ध रूप को ठक-बद्ध किया जा रहा है। -बंटी (बँटी); करीब (क़रीब); फाइनेंस (फाइनेन्स); बयां (बयाँ); मुकाम (मुक़ाम;) खाक (खाका); यानि (यानी;) फेहरिश्त (फेहरिस्त); झांसा (झाँसा); फरार (फ़रार); टेलेंट (टेलेन्ट); मैनेजमेंट (मैनेजमेन्ट); जरूरी (ज़रूरी); हॉंबीज (हॉंबीज़); इंटरेस्ट (इंन्ट्रेस्ट/इन्ट्रिरस्ट); खतरा (ख़तरा); सत्तर (सत्तर); खर्च (ख़र्च); थाने पर पहुंचे (थाने पहुंचे); फैशनपरस्त (फ़ैशनपरस्त); टूरिज्म (टूरिज़्म); खुशी (ख़ुशी); जरूरत (ज़रूरत); गवर्नमेंट (गवर्नमेन्ट); पॉंलिसीज (पॉंलिसीज़); अख्यियार (अख़्तियार); जलाई सब्जियां (जलाई सब्जियाँ); परसेंट (परसेन्ट); फसल (फ़सल); खराब (ख़राब); अपॉंच्युनिटीज (अपॉंच्युनिटीज); एडमिशन (अडमिशन); फॉर्म (फ़ार्म); कैंपस (कैम्पस); रिक्रूटमेंट (रिक्रूटमेन्ट); चांस (चान्स); सफाईकर्मी (सफ़ाईकर्मी); तरेरी आँखे (तरेरीं आँखे); गुड एटमॉसिफयर (गुड एट्मॉसिफर); हजार फीस (हजार फ़ी/फ़ीस); फंसी (फॅंसी); आजिज (आज़िज); एंबूलेंस (एंम्सुलन्स); सफर (सफ़र); करियर (कैरियर); फ्रेंडली (फ्रेडली); स्टूडेंटस (हर स्टयूडेन्ट); स्टूडेंस (स्टयूडन्ट्स); करयिर (कैरिअर); कैदियों (क़ैदियों); मुल्यकाती (मुलाक़ाती); वेरीफिकेशन (वैरिफ़िकेशन); खराब (ख़राब); दिये (दिऐ); आयेगी (आएगी); फैमिली (फ़ैमिली); नाराजगी (नाराज़गी); खास (ख़ास); फाइनेंस (फाइनैन्स); गांव (गाँव); गरीब (ग़रीब); घोषणाएँ); महंगा (महँगा); खाजाना (ख़जना); जांच (जाँच); मांग (माँग); टीवी (टी0वी0) दगांई (दंगाई); गांधी (गान्धी); पेटीशन (पिटीशन्); खारिज (ख़ारिज); कहां (कहाँ); जाएंगी (जाएँगी); फेमिलिज (फैमिलिज़); बख्श (बख़्श); जिंदगी (ज़िन्दगी); खूबसूरती (ख़ूबसूरती); गोरेगांव (गोरेगाँव); बैंकिग (बैंकिड.ग); रियलटी (रिऐलिटी); फिफटी (फ़िफ़टि); सेंचुरी (सेन्चुरी); बिबलडन (बिम्बलड्न); मिक्सड (मिक्सड्); फाइनल (फ़ाइनल); गंवाया (गँवाया); शुरूआती (शुरूआती); एडवांटेज (अड्वान्टिज); सेलेक्टर्स (सिलेक्टर्स); जहरी (ज़हीर); फेडरर (फ़ेडरर); चैंपियन (चैम्पन्); नंबर (नम्बर); पहुंचे (पहुँचे); का (की); इनिंन्स (इनिड्.ज्)



पीछे जाएँ
144
145
146
आगे जाएँ


गवेषणा 2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
आवरण पृष्ठ आवरण
पूर्वपीठिका अशोक चक्रधर 5
यह अंक के. बिजय कुमार 9
संपादकीय महेन्द्र सिंह राणा 11
प्रयोजनमूलक हिंदी के विविध रूप
प्रयोजनमूलक हिंदी: स्वरूप और संरचना रवि प्रकाश गुप्त 15
प्रयोजनमूलक हिंदी: विकास के कारण उर्मिल शर्मा 20
प्रयोजनमूलक हिंदी: वैज्ञानिक और तकनीकी भाषा रूप जसपाली चौहान 27
हिंदी भाषा और प्रौद्योगिकी: विविध संभावनाएं एवं चुनौतियां शेफाली चतुर्वेदी 40
व्यापक प्रौद्योगिकी और प्रयोजनमूलक हिंदी ओम विकास 49
हिंदी भाषा, प्रयोजनमूलक हिंदी और बाजार श्रवण कुमार मीणा 63
हिंदी: वाणिज्य और व्यापार की भाषा कृष्ण कुमार गोस्वामी 68
हिंदी मीडिया की भाषिकी सुवास कुमार 72
पत्र-पत्रिकाओं द्वारा हिंदी भाषा का स्वरूप परिवर्तन सतीश शर्मा ‘जाफरावादी’ 80
जनसंचार माध्यमों के विज्ञापन में हिंदी गोविन्द स्वरूप गुप्त 86
मीडिया की हिंदी दुर्गेश नंदिनी 89
संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की भूमिका जितेन्द्र कुमार सिंह 92
हिंदी: संपर्क भाषा की एक जीवंत परम्परा व्यासमणि त्रिपाठी 99
वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का स्वरूप मनोज पांडेय 104
सांस्कृतिक अस्मिता के संदर्भ में हिंदी के विविध रूप एल.सुनीता राय 107
हिंदी भाषी समाज में कोड परिवर्तन का रूप सुमेधा शुक्ला 116
भाषा और जन-विसर्जन लालसा लाल तरंग 121
हिंदी भाषा: वर्तमान परिदृश्य सुनीता रानी घोष 129
व्याकरण-विचार
विद्रूपित होती हिंदी वर्तनी लक्ष्मी नारायण शर्मा 137
स्थाननाम और संबंधित शास्त्र प्रियंका सिंह 151
साहित्य-चिंतन
काव्य-भाषा में अस्मिता की खोज आई.एन. चंद्रशेखर रेड्डी 158
साहित का स्वराज बनाम विचारों का उपनिवेश प्रकाश साव 167
इस अंक के रचनाकारों के पते 175
सदस्यता फार्म 177
अंतिम पृष्ठ अंतिम पृष्ठ
वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता