गवेषणा 2011 पृ-32

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वायुमण्डल में वाष्प के रूप में मौजूद नमी के कारण शीतल सतहों पर निर्मित बूंदों को ओस कहते हैं। यह नमी विशेषत: रात को भूसतह पर स्थित जलाशयों और पौधों की पत्तियों से विस्तृत रिसाव के कारण होती है। (वैज्ञानिक)

  तड़ित/बिजली

झील में जी भर नहाकर चांदनी तट पर खड़ी
मेघ फिर आए अचानक लग गई रस की झड़ी
बादलों में ठन गई तो चांदनी हंसने लगी
वह हंसी बन गई बिजली एक जादू की छड़ी। (कवि वीरेन्द्र मिश्र)

दो भिन्न बादलों के समूहों के टकराव से उत्पन्न आकाशीय दमक या चौंध तड़ित कहलाती है। यह दमक वायुमंडलीय विसर्जन के फलस्वरूप पैदा होती है।

(ग) विज्ञान की भाषा वस्तुनिष्ठ होती है, साहित्यिक या सामान्य भाषा प्राय: व्यक्तिनिष्ठ होती है। साहित्य की भाषा और कथ्य में लेखन का अपना दृष्टिकोण परिलक्षित होता है। यह बोध या दृष्टिकोण हर लेखक का अपना हो सकता है, इसलिए भाषा-शैली में भी पर्याप्त भिन्नता हो सकती है। इसके विपरीत विज्ञान की भाषा में व्यक्तिगत दृष्टिकोण या बोध का स्थान नहीं होता या बहुत कम होता है। इसलिए वैज्ञानिक लेखन में 'मेरा ख्याल है', 'मैं समझता हूँ' जैसी व्यक्तिनिष्ठ अभिव्यक्तियों का प्रयोग नहीं हो सकता, जब तक कि लेखक को निष्कर्ष के रूप में अपना मत व्यक्त करना अभीष्ट न हो जैसे-

  1. लाश को एक बार फिर देखकर डॉक्टर ने सिर हिलाया और चला गया। मौत की हजूरी में डॉक्टर अपना समय नहीं बरबाद करते।
  2. पृथ्वी में कई प्राकर के धातु छिपे पड़े हैं। इनमें से सबसे अधिक महत्वपूर्ण धातु है लोहा। कुछ अलौह धातु जिनमें अल्मोनियम और जिंक भी शामिल हैं, विशेष महत्व के हैं। लोह में चुंबकीय तत्व भी होते हैं, जिसमें विद्युत शक्ति का विकास संभव है।

उदाहरण (1) में अंतिम मोटे अक्षरों में लिखा वाक्य लेखक का अपना दृष्टिकोण है।

उदाहरण (2) में लौह के संबंध मे केवल वस्तुनिष्ठ वर्णन है, जो विज्ञान की भाषा की विशेषता है।

(घ) विज्ञान की भाषा का रूप सामान्यत: कथनात्मक या विवरणात्मक होता है। मनोभावक भाषा-रूप विज्ञान की भाषा का गुण नहीं है। साहित्य की भाषा सामान्यत: मनोभावात्मक होती है। कथात्मक भाषा-रूप विषयपरक होता है, वक्ता या श्रोतापरक नहीं क्योकि इसमें किसी विषय या वस्तु के बारे में सूचना संप्रेषित करना या कोई कथन प्रस्तुत करना ही अभीष्ठ होता है। विज्ञान की भाषा इसी कोटि में आती है। इसके विपरीत मनोभावात्मक भाषा-रूप वक्तापरक होता है, क्योंकि लेखक के मनोभावों, विचारो या अनुभूतियों को वयक्त करना ही इसका अभीष्ट होता है। साहित्यिक भाषा का बहुत बड़ा अंश इसी कोटि में आता है। वर्णनात्मक तथा मनोभावात्मक भाषा-रूप के अदाहरण देखिए-

(1) देखने में प्रोजेक्ट मुद्गर (डम्बेल) के आकार का लगता है और यह स्काई थियेटर के बीच रखा जाता है। इसकी संरचना ऐसी होती है जिससे अर्धगोलाकार गुम्बद के भीतरी भाग, अर्थात् 'स्काई थियेटर' की छत पर आकाश का सही-सही निरूपण हो सके।

(कथात्मक भाषा रूप)

(2.) जहाँ आजकल मैं हूँ, वहाँ, नौकरियाँ पेड़ों के साथ लगती हैं। तोड़-तोड़कर मैं तुम्हें पकड़ा जाऊँगा। (मनोभावात्मक)

(मनोभावात्मक)


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गवेषणा 2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
आवरण पृष्ठ आवरण
पूर्वपीठिका अशोक चक्रधर 5
यह अंक के. बिजय कुमार 9
संपादकीय महेन्द्र सिंह राणा 11
प्रयोजनमूलक हिंदी के विविध रूप
प्रयोजनमूलक हिंदी: स्वरूप और संरचना रवि प्रकाश गुप्त 15
प्रयोजनमूलक हिंदी: विकास के कारण उर्मिल शर्मा 20
प्रयोजनमूलक हिंदी: वैज्ञानिक और तकनीकी भाषा रूप जसपाली चौहान 27
हिंदी भाषा और प्रौद्योगिकी: विविध संभावनाएं एवं चुनौतियां शेफाली चतुर्वेदी 40
व्यापक प्रौद्योगिकी और प्रयोजनमूलक हिंदी ओम विकास 49
हिंदी भाषा, प्रयोजनमूलक हिंदी और बाजार श्रवण कुमार मीणा 63
हिंदी: वाणिज्य और व्यापार की भाषा कृष्ण कुमार गोस्वामी 68
हिंदी मीडिया की भाषिकी सुवास कुमार 72
पत्र-पत्रिकाओं द्वारा हिंदी भाषा का स्वरूप परिवर्तन सतीश शर्मा ‘जाफरावादी’ 80
जनसंचार माध्यमों के विज्ञापन में हिंदी गोविन्द स्वरूप गुप्त 86
मीडिया की हिंदी दुर्गेश नंदिनी 89
संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की भूमिका जितेन्द्र कुमार सिंह 92
हिंदी: संपर्क भाषा की एक जीवंत परम्परा व्यासमणि त्रिपाठी 99
वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का स्वरूप मनोज पांडेय 104
सांस्कृतिक अस्मिता के संदर्भ में हिंदी के विविध रूप एल.सुनीता राय 107
हिंदी भाषी समाज में कोड परिवर्तन का रूप सुमेधा शुक्ला 116
भाषा और जन-विसर्जन लालसा लाल तरंग 121
हिंदी भाषा: वर्तमान परिदृश्य सुनीता रानी घोष 129
व्याकरण-विचार
विद्रूपित होती हिंदी वर्तनी लक्ष्मी नारायण शर्मा 137
स्थाननाम और संबंधित शास्त्र प्रियंका सिंह 151
साहित्य-चिंतन
काव्य-भाषा में अस्मिता की खोज आई.एन. चंद्रशेखर रेड्डी 158
साहित का स्वराज बनाम विचारों का उपनिवेश प्रकाश साव 167
इस अंक के रचनाकारों के पते 175
सदस्यता फार्म 177
अंतिम पृष्ठ अंतिम पृष्ठ
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