गवेषणा 2011 पृ-46

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यहाँ अंग्रेजी में 'ने' के लिए कोई परसर्ग या पूर्वसर्ग नहीं है। अत: स्पष्ट है कि भारत की भाषाओं की प्रकृति समरूप है। यदि हम इन लक्षणों के विश्लेषण के लिए भाषा प्रौद्योगिकी का उपयोग करें तो भारतीय भाषाओं में कंप्यूटर साधित स्वयं भाषा शिक्षक, ऑटो करेक्ट, ग्रामर चैकर और मशीनी अनुवाद जैसे अत्यंत जटिल भाषिक उपकरणों का विकास भी कर सकते हैं।

संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा हिन्दी सॉफ्टवेयर उपकरण लोकार्पित किया गया। जिसमें हिंदी के कई सॉफ्टवेयर उपकरण नि:शुल्क रूप से उपलब्ध हैं। इसमें हिंदी भाषा का यूनीकोड आधारित की-बोर्ड ड्राइवर, ओपन टाइप फॉन्ट्स हिंदी के लिए सभी प्रकार के फॉंन्ट्स कोड एवं स्टोरेज कोड का परिवर्तक भारतीय ओपर ऑफिस (Open Sources) का हिंदी भाषा संस्करण, हिंदी मे फायर फॉक्स ब्राउजर, हिंदी ओ.सी.आर., हिंदी के लिए एकीकृत शब्द संसाधक, अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश, हिंदी भाषा के शब्द वर्तनी जाँचकर्ता, हिंदी भाषा के शब्दानुवाद टूल तथा हिंदी के लिए टेक्स्ट टू स्पीच प्रणाली आदि उपलब्ध है। इसमें कंप्यूटर की न्यूनतम आवश्यकताएँ PII संसाधन और आगे तथा भारतीय भाषा पैक के साथ विन्डोज 2000 एक्सपी और आगे तथा लाइनैक्स फैडोरा कोर-3 है। अंग्रेजी से हिंदी मे भाषांतर सुविधा प्रणाली एक सुविधा के रूप में www.ildc.in पर उपलब्ध है। इंडिक्स नेट लैब्स ने 'रफ्तार' नामक वेब सर्च इंजन विकसित किया है जो हिंदी मे कंप्यूटर प्रयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐपल कंप्यूटर इण्डिया द्वारा एक भारतीय भाषा किट बनाया गया जिसमें विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम लेवल सपोर्ट उपलब्ध कराते हुए बहुभाषा कंप्यूटिंग के लिए समाधान प्रस्तुत किया गया है। इस समाधान में मानकीकृत भारतीय लिपि कोड का प्रयोग किया गया है। राजभाषा विभाग, भारत सरकार ने उन्नत कंप्यूटिंग के विकास के लिए सी.डेक.पुणे की सहायता से कंप्यूटर समर्थिक पढ़ाई और प्रशिक्षण के क्षेत्र में DOS और UNIX में एक सॉफ्टवेयर, प्रबोध तथा प्रवीण परीक्षाओं के लिए विकसित किया है जो सरकारी पत्राचार के क्षेत्र में अग्रेजी से हिंदी अनुवाद के लिए है।

GIST ने विन्डोज पर भारतीय वर्ड प्रोसेसिंग के लिए 'लीप' नामक सॉफ्टवेयर तैयार किया है। C-DAC ने भारतीय भाषाओं के लिए फॉंन्ट्स के विभिन्न रूप विकसित किए हैं जो ISFOC नाम से प्रसिद्घ हैं और बहुत से डेस्कटॉप पब्लिकेशन्स अनुप्रयोगों के लिए इनका प्रयोग किया जा रहा है। GIST आधारित सॉफ्टवेयर भी डंबिंग और विभिन्न भाषाओं में सबटाइलिंग टी.वी. प्रोग्रामों में प्रसारण के लिए उपलब्ध है। NCST और C-DAC दोनों पर्सनल कंप्यूटरों पर भारतीय भाषा सपोर्ट के क्षेत्र में संलग्न है तथा उन्होंने लिप्यन्तरण के लिए भी सॉफ्टवेयर पैकेज विकसित किए हैं। इन पैकेजों का भारतीय रेलवे महानगर टेलीफोन निगम द्वारा प्रयोग किया जा रहा है। कई प्रसिद्घ भारतीय विश्वविद्यालय द्विभाषी डिग्रियों के मुद्रण के लिए सॉंफ्टवेयर का प्रयोग कर रहे हैं। आई.आई.टी., चंडीगढ़ ने बहुभाषा इन्टर्फेस विकसित किया है जिसका प्रयोग भारतीय भाषाओं और कुछ विश्व भाषाओं मे प्रलेख तैयार करने, अवलोकन करने तथा मुद्रित करने के लिए किया जा सकता है।

इंटरनेट का प्रयोग आज आम बात है। यात्रा, शिक्षा, मनोरंजन, होटल, घोषणाओं समाचार बुलेटिन आदि की लगभग सभी महत्वपूर्ण सूचनाएँ आज नेट पर उपलब्ध हैं। इसमें भाषिय अनुप्रयोग के लिए इन्टरनेट ब्राउजर्स और संपादको के लिए HTML का (विकास ताकि उन्हे भारतीय फॉन्ट्स के अनुरूप बनाया जा सके) बहुभाषी ई-मेल सर्वरों का विकास, विभिन्न समाचार पत्रों समूहों की पहचान और विभिन्न उपभोक्ता समूहों के लिए बुलेटिन बोर्डों की पहचान, वेब पेज निर्माण, जैसे पर्यटन उद्योग, चिकित्सा आदि शामिल हैं।


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गवेषणा 2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
आवरण पृष्ठ आवरण
पूर्वपीठिका अशोक चक्रधर 5
यह अंक के. बिजय कुमार 9
संपादकीय महेन्द्र सिंह राणा 11
प्रयोजनमूलक हिंदी के विविध रूप
प्रयोजनमूलक हिंदी: स्वरूप और संरचना रवि प्रकाश गुप्त 15
प्रयोजनमूलक हिंदी: विकास के कारण उर्मिल शर्मा 20
प्रयोजनमूलक हिंदी: वैज्ञानिक और तकनीकी भाषा रूप जसपाली चौहान 27
हिंदी भाषा और प्रौद्योगिकी: विविध संभावनाएं एवं चुनौतियां शेफाली चतुर्वेदी 40
व्यापक प्रौद्योगिकी और प्रयोजनमूलक हिंदी ओम विकास 49
हिंदी भाषा, प्रयोजनमूलक हिंदी और बाजार श्रवण कुमार मीणा 63
हिंदी: वाणिज्य और व्यापार की भाषा कृष्ण कुमार गोस्वामी 68
हिंदी मीडिया की भाषिकी सुवास कुमार 72
पत्र-पत्रिकाओं द्वारा हिंदी भाषा का स्वरूप परिवर्तन सतीश शर्मा ‘जाफरावादी’ 80
जनसंचार माध्यमों के विज्ञापन में हिंदी गोविन्द स्वरूप गुप्त 86
मीडिया की हिंदी दुर्गेश नंदिनी 89
संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की भूमिका जितेन्द्र कुमार सिंह 92
हिंदी: संपर्क भाषा की एक जीवंत परम्परा व्यासमणि त्रिपाठी 99
वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का स्वरूप मनोज पांडेय 104
सांस्कृतिक अस्मिता के संदर्भ में हिंदी के विविध रूप एल.सुनीता राय 107
हिंदी भाषी समाज में कोड परिवर्तन का रूप सुमेधा शुक्ला 116
भाषा और जन-विसर्जन लालसा लाल तरंग 121
हिंदी भाषा: वर्तमान परिदृश्य सुनीता रानी घोष 129
व्याकरण-विचार
विद्रूपित होती हिंदी वर्तनी लक्ष्मी नारायण शर्मा 137
स्थाननाम और संबंधित शास्त्र प्रियंका सिंह 151
साहित्य-चिंतन
काव्य-भाषा में अस्मिता की खोज आई.एन. चंद्रशेखर रेड्डी 158
साहित का स्वराज बनाम विचारों का उपनिवेश प्रकाश साव 167
इस अंक के रचनाकारों के पते 175
सदस्यता फार्म 177
अंतिम पृष्ठ अंतिम पृष्ठ
वैयक्तिक औज़ार

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