गवेषणा 2011 पृ-80

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पत्र-पत्रिकाओं द्वारा हिंदी भाषा का स्वरूप परिवर्तन

सतीश शर्मा 'जाफरावादी'


सूचना और तकनीक के इस युग में यह बात निसंकोच कही जा सकती है कि आज का युग जनसंचार माध्यमों का है। घर-परिवार, पास-पड़ोस, समाज, क्षेत्र, राज्य और राष्ट्र के अलावा दुनिया के किसी भी कोने की जानकारी हमें पलक झपकते ही उपलब्ध हो सकती है। सचमुच यह किसी स्पप्न के सच होने से कम नहीं है। आधुनिक युग में सबकुछ आधुनिक होने को आतुर है। एकदम नया और आधुनिक होने की प्रतिस्पर्धा में जनसंचार माध्यमों की भाषा बदल रही है। यहाँ हम शब्द 'जनसंचार माध्यम' पत्र-पत्रिकाओं की भाषा और उसमें हिन्दी भाषा में हो रहे स्वरूप-परिवर्तन पर चर्चा कर रहे हैं।

परिवर्तित भाषाएँ - समाचार पत्र-पत्रिकाओं की भाषा में विभिन्न भाषाओं के शब्दों का प्रयोग हो रहा है। हिन्दी पट्टी में मराठी, पंजाबी, अंग्रेजी के मिश्रित प्रयोग के अनगिनत उदाहरण पत्र-पत्रिकाओं मे प्रयुक्त हो रहे हैं। पंजाब राज्य की हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी के साथ पंजाबी, एनसीआर के इलाके में हिन्दी के साथ अंग्रेजी और मुंबई और आस-पास के इलाके में मराठी और अंग्रेजी दोनो भाषाओं की शब्दाबली का प्रयोग देवनागरी लिपि में हो रहा है। हिन्दी और अंग्रेजी के सम्मिश्रण को 'हंग्रेजी', हिंग्लिश', 'खिचड़ी भाषा', ‘नई हिंदी', 'अच्छी हिंदी', 'मिश्रित हिंदी', और इसके प्रयोग को 'हिंग्लिशीकरण' की संज्ञा दी गयी है। पंजाब में पजाबी के साथ अंग्रेजी के प्रयोग को 'पन्हिंग्लिश' और इस प्रयोग को 'पन्हिंगलिशीकरण', 'मराठी' और 'मुंबईया हिंदी' में अंग्रेजी के प्रयोग को 'मंहिग्लश', 'मुबहिंग्लश' का नाम दिया जा सकता है। इस प्रयोग को निंसदेह 'मुबहिंग्लशीकरण' कहा जा सकता है।

भाषा संबंधी परिवर्तन - एनसीआर के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में तो 'हिंग्लिश' के प्रयोग ने भाषिक बंधों की सीमाओं को पार कर दिया है। कोई पत्र कम, कोई बहुतायत तो कोई इसक कामचलाऊ प्रयोग से अछूता नहीं है। हिन्दी भाषा में दूसरी भाषा शब्दों का प्रयोग भाषा-संबंधी परिवर्तन है।


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गवेषणा 2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
आवरण पृष्ठ आवरण
पूर्वपीठिका अशोक चक्रधर 5
यह अंक के. बिजय कुमार 9
संपादकीय महेन्द्र सिंह राणा 11
प्रयोजनमूलक हिंदी के विविध रूप
प्रयोजनमूलक हिंदी: स्वरूप और संरचना रवि प्रकाश गुप्त 15
प्रयोजनमूलक हिंदी: विकास के कारण उर्मिल शर्मा 20
प्रयोजनमूलक हिंदी: वैज्ञानिक और तकनीकी भाषा रूप जसपाली चौहान 27
हिंदी भाषा और प्रौद्योगिकी: विविध संभावनाएं एवं चुनौतियां शेफाली चतुर्वेदी 40
व्यापक प्रौद्योगिकी और प्रयोजनमूलक हिंदी ओम विकास 49
हिंदी भाषा, प्रयोजनमूलक हिंदी और बाजार श्रवण कुमार मीणा 63
हिंदी: वाणिज्य और व्यापार की भाषा कृष्ण कुमार गोस्वामी 68
हिंदी मीडिया की भाषिकी सुवास कुमार 72
पत्र-पत्रिकाओं द्वारा हिंदी भाषा का स्वरूप परिवर्तन सतीश शर्मा ‘जाफरावादी’ 80
जनसंचार माध्यमों के विज्ञापन में हिंदी गोविन्द स्वरूप गुप्त 86
मीडिया की हिंदी दुर्गेश नंदिनी 89
संपर्क भाषा के रूप में हिंदी की भूमिका जितेन्द्र कुमार सिंह 92
हिंदी: संपर्क भाषा की एक जीवंत परम्परा व्यासमणि त्रिपाठी 99
वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का स्वरूप मनोज पांडेय 104
सांस्कृतिक अस्मिता के संदर्भ में हिंदी के विविध रूप एल.सुनीता राय 107
हिंदी भाषी समाज में कोड परिवर्तन का रूप सुमेधा शुक्ला 116
भाषा और जन-विसर्जन लालसा लाल तरंग 121
हिंदी भाषा: वर्तमान परिदृश्य सुनीता रानी घोष 129
व्याकरण-विचार
विद्रूपित होती हिंदी वर्तनी लक्ष्मी नारायण शर्मा 137
स्थाननाम और संबंधित शास्त्र प्रियंका सिंह 151
साहित्य-चिंतन
काव्य-भाषा में अस्मिता की खोज आई.एन. चंद्रशेखर रेड्डी 158
साहित का स्वराज बनाम विचारों का उपनिवेश प्रकाश साव 167
इस अंक के रचनाकारों के पते 175
सदस्यता फार्म 177
अंतिम पृष्ठ अंतिम पृष्ठ
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