समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-11

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हम आज भी पराधीन हैं


-चन्द्रभानु साहु
Chandrabhan Sahu.jpg


हम आज भी पराधीन हैं, यह आज किसी के लिए प्रश्न बनकर नहीं रह गया है। इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन इस पराधीनता के क्षेत्र अलग-अलग हैं। इसके पीछे छिपे कारण भी अलग-अलग हैं। सभी लोग अपने-अपने रास्ते में अपनी-अपनी परिस्थिति में अलग-अलग पराधीनता चख रहे हैं। इस पराधीनता के कारण भी भिन्न-भिन्न हैं, जैसे हम लोग छात्र जीवन को भी ले सकते हैं। परन्तु कहा तो ये भी जाता है कि छात्र का जीवन सुन्दर, स्वच्छ, आशापूर्ण और मनोहर जीवन है। मैं इससे कभी भी असहमत नहीं हूँ क्योंकि मैं भी इस जीवन को जी रहा हूँ। परन्तु पता नहीं क्यों ऐसा लगता है कि इस सुन्दर संसार में पराधीनता रूपी राक्षस घुस आया है, जो मेरे हृदय को, मेरे स्वाभिमान को बार-बार नोंच रहा है। ऐसा लग रहा है जैसे इनको अपने कब्जे में करना चाहता है, जैसे उसे अपनी हार बरदाश्त नहीं होती है। इसे हम पराधीनता का स्वरूप, प्रकृति तथा दूसरे शब्दों में उसका विजय घोष भी कह सकते हैं।

असल बात समझने की यह है कि जब कोई कुछ बोलता है और हमें यह भी ज्ञात होता है कि यह बात गलत है। परन्तु हम चुप रहते हैं। गूँगे, बहरे या गँवार जैसे सुनकर भी अनसुना करते हैं, उसे अपने विवेक रूपी तराजू में तोलना उचित नहीं समझते या तौल कर भी उसे जुबाँ रूपी तलवार पर नहीं लाना चाहते हैं। यह है हमारी पराधीनता।

जब हम किसी बडे़ अधिकारी को किसी छोटे अधिकारी को फटकारते हुए देखते हैं, तब भी हम चुप रहते हैं ? क्योंकि हमें अपने स्थान की चिन्ता है, अपनी मजबूरी का आभास होता है, अपनी जरूरतों का ज्ञान है। यही तो हमारी पराधीनता है कि हम चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते, कुछ कहना चाहकर भी कह नहीं सकते। मन तो चाहता है कि कुछ बोल डालूँ, कुछ बक डालूँ, जिससे कुछ हो या ना हो अपने मन को शान्ति तो मिल जाएगी। अन्दर जल रही आग से तो कुछ राहत मिल जाएगी, पर ऐसा होता ही नहीं।

जब हमें ऐसा लगता है कि हमने कोई गलत काम किया ही नहीं परन्तु हमें गलत समझा जा रहा है। हम इससे निकलने का कोई उपाय करते हैं, यह उपाय अगर सत्य और न्याय का होता है तो यह समझा जाता है कि हम चोरी और सीना जोरी कर रहे हैं। अगर उपाय विनम्रता, सरलता से हो तो समझा जाता है कि हम अपने दोषों को या तो छिपा रहें हैं या फुसला रहें हैं। यह भी एक प्रकार की पराधीनता है। इसमें हम लोग या तो अपने अधिकारी, पद, स्थान से पराधीन हैं या अपने विवेकशीलता और संस्कार से। यद्यपि हम लोग दूसरे की पराधीनता को स्वाधीनता का नाम दे सकते हैं।

प्रवीण


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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58


समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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