समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-21

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संस्थान में मेरे अनुभव

Nibedita Nath.jpg
-निबेदिता नाथ

जीवन से जब हो गई थी निराश
तब बँधी एक नई आस
पर मित्रों इसे गलत मत समझना
निराश का अर्थ है नौकरी का न मिलना
जीवन का यों ही उद्देश्य और धन हीन बहना
उसी समय अचानक
मन में उठी हूक
मौका मिलते ही लिया लपक
मुझसे न हुई कोई चूक
मौका था संस्थान में आने का
अपना भाग्य और हाथ आजमाने का
संस्थान में प्रवेश मैंने पा लिया
भगवान को सतत् धन्यवाद दिया
पर मन में थी घबराहट और प्रश्न
न आने के भी किये मैने कई यत्न
पर फिर भी मुझे आना पड़ा
रोते-धोते ट्रेन में बैठना ही पड़ा
बस फिर क्या था ट्रेन चल पड़ी
आगरा पहुँचने की आन पड़ी घड़ी
16 अगस्त को पहुँची संस्थान
संस्थान देखकर मेरे तो उड़ गए प्राण
जैसे-तैसे मन को समझाया
पर साथ ही चिन्ता और सशंय गहराया
इसके आगे कहें क्या मित्र
बहुत ही लुभावने हैं आगे के चित्र
छात्रावास में मैंने रखे कदम
समान उठाते ही मेरे समाप्त हुए दम-खम
पर आई मेरे पास एक साथिन
मेरे प्रयत्न किए सरल जो थे कठिन
खैर साथियों आगे है कुछ इस प्रकार कहानी
छात्रावास की सीढि़याँ चढ़ते हुए मुझे महसूस हुआ मैं हो गई सयानी
सहवासिनि, सहपाठिनी और सहपाठी मिले
देखने को भारत के कई रंग मिले।
कक्षा में जब प्रथम कदम बढ़ाया
प्रथम अन्तर के विषय ने खूब छकाया
समझ में न शिक्षा आई न आया मनोविज्ञान
लगा कि अपने बन्द कर लूँ कान
हिन्दी संरचना से जीना हुआ मुहाल
सोच रही थी अब क्या होगा मेरा हाल
मन हुआ बोझिल नितांत
जब पढ़ने को हुए शिक्षा सिद्धान्त
तब लगता कब बजेगी घंटी
चली जाऊँ छात्रावास
कुछ राहत तो मिले
लूँ कुछेक श्वास
पर घंटे भर की खुशी के बाद
चखना पड़ा भाषा विज्ञान का स्वाद
दूर खड़ी इंतजार कर ही थी शिक्षण विधियाँ
पढ़ कर उड़ गई निदिया
फिर आया भाषा परिमार्जन का मौसम
पर इसमें मैं नहीं गई सहम
अंतत: बारी आई कविता की
बहने लगी रस की धारा सरिता की।
मेरे जीवन का यह नया परिवर्तन
कैसे करूँ इसका अभिनंदन
समझ न पाऊँ मैं
पता नहीं क्या बताऊँ मैं
खैर आगे जो हुआ सुनाती हूँ
जो अनुभूत किया वह दिखलाती हूँ
सोचती हूँ कहाँ ओड़िशा के एक कोने में थी
और अपने ही सपने संजोने में थी
यहाँ आकर कई लोग मिले
जिसे दूर समझती थी वह मिटे फासले
मित्रों की संख्या बढ़ी
सम्बन्धों की मूर्ति गढ़ी
चलिए अब कुछ ऐसी बातें हो जाएँ
अपने शिक्षक और शिक्षिकाओं से पहचान करवाएँ
शुरूआत पांडे सर से करते हैं


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21
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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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