समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-22

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हमेशा हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं
वास्तविकता से उन्होंने पहचान करवाई
हमें बहुत सारी महत्वपूर्ण बातें बतायीं
वह हमारे लिए वटवृक्ष के समान हैं
जिसकी छाया में हुआ जीवन आसान है
इसके बाद आती है बारी कुमार सर की
जिनकी बातें गजब, गजब, गजब
कहकर पढ़ाते भी हैं गजब
उनका जोश देखकर मैं भी सोचती हूँ
ये क्या व्यक्ति है गजब
मैं भी कुछ हो गई हूँ सजग
सपना मैम का तो क्या कहना
उनकी मुस्कराहट और बाल हैं उनका गहना
सुबह-सवेरे जब मुस्कराती हुई आती हैं
छात्रावासीय समस्यापूर्ण जीवन में रोशनी फैलाती हैं
मीनाक्षी मैम की मीठी बातें
दिल में घर कर जातीं
हँसते बोलते गलतियों को देतीं सुधार
सभी छात्रों को देतीं प्रोत्साहन का उपहार
अग्रवाल मैम का अलग है अंदाज
बातों की मारतीं पिचकारी
उसमें हम सराबोर होते
फिर चल पड़ती मेरी भी बातों की गाड़ी
आत्म विश्वास का पेट्रोल पाकर
बातों की गाड़ी चल पड़ती है
कहीं-न कहीं मैम की बातें
शिक्षण कार्य में काम आती हैं।
वीणा मैम का धीरे से आना
धीरे से अपनी बात कहना
उनके सुन्दर व्यक्तित्व को दर्शाता है।
मन के अन्दर खलबली मचा जाता है।
वैसे तो खलबली मचती है
एक महिला के आने पर
तस्मीना हुसैन नाम है उनका
उनके शोर मचाने पर
वह हैं सबसे अनोखी
उनकी आँखों और बातों में चंचलता और शोखी
मैम हमारा व्यक्तित्व सुधारती हैं
लड़कियों पर कड़ी नजर और स्नेह भी रखती हैं।
सुनीता मैम का सलोना रूप
सबको आकर्षित करता है
मधुर मुस्कराहट के साथ
शिक्षण अभ्यास की सारी टेंशन
दूर कर देता है
अब मैं करूँगी दो सिंहों की चर्चा
एक वाकपटु दूसरे धीर-गम्भीर
दो सर हैं हमारे
एक बिजेन्द्र दूसरे राजवीर
बिजेन्द्र सर कबीर, सूर के ज्ञाता
उनकी अनोखी बातों से कक्षा मतमाती
राजवीर सर सुनाते हिन्दी की संरचनात्मक कहानी
अनुशासन और गम्भीरता है अनके व्यक्तित्व की निशानी
कपूर सर की क्लास
सबसे अनोखी है
उच्चारण करो, स्वर और व्यंजन
किसने रोका है
कठिन विषय को सरल कर देते हैं
टेढ़े-मेंढे़ उच्चारण स्थान को आरेख द्वारा समझाते हैं।
अंतत: रजिस्ट्रार सर को कौन भूल सकता है
मंच पर आते ही बातों का खजाना खोल देते हैं।
सीधी सच्ची बात
छात्रों के मन पर करती घात
विभिन्न कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाते हैं
हमेशा छात्रों को प्रेरित करते रहते हैं।
अब आती हूँ छात्रावास में
जहाँ करती हूँ फिलहाल निवास मैं
उसकी भी अजब कहानी
जहाँ लड़कियाँ रहती साथ
अलग-अलग बोली और अलग है जात
जैसे इन्द्रधनुष के रंग हैं सात
वैसे हम रहती हैं साथ-साथ
झगड़ा, हुल्लड़, बातों की लड़ी
हमेशा अपनी पटरी पर है चल पड़ी
शिकायतों का दौर चलता है
जब छात्रावास में लोक अदालत बैठती है
पर फिर भी अच्छाई और बुराई के साथ
हम जीते हैं
इसी से तो मनुष्य कहलाते हैं
फिलहाल मैं भी इसी में जीवन को आगे बढ़ा रही हूँ
और अपनी कविता समाप्त करते हुए रात
12 बजे बत्ती बन्द करके सोने जा रही हूँ।

पारंगत



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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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