समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-23

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आपातानी की कहानी

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अरुणाचल प्रदेश, जो भारत के सुदूर पूर्व का एक ऐसा राज्य है, जहाँ से प्रकाश की किरणें भारतीयों के जीवन में नवचेतना एवं पवित्रता को भर देती हैं, हिमालय की ऊँची-नीची पहाड़ियाँ एवं पर्वतमालाएँ, सदाहरित वृक्ष, वन्य-जीव सम्पदा एवं प्राकृतिक सुषमा से भरपूर यह प्रदेश पूर्वी भारत का प्रहरी ही है, बौद्ध धर्म का परम शान्ति-सन्देश एवं ब्रह्मपुत्र की कल-कल बहती निर्मल जलधारा पावित्रता की परम अनुभूति दिलाती है और इसी प्रदेश में अनेक छोटी-बड़ी जनजातियाँ वर्षों से अपनी विशिष्ट एवं स्वतंत्र संस्कृति, कला, पम्परा, वेशभूषा, बोली-भाषाओं को सम्भाले हुए साथ-साथ रह रही हैं, इसमें एक ऐसी जनजाति भी है, जिसने अपनी विशिष्ट एवं स्वतन्त्र पहचान की छाप दुनिया भर में बनाकर रखी है, वह जनजाति है-आपातानी। अरुणाचल प्रदेश की दक्षिणी दिशा में 'लवर-सुबनसिरी' नामक जिला आपातानी संस्कृति एंव समुदाय का गढ़ माना जाता है, जिसका प्रमुख प्रशासनिक केन्द्र 'जीरो' है। आपातानी जनजाति का सम्बन्ध प्रथम मानव पुरुष 'तानी' के वंश से है। अत: 'आपातानी' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- आपातानी, जिसमें 'आपा' का अर्थ है 'आदर' और 'तानी' का अर्थ है- 'मानव', यानि आपातानी का अर्थ है "आदरणीय मानव", इस जनजाती को अरुणाचल में 'तानअ' (tanii) के नाम से भी जाना जाता है।

यह जनजाति वर्षों से सुबनसिरी जिले में फेले पठार पर रह रही है, जिसे 'जीरो' की घाटी के नाम से भी जाना जाता है। इस पठार में लगभम 26,000 निवासी रहते हैं, जो अरुणाचल की अन्य जनजाति की तुलना में बहुत ही कम हैं। इस छोटी-सी घाटी को सात गाँवों में बाँट दिया गया है, जो इस प्रकार से हैं-

  1. होड़
  2. हारी
  3. बल्ला
  4. बामीड; मिची
  5. मुदांडतागे
  6. दूत्ता
  7. हिजा।

जीरो घाटी में कुल कृषि योग्य क्षेत्र 1058 वर्ग कि.मी. है, जो कुल भूमि का 43 प्रतिशत है। शेष भाग बस्तियों एवं जंगलों से घिरा हुआ है। कृषि-व्यवस्था में अपनाई गई विशिष्ट एवं स्वतन्त्र शैली ने दुनिया का पर्याप्त ध्यान अपनी और आकर्षित किया है। यहाँ के किसान वर्ष में दो बार फसलें उगाने में सफल रहे हैं, खेती में धान की फसल के अलावा मत्स्य-पालन भी किया जाता है। इसके अलावा बाजरा, सोयाबिन, मक्का अदि फसलें भी उगाई जाती हैं।

आपातानी जनजाति घाटी में विकसित प्रकृति की सुन्दरतम रचना एवं समुदाय की विशिष्ट संरक्षण तकनीकी के चलते, जीरो घाटी को सन 2006 में यूनेस्को ने 'विश्व संरक्षित स्मारक' के रूप में नामांकित किया था।

आपातानी की क्षेत्रीय, भाषाई, अर्थ-व्यवस्था सम्बन्धी विशेषताएँ तथा इनके रीति-रिवाज परम्पराएँ अरुणाचल की अन्य जनजातियों से भिन्न हैं, अपातानी जनजाति धर्म में विश्वास रखती है, वे 'दोन्यी-पोलो' अर्थात सूर्य-चन्द्र को देवता के रूप में पूजते हैं, हालाँकि पिछले कुछ दशकों से ईसाई मत का प्रचार भी रहा है, फिर भी आपातानीयों ने अपनी मूल श्रद्धा को बनाये रखा है। यह जनजाति निशी जनजाति की पड़ोसी है।

वर्तमान में यहाँ प्रगति का स्तर अधिक बढ़ रहा है। पिछले दशक से यहाँ की साक्षरता दर भी बढ़ती जा रही है। शिक्षा की आधुनिकतम पद्धतियों का प्रयोग किया जा रहा है। पाठशालाओं तथा विद्यालयों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। पाठशालाओं में हिन्दी की पढ़ाई पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं से उपलब्ध कराई गई है।अब अरुणाचल में जीवन के आसार बढ़ते हुए दिखाई दे रहे है...


निष्णात


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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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