समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-39

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कथकली

-विष्णु जी
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कथकली केरल की सुप्रसिद्ध शास्त्रीय रंगकला है। 17वीं सदी में कोट्टाराक्करा तंपुरान के द्वारा रामनाट्टम के विकसित रूप में कथकली का आविष्कार हुआ। यह रंगकला नृत्यनाट्यकला का सुन्दरतम रूप है।

कथकली का इतिहास केरल के राजाओं के इतिहास से जुड़ा हुआ है। आज जो कथकली का रूप मिलता है, वह प्राचीनतम रूप का परिष्कृत रूप है। अनेक नाट्य कलाओं के संयोग और प्रभाव से कथकली का स्वरूप संवरता गया। इसको सर्वांगपूर्ण तथा सर्वसुलभ कला बनाने का कार्य कोट्टयम तंपुरान ने किया था। वेट्टत्तु राजा ने 'रामनाट्टम’ को परिष्कृत किया था। यह ‘वेट्टत्तु संप्रदाय’ के नाम से प्रख्यात हुआ। मट्टांचेरी कोविलकम में रामनाट्टम की शिक्षा देने वाले चात्तुप्पण्क्किर ने कोट्टयम तंपुरान के आदेशानुसार ‘वेट्टत्तु संप्रदाय’ का परिष्कार किया, जो 'कल्लडिक्कोड़न संप्रदाय' के नाम से प्रचलित हुआ। तिरूवितांकूर के महाराजा कार्तिक तिरूनाल रामवर्मा, नाट्यकला विशारद कप्लिंगाट्ट नारायणन नंपूतिरि आदि ने भी कथकली में कई परिवर्तन किए।

कथकली में रंगीन वेशभूषा पहनकर कलाकार गायकों द्वारा गाए जाने-वाले कथा सन्दर्भों का हस्तमुद्राओं एवं नृत्यनाट्यों द्वारा अभिनय प्रस्तुत करतें हैं। इसमें कलाकार स्वयं न तो संवाद बोलता है और न ही गीत गाता है। कथा का विषय भारतीय पुराणों और इतिहासों से लिया जाता है। आधुनिक काल में पश्चिमी कथाओं को भी विषय के रूप में स्वीकृत किया जा रहा है।

कथकली का रंगमंच जमीन से ऊपर उठा हुआ एक चौकोर तख्त होता है, जिसे 'कलियरंगु' कहते हैं। कथकली की प्रस्तुति रात में होती है। इसलिए रोशनी के लिए जलाने वाले दीप को 'आट्टविलक्कु' कहते हैं।

कथकली के प्रारम्भ में कतिपय आचार-अनुष्ठान किये जाते हैं, जैसे- केलिकोट्टु, अरंगुकेलि, तोडयम, वंदनश्लोक, पुरप्पाड़, मेलप्पदम आदि। मेलप्पदम के पश्चात नाट्य की प्रस्तुति होती है और पद्य पढ़कर कथा का अभिनय किया जाता है। 'धनाशि’ नाम के अनुष्ठान के साथ कथकली का समापन होता है।

कथकली के साहित्यिक रूप को 'आट्टक्कथा' कहते हैं। गायक गणवाद्यों के वादन के साथ आट्टक्कथाएँ गाते हैं। कलाकार उन पर अभिनय करके दिखाते हैं। आट्टक्क्था के गायक को ‘भागवतर’ कहते हैं। कथकली में दो गायक होते हैं, पहले एक गायक गाता है, दूसरा गायक उसको दोहराता है। पहले गाने वाले को 'पोन्नानी' कहा जाता है। और दूसरे गायक को ‘शिंकिडी' कहा जाता है। जब तक नट गीतों के भाव अर्थ को पूर्णत: अभिनीत नहीं करता, तब तक गायक गाते रहते हैं। कथकली संगीत को-मूड म्यूजिक भी कहा जाता है। माना जाता है कि सोपान संगीत से ही कथकली संगीत का उदय हुआ। कथकली संगीत में कुछ विशिष्ट रागों का प्रयोग होता है, जैसे- पाटि, पुरनिरा, आदि। कथकली संगीत के कुछ प्रसिद्ध गायक हैं- कलामंडलम उण्णिकृष्ण कुरूप, कलामंडलम हैदर अली, कलामंडलम गंगाधरन, कलामंडलम हरिदास, कलामंडलम शंकरन एंप्रान्तिरी आदि। कथकली में अनेक आट्टक्कथाएँ हैं- उष्णायिवार्यर का 'नलचरितम (चार दिन)', कोट्टयम तंपुरान का 'कल्याण सौगधिकम', 'बकवधम', इरयिम्मन तंपी का 'कीचकवधम', 'उत्तरास्वयंवरम', 'दक्षयागम', वयस्कर आर्यन मूस का 'दुर्योधनवधम', अश्वत्ति तिरूनाल रामवर्मा का 'रूक्मिणीस्वयंवरम्', 'पूतनामोक्षम', कार्तिक तिरूनाल रामवर्मा का 'राजसूयम' आदि। कोट्टयम तंपुरान ने 4 आट्टक्कथाओं की रचना की और कथकली के अभिनय में नाट्यशास्त्र के आधार पर परिवर्तन किया।

कथकली में हर पात्र की अपनी अलग वेशभूषा नहीं होती है। कथाचरित्र को आधार बनाकर कथापात्रों को भिन्न-भिन्न प्रतिरूपों में बाँटा गया है। प्रत्येक प्रतिरूप की अपनी-अपनी रंगीन तथा आकर्षक वेशभूषा और साज श्रृंगार होता है। इस वेशभूषा के आधार पर ही पात्रों को पहचानना पड़ता है। ये प्रतिरूप पांच तरह के होते हैं-

  1. पच्चा
  2. करि
  3. कत्ति
  4. दाढ़ी
  5. मिनुक्कु

वेश, अभिनय आदि में हुए परिवर्तनों को ‘सम्प्रदाय’ कहते हैं। कथकली की शैली में जो छोटे-छोटे भेद हुए हैं, उन्हें ‘चिट्टकल’ कहते हैं। साहित्य अभिनय और वेश के अतिरिक्त प्रमुख तत्व है- 'संगीत' और 'मेलम'। भारतीय शास्त्रीय परिकल्पना के अनुसार नवरसों की नाट्य प्रस्तुति कथकली में प्रमुखता पाती है।

कथकली के इतिहास में अनेक प्रतिभावान कलाकार हैं। ये कलाकार नाट्य, गायन, वादन आदि सभी क्षेत्रों में प्रसिद्ध हुए हैं। केरल के विभिन्न मंन्दिरो में कार्यरत कथकली संघ, कथकली क्लब और सभी ने मिलकर कथकली को जीवंत रखा है। कथकली के विकास के लिए महाकवि वल्लत्तोल नारायण मेनन द्वारा स्थापित 'केरल कलामंडलम' (विश्वविद्यालय) और अनेक प्रशिक्षण केन्द्र इस नृत्य का प्रशिक्षण देते हैं।

पारंगत


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38:2
39
40
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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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