समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-44

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इसके बाद प्रतिमा शर्मा ने दिवंगत पंडित भीमसेन जोशी के 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' गीत एक नृत्य नाटिका के रूप में प्रस्तुत कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की, जिसमें बारह भाषाओं के बोल थे। इसके बाद रजनीबाला ने एक पंजाबी एकल नृत्य प्रस्तुत किया। 'सारे जहाँ से अच्छा' गीत से शुरू कर बीच में अनेक भाषाओं के गीत और अंत में 'वन्देमातरम्' इन मिले-जुले गीतों पर छात्राओं द्वारा एक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। जिसमें सबसे पहले रीना, चिन्नारी, योम्बी और लक्ष्मी राजस्थानी गीत की ताल पर नृत्य करती हुई दिखाई दीं। फिर सम्बलपुरी (ओड़िशा) नृत्य करते सस्मीता, स्वरूपा, मंजूबाला, रोजाली और लावण्या दिखाई दिये, इसमें पश्चिम बंगाल को कौन छोड़ सकता? इस तरह त्रिपुरा की अनिन्द्रिता और ओड़िशा की ममता बंगाली गाने की ताल पर नाच उठी, तब गुजरात के डांडिया को लेकर मयूरी जोशी और सुनिता चौधरी आयीं, पंजाबी कुड़ी रजनी भी अपने भांगड़ा का जलवा दिखाते हुए मंच पर दिखाई दीं, आसामी जया और टुलूमनी ने भी अपने बिहू नृत्य से दर्शकों को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। अंत में इन सभी छात्रों ने 'वन्देमातरम् के बोल गाकर मंच छोड़ा। भारत के अधिकांश राज्य के नृत्यों के बाद, नागालैण्ड का नृत्य लेकर आये सोफिया, नेमनेइनेंग, शुभम, वापांग, केखे, हंवाचु, अमाओ और आशलो। इस नृत्य के पीछे पृष्ठभूमि यह है कि पुराने जमाने में लोग शिकार पर जाने से पहले अपनी शक्ति की परीक्षा के लिए इस प्रकार (बाँसों के साथ कूदना) करते थे, परन्तु आज नागालैण्ड वासियों ने इसे अपने पारंपरिक नृत्य के रूप में जीवित रखा है।

इस कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति पूरे कार्यक्रम की प्रतिनिधि थी। जिसमें शिंदे बंकट (निर्देशक), जे. बी. सलाम, संदीप चौहान, दीपक, विभीषण, जितेश्वर, गगन, देवराज और मानस आदि ने हाथ में मोमबत्ती पकड़ कर 'ऐ मेरे वतन के लोगों' बोल के साथ मंच पर आये। मोमबत्ती से गिरते मोम को अपनी आँखों समेत पूरे शरीर पर डालकर इस देश के उन वीर शहीदों को याद किया, जिन्होंने इससे भी लाखों कष्ट झेलकर देश के उन वीर शहीदों के लिए श्रद्धाधांजलि रूप में थी। इसको देखते ही दर्शकगण स्तब्ध रह गये, अतं में भरत सिंह जी के धन्यवाद के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।

जब दूसरे दिन डॉ. कुमार जी से सुनने को मिला कि कल का कार्यक्रम बहुत अच्छा था और हम लोग इसको सदैव याद रखेंगे तो हमारी खुशी और भी बढ़ गयी। मैं सोचती हूँ कि शायद ये शाम सबकी यादों में एक प्यारी-सी खुशी बनकर रह जाएगी।

26 जनवरी की शाम को हुआ यह कार्यक्रम हम सबके लिए अब तक हुए कार्यक्रमों में सर्वोत्तम उपलब्धि थी।

पारंगत



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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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