समन्वय छात्र पत्रिका-2011 पृ-45

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सूखी प्रतीक्षा

-संदिप आधार चव्हाण

मेरे दिल के सागर में उठी एक लहर
चन्द्रमा की कोमल शीतलता की
पड़ी छाया मुझ पर
तब मैं, न रहा, पता नहीं मुझे क्या हुआ
सुन्दर नयन, कमल पंखुड़ी जैसे ओठ
उस पर स्थित हास्य
चन्द्रमा को कर दे लज्जित, ऐसा मुखमण्डल
काले घने बाल
हवा से उड़ते बातें करते
मुख पर आती बालों की लट
जो सौंदर्य में चार चाँद लगाती।
उस खूबसूरत-पंखुड़ी पर काला तिल
जो मेरा दिल है
वह मुझे उसकी और खींचे
यह सौंर्दय देखकर
मैं-मैं न रहा, न मैं रहा।
मन ही मन में
उसने मेरे हृदय रूपी घर में जगह पायी
मेरा भी मन मेरा नहीं रहा
मैं मछली की तरह पानी की ओर खिंचता गया।
उन्हें देखता रहा
उनकी आँखों में अमृत का प्याला ढूँढता रहा।
आखिर दिल की बात कर दी, पर जवाब कुछ नहीं आया।
मैं जनता था उसकी आँखों में, उसके चन्द्रमुख पर
मेरे लिए बहुत सा प्यार था
वह स्पष्ट झलक रहा था
लेकिन नहीं आ पा रहा था कमल पंखुडि़यों तक
शायद वह मुझे तड़पाना चाहती थी।
तड़पाकर रुलाना चाहती थी।
सोने की तरह परखना चाहती थी।
कब तक मेरी परीक्षा चलेगी,
कब खत्म होगी मेरी परीक्षा
राधा ने भी कभी किशन को इतना तड़पाया नहीं होगा
लेकिन आज तुम्हें करना पड़ेगा मुझ पर भरोसा
तुम्हारी हर बात में हाँ है फिर मुझे क्यों कर रही हो रूआंसा
तुम्हें पाकर मैं राम बनना चाहूँगा
किशन की तरह प्यार करना चाहूँगा
राधा सीता की तरह तुम्हारा प्यार पाना चाहूँगा
कब खत्म होगी मेरी परीक्षा
कब प्रेम रूपी वर्षा बरसेगी
और
इस चातक की प्यास बुझेगी।


भिखारी है या साहूकार

मैंने देखा हैदराबाद की सड़क पर
कड़ी धूप में,
नंगे बदन
कटे पैर का आदमी,
पसीने से लथ-पथ
बदन के नीचे कुछ नहीं
लेकिन पैसों के लिए है कपड़ा
कपडे़ पर कुछ चिल्लर चमक रही है
सड़क पर चहल-पहल है
आते-आते आदमी उसे देख रहे हैं।
कोई कपड़े पर एक दो रुपये फेंक रहा है।
मोबाइल की रिंग बजी
सड़क पर पड़े आदमी ने मोबाइल निकाला
सबसे महँगा नोकिया का
फोन पर कोई कह रहा था
कुछ पैसों की जरूरत है
उसने कहा "कितना ?
हजार दो हजार"
उसने कहा- "मैं इतना कम नहीं देता,
लेना हो तो लो,
दस हजार से पचास हजार"
अब फोन बन्द करो,
मैं हूँ धँधे पर
जब तक पाँच सौ कि गिनती नहीं होती
मेरा काम चलता रहता है।
शाम को घर आना
पैसे ले जाना"
गिनती पाँच सौ कि हुई
सड़क पर ऑटो खड़ा हुआ है
ऑटो में बैठा वह आदमी
किसी खूब सूरत घर के सामने
अपना ऑटो है रुकवाता
खूबसूरत घर से खूबसूरत औरत निकली
औरत ने उसका स्वागत किया
उसने अपना गेटअप चेंज किया
क्या वह भिखारी है या साहूकार ?
क्या वह भिखारी है या साहूकार ?

निष्णात


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समन्वय छात्र पत्रिका 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. वाणी वन्दना पं. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' 2:1
2. संस्थान गीत पं. रामेश्वर दयाल दुबे 2:2
3. प्रो. अशोक चक्रधर शुभकामनाएँ 3
4. प्रो. के. बिजय कुमार शुभकामनाएँ 4:1
5. डॉ.चंद्रकांत त्रिपाठी शुभकामनाएँ 4:2
6. राजकमल पाण्डेय संदेश 5:1
7. सम्पादक की बात वीना माथुर 5:2
8. हे! सृष्टि रचयिता विजय बालू सरडे 6
9. एक और लोकनायक की जरूरत है सागरिका महान्ति 7
10. सकल देशेर सेरा सीमा दास 9
11. नमस्कार का महत्व मंजूबाला महांकुड 10
12. हम आज भी पराधीन हैं चन्द्रभानु साहु 11
13. झूठी शोहरत रजनी बाला लॉली 12
14. आपके नाम रजनी बाला लॉली 12
15. बहुत बड़ा खेल है शिन्दे बंकट 13:1
16. वीर संभूधान फोंगलोसा हमजेन्दी हसनू 13:2
17. अस्पताल की वह रात राजीव यादव 14
18. गजल श्री हरी महल 15:1
19. समपर्ण सुस्मिता नायक 15:2
20. मैं हिन्दी का अध्यापक हूँ वीरेन्द्र कुमार सिंह 16
21. बंगला कविता का सार रूप में अनुवाद सीमा दास 17
22. मैनेजर पांडेय का आलोचना साहित्य संदीप आधार चव्हाण 18
23. चेहरा दीपक आर. चौहान 20
24. यायावर पंछी दीपक आर. चौहान 20
25. तितली दीपक आर. चौहान 20
26. संस्थान में मेरे अनुभव निबेदिता नाथ 21
27. आपातानी की कहानी 23
28. क्यों न दया मरे... प्रतिमा शर्मा 24
29. एक दृश्य ऐसा भी कस्तूरिका दाश 25
30. जब मैं आया पढ़ने यहाँ मानस रंजन दास 26:1
31. याद करेंगे सच्चे दिल से देबराज प्रधान 26:2
32. "मोअत्स त्यौहार" की कहानी इम्वापांगला. एल. इमसोंगू 27
33. 26 जनवरी का इतिहास मंजूबाला महांकुड 28
34. आगत ! स्वागत !! राजीव यादव 29
35. हवा प्रमोद कुमार 30:1
36. सावन आता है गौतम प्रसाद पातर 30:2
37. विकलांगता निवेदिता नाथ 31
38. चेहरा मंजूबाला महांकुड 32
39. नारी समस्या क्यों है भारी तोमर अनीता कुमार जगदीश सिंह 33:1
40. वर्तमान अब्दुल वादुद 33:2
41. बदलते परिवेश... विजय बालू सरडे 34
42. छात्रों की अभिलाषा रूपेश कुमार नायक 36:1
43. पैसा श्री हरि महल 36:2
44. बात मुद्दों की उठाओ कुलदीप शर्मा 37:1
45. शब्दों का जाल अनुजा डेका 37:2
46. राष्ट्रभाषा विभीषण गुरु 37:3
47. ठिकाना राजू कुमार पाण्डेय 38:1
48. जिन्दगी राजू कुमार पाण्डेय 38:1
49. सब कुछ हो तुम सन्तोष कुमार सुना 38:2
50. कथकली विष्णु जी 39
51. चुटकुले रूपेश कुमार नायक 40
52. भारतीय संस्कृति और वास्तविकता बसन्त कुमार विश्वाल 41
53. होली लवाण्य भानू रेखा 42
54. गणतन्त्र दिवस की वह शाम कस्तुरीका दाश 43
55. सूखी प्रतीक्षा संदिप आधार चव्हाण 45
56. भिखारी है या साहूकार संदिप आधार चव्हाण 45
57. भूखे पेट से संदिप आधार चव्हाण 46
58. महाराष्ट्र और मराठी की हकीकत शिंदे बंकटस्वामी बाला साहेब 47
59. प्रकृत-मनुष्य कौन है ? वीरेंद्र कुमार नाग 49
60. रेखा एस. जबीसलाम 50
61. शिक्षणाभ्यास एवं प्रायोगिक कार्य 51
62. भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 52
63. स्काउट परिणाम 53
64. गाइड परिणाम 54
65. स्काउट (टैंट निर्माण) 54
66. गाइड (टैंट-निर्माण) 55
67. सांस्कृतिक प्रतियोगिता 55
68. साहित्यिक गतिविधियाँ 57
69. विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 58
वैयक्तिक औज़ार

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