समन्वय छात्र पत्रिका-2012 पृ-14

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अपनी कक्षा पारंगत

प्रमोद कुमार यादव
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है तीर्थ भी यहीं
है ज्ञान का प्रकाश भी
है पावन तुलसी का वास भी,
जहाँ कोई संसारी तो कोई कंवारा है,
बहती जहाँ मंदाकिनी की धारा है
रहता जहाँ गोपियों का कान्हा है।
मित्र जिसका सुदामा है
माथे पर जिसके तिलक है।
वे वीरेन्द्र हैं, वीर हैं, बहादुर हैं, जब्बार हैं।
मदन मोहन भी उनका एक उपनाम है।
लक्ष्मी, सरस्वती, रुकमणी, सविता, दीपिका,
सारी देवियों का यहाँ निवास है
उनमें से ही एक सीमा विश्वास है।
नहीं जहाँ जाति धर्म का नाम है
रहते जहाँ, डेविड, कैनी, डफी, मिर्जा और राम हैं।
प्रेम ही जिनका धर्म है
प्रेम ही उनकी गीता है, कुरान है।
राहुल, संजय, अरुण और उत्तम जैसे विद्वान बैठे मौन हैं
उनके साथ में ही बैठें अपनी दीपिका पादुकोण हैं।
ऐसी हमारी संस्कृति हिली मिली है।
लाखों फूल हैं यहाँ
पर सबसे प्यारी लिली है
किसी का मजाल है? जो हमसे भिड़ जाए
उसे साक्षात शिवशंकर जी न निगल जाए
उसके लिए तो हमेशा एक तूफान ही काफी है
फिर क्या हस्त्र हो? अगर ! उसे झाँसी की रानी मिल जाए।
कसम तीरम की उसकी सारी मर्दानगी मिट्टी में मिल जाए।
इसीलिए मुझे अपनी पारंगत कक्षा पर अभिमान है
यहाँ के सभी लोग महान हैं।
आचार्य, योगाचार्य गुरु
बब्बन सिंह को भी
मेरा प्रणाम है।
वेस्ट बंगाल आसनसोल में रहता हूँ।
और प्रमोद मेरा नाम है।


हास्य कविता "सर्वनाम"


एक दिन में क्लास में लेट से आया।
क्लास में थी अपनी मैडम माया।

वह पढ़ा रही थी बच्चों को सर्वनाम
थोड़ी देर बाद उन्होंने पूछा मेरा नाम।

बोली क्यों श्रीमान लेट क्यों आए
क्या वह आपको बाहर का रास्ता दिखलाए।

मैं बहुत गिड़गिड़ाया और बोला, मैं गिर गया था
और मुझे लग गई थी वह जोर से चिल्लायी

और कहा कहाँ गिर गए और क्या लग गई थी।
मैंने कहा बैड पर गिर गया और आँख लग गई थी।

मैडम भड़क कर बोली बदमाश एक तो लेट से आते हो
ऊपर से चुटकुले सुनाते हो।

इधर आओ चॉक पकड़ो और बच्चों को सर्वनाम बताओ
मैंने मैडम से चॉक लिया और बच्चों को सम्बोधित किया।

लड़का इनसे जरा बच लेना
जहाँ भी इन्हें देखों वहीं से उल्टे पैर सटक लेना

यह बहुत बड़ी माया है
खुदा ने इनमें 164 गुण समाया है।

कितनों को इन्होंने डण्डा दिखाया है
और कितनों को मुर्गा बनाया है।

इनसे, इन्हें, ऐ, इन्होंने ये शब्द जहाँ भी आया है।
इसे मैंने माया मैडम के बदले लगाया है।

यही सारे शब्द सर्वनाम हैं
वेस्ट बंगाल में रहता हूँ
और प्रमोद मेरा नाम है।

पारंगत


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13:3
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15:1
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समन्वय छात्र पत्रिका 2012 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संत कबीर की भक्ति भावना में श्री जगन्नाथ मदन मोहन दाश (पारंगत) 1
गजल ज्ञान प्रकाश पाण्डेय (पारंगत) 2:1
विरोधाभास तिलक राज शर्मा (पारंगत) 2:2
हिंदी की बिंदी क्षत्रिय भूपेन्द्र कुमार डी (निष्णात) 2:3
हिंदी की जय हो भबानि शंकर नाएक (प्रवीण) 2:4
स्वामी विवेकानन्द का शैक्षिक चिंतन धनंजय लहामगे (निष्णात) 3
गम ही सच्चा साथी भोसले उद्धव (निष्णात) 4:1
जिंदगी क्या है? तिरम सुनानी (पारंगत) 4:2
"हाय! ये दोस्ती क्या रंग लाती है" ध्रुति सुन्दर साहु (प्रवीण) 4:3
विद्या सबसे बड़ी शोभा अक्षय बल्लभ दाश (पारंगत) 5:1
ओड़िशा का सबसे बड़ा मेला "बालियात्रा" नब किशोर बेहेरा (पारंगत) 5:2
मत आओ मत आओ! श्रीमती सागरिका महाराणा (प्रवीण) 6:1
माँ रंजीत एम. मेश्राम (प्रवीण) 6:2
तेरी कमी धनजंय (निष्णात) 7:1
संस्थान की आरती अजित कुमार पंडा (प्रवीण) 7:2
चाँद बीबी एक पराक्रमी योद्धा मनोज शिंदे (निष्णात) 8
प्रार्थना (सन्तजनों के चरणों में) सुतारी राजेन्द्र रेड्डी (प्रवीण) 10:1
स्मृति मु. मुहिबुल्लाह (निष्णात) 10:2
वृक्ष की मानव से अपील नव किशोर बेहेरा (पारंगत) 11:1
सिर्फ पापा अभय अंजन दे (प्रवीण) 11:2
हमारा संस्थान प्रबीर कुमार पट्टायत (प्रवीण) 12:1
कभी नहीं भूलूँगा मैं हिंदी संस्थान को देबराज पधान (पारंगत) 12:2
चिंता विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 13:1
वजूद विष्णु खडसे (निष्णात) 13:2
तुम मुहम्मद गफूर यु. केरल (प्रवीण) 13:3
अपनी कक्षा पारंगत प्रमोद कुमार यादव (पारंगत) 14
हिंदी ही काम आई है प्रमोद कुमार यादव (पारगंत) 15:1
शर्म खाऊँ तो क्यों? तोफान पधान (पारंगत) 15:2
फतेहपुर सीकरी के दर्शन तोफान पधान (पारंगत) 16
नमस्ते गंगा सीताकांत पट्टनायक (पारंगत) 17
हे ताजमहल ! मिथुन दास (प्रवीण) 19
कौआ और पाँकपाँक चानवेनी किकोन (तृतीय वर्ष) 20:1
नेताजी-नेताजी, आप ये क्या कर रहे हो? भुरिया विनुभाई (निष्णात) 20:2
बेटा हो या बेटी संसारी नायक (पारंगत) 20:3
हाथी से बना हस्ती संसारी नायक (पारंगत) 21:1
बेटी शेख सगीर (प्रवीण) 21:2
कब मैं पराई हो गई? एस. तुलसी (पारंगत) 22
हे ईश्वर इतनी शक्ति दो! सुदाम पटेल (पारंगत) 23
प्रायश्चित (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 24
प्रेम परीक्षा (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 25
जो भी हो... लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
मुस्कान लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
उगादि एस. राजशेखर (निष्णात) 27:1
स्वयं करो पी. शिवशंकर पात्र (पारंगत) 27:2
संघर्ष विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 28:1
बदनाम एस. फाल्गुनी देवी (निष्णात) 28:2
भ्रष्टाचार तीर्थ बघार (पारंगत) 28:3
छोड़ दे। अर्चना सिंह (निष्णात) 28:4
अरलाउ न्यानो लोथा (तृतीय वर्ष) 29:1
चूजे भी शाहीनों से लड़ जाते हैं मोहम्मद तिर्जा जहिरूद्दीन (पारंगत) 29:2
परीक्षा भबानि शंकर नाएक 29:3
संस्थान में नुआँखाई का वह दिन कान्हा त्रिपाठी 30
"एक खत यार को" नीतिश कुमार पति 31
नूआँखाई पर्व तीर्थ बघार 32:1
तेरे आँसू शेख हारून 32:2
आतंकवाद जितेन्द्र पधान 32:3
कुछ कर दिखलाते हैं अर्चना सिंह 33:1
कैसा प्यार? बबन सिंह 33:2
मेरा जिला "नर्मदा जिला" वसावा रविन्द्र कुमार शांतिलाल 34
और कर भी क्या सकती हो तुम ! पंचानन मेहेर 36:1
भगवान की प्रतिज्ञा शेख हारून 36:2
"शहरीकरण का मानव पर प्रभाव" प्रमोद कुमार यादव 37
भ्रष्टाचार वृद्धि के कारण एवं समाधान सुश्री रश्मिता पाणिग्रही 38
राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति जवीर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, (सीनियर स्केल) 39
केंद्रीय हिंदी आगरा 43
साहित्य सभा का गठन 45
शिक्षणाभ्यास कार्यक्रम वर्ष : 2011-2012 45
भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 46
विषय- साहित्यिक प्रतियोगिताएँ 50
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 51
विजेताओं की सूची 51
खेलकूद प्रतियोगिता सत्र – 2011-12 53
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 54
आंतरिक परीक्षा 55
अध्यापक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य 55
अध्यापक शिक्षा विभाग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सूची 55
श्रद्धांजलि 57
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल की शासी परिषद के सदस्यों की सूची 58
वैयक्तिक औज़ार

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