समन्वय छात्र पत्रिका-2012 पृ-27:1

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उगादि

एस. राजशेखर
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किसी भी संस्कृति में त्योहार, माला में मोतियों की भांति पिरोए हुए हैं। त्योहारों को संस्कृति से अलग नहीं किया जा सकता। भारत ही नहीं हर एक देश के त्योहार अपने देश के महापुरुषों के संस्मरण, धार्मिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और जातीय आख्यानों को लेकर ही मनाये जाते हैं। भारत में बहुत से ऐसे त्योहार हैं, जो सारे देश में एक ढंग से नहीं मनाए जाते हैं। 'उगादि' भी एक ऐसा ही त्योहार है, जो आंध्र प्रदेश में बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।

'उगादि' नये वर्ष का प्रथम दिन है। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश में विशेष रूप से त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व चैत्र मास का प्रथम दिन यानि प्रतिपदा। नये साल के आरम्भ के अवसर पर यह उत्सव मनाया जाता है। उगादि के दिन घर के सब लोग सवेरे जल्दी ही जागते हैं। मंगल स्नान करते हैं। मंगल स्नान सूर्योदय से पहले ही सिर पर तेल लगाकर किया जाने वाला सिरोस्नान है। मंगल स्नान के बाद नये कपड़े पहने जाते हैं। दिन भर आनंद मनाते हैं। आम और नीम के पत्ते घर के द्वार पर लगाये जाते हैं। घर-घर में तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं। पर इस त्योहार के अवसर पर एक विशेष चटनी बनाई जाती है, जो उगादि पच्चडि नाम से प्रसिद्ध है। 'पच्चडि' का अर्थ चटनी है। इसकी षडरुचियाँ होती हैं। इमली से खट्टापन, गुड़ से मिठास, कच्चे आम से कसैलापन, नमक से नमकीन, नीम के फूलों से कड़वाहट और हरी मिर्च से तीखापन इस में मिलते हैं। इन्हीं से छह स्वादों की चटनी बन जाती है। ये स्वाद जीवन के तरह-तरह के अनुभवों के प्रतीक हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि जीवन सुख-दु:खों का संगम है।

दोपहर को अच्छा खाना बनता है। सब मिलकर खाते हैं। इसमें अच्छी-अच्छी मिठाइयाँ भी बनती हैं। शाम को वर्ष का पंचांग श्रवण होता है। पुरोहित वर्ष फल सुनाते हैं। कुछ लोग पुरोहित को घर पर आमंत्रित करते हैं। सामूहिक रूप से मंदिर अथवा किसी एक सार्वजनिक स्थान पर सब के लिए पंचांग श्रवण का आयोजन किया जाता है। पंचांग श्रवण में पुरोहित वर्ष फल के अंतर्गत ग्रहों की स्थिति, उनके शुभ और अशुभ फल, वर्षा का परिमाण, फसलों की स्थिति, राशि फल आदि की पूर्व सूचना देते हैं।

निष्णात


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समन्वय छात्र पत्रिका 2012 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संत कबीर की भक्ति भावना में श्री जगन्नाथ मदन मोहन दाश (पारंगत) 1
गजल ज्ञान प्रकाश पाण्डेय (पारंगत) 2:1
विरोधाभास तिलक राज शर्मा (पारंगत) 2:2
हिंदी की बिंदी क्षत्रिय भूपेन्द्र कुमार डी (निष्णात) 2:3
हिंदी की जय हो भबानि शंकर नाएक (प्रवीण) 2:4
स्वामी विवेकानन्द का शैक्षिक चिंतन धनंजय लहामगे (निष्णात) 3
गम ही सच्चा साथी भोसले उद्धव (निष्णात) 4:1
जिंदगी क्या है? तिरम सुनानी (पारंगत) 4:2
"हाय! ये दोस्ती क्या रंग लाती है" ध्रुति सुन्दर साहु (प्रवीण) 4:3
विद्या सबसे बड़ी शोभा अक्षय बल्लभ दाश (पारंगत) 5:1
ओड़िशा का सबसे बड़ा मेला "बालियात्रा" नब किशोर बेहेरा (पारंगत) 5:2
मत आओ मत आओ! श्रीमती सागरिका महाराणा (प्रवीण) 6:1
माँ रंजीत एम. मेश्राम (प्रवीण) 6:2
तेरी कमी धनजंय (निष्णात) 7:1
संस्थान की आरती अजित कुमार पंडा (प्रवीण) 7:2
चाँद बीबी एक पराक्रमी योद्धा मनोज शिंदे (निष्णात) 8
प्रार्थना (सन्तजनों के चरणों में) सुतारी राजेन्द्र रेड्डी (प्रवीण) 10:1
स्मृति मु. मुहिबुल्लाह (निष्णात) 10:2
वृक्ष की मानव से अपील नव किशोर बेहेरा (पारंगत) 11:1
सिर्फ पापा अभय अंजन दे (प्रवीण) 11:2
हमारा संस्थान प्रबीर कुमार पट्टायत (प्रवीण) 12:1
कभी नहीं भूलूँगा मैं हिंदी संस्थान को देबराज पधान (पारंगत) 12:2
चिंता विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 13:1
वजूद विष्णु खडसे (निष्णात) 13:2
तुम मुहम्मद गफूर यु. केरल (प्रवीण) 13:3
अपनी कक्षा पारंगत प्रमोद कुमार यादव (पारंगत) 14
हिंदी ही काम आई है प्रमोद कुमार यादव (पारगंत) 15:1
शर्म खाऊँ तो क्यों? तोफान पधान (पारंगत) 15:2
फतेहपुर सीकरी के दर्शन तोफान पधान (पारंगत) 16
नमस्ते गंगा सीताकांत पट्टनायक (पारंगत) 17
हे ताजमहल ! मिथुन दास (प्रवीण) 19
कौआ और पाँकपाँक चानवेनी किकोन (तृतीय वर्ष) 20:1
नेताजी-नेताजी, आप ये क्या कर रहे हो? भुरिया विनुभाई (निष्णात) 20:2
बेटा हो या बेटी संसारी नायक (पारंगत) 20:3
हाथी से बना हस्ती संसारी नायक (पारंगत) 21:1
बेटी शेख सगीर (प्रवीण) 21:2
कब मैं पराई हो गई? एस. तुलसी (पारंगत) 22
हे ईश्वर इतनी शक्ति दो! सुदाम पटेल (पारंगत) 23
प्रायश्चित (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 24
प्रेम परीक्षा (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 25
जो भी हो... लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
मुस्कान लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
उगादि एस. राजशेखर (निष्णात) 27:1
स्वयं करो पी. शिवशंकर पात्र (पारंगत) 27:2
संघर्ष विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 28:1
बदनाम एस. फाल्गुनी देवी (निष्णात) 28:2
भ्रष्टाचार तीर्थ बघार (पारंगत) 28:3
छोड़ दे। अर्चना सिंह (निष्णात) 28:4
अरलाउ न्यानो लोथा (तृतीय वर्ष) 29:1
चूजे भी शाहीनों से लड़ जाते हैं मोहम्मद तिर्जा जहिरूद्दीन (पारंगत) 29:2
परीक्षा भबानि शंकर नाएक 29:3
संस्थान में नुआँखाई का वह दिन कान्हा त्रिपाठी 30
"एक खत यार को" नीतिश कुमार पति 31
नूआँखाई पर्व तीर्थ बघार 32:1
तेरे आँसू शेख हारून 32:2
आतंकवाद जितेन्द्र पधान 32:3
कुछ कर दिखलाते हैं अर्चना सिंह 33:1
कैसा प्यार? बबन सिंह 33:2
मेरा जिला "नर्मदा जिला" वसावा रविन्द्र कुमार शांतिलाल 34
और कर भी क्या सकती हो तुम ! पंचानन मेहेर 36:1
भगवान की प्रतिज्ञा शेख हारून 36:2
"शहरीकरण का मानव पर प्रभाव" प्रमोद कुमार यादव 37
भ्रष्टाचार वृद्धि के कारण एवं समाधान सुश्री रश्मिता पाणिग्रही 38
राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति जवीर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, (सीनियर स्केल) 39
केंद्रीय हिंदी आगरा 43
साहित्य सभा का गठन 45
शिक्षणाभ्यास कार्यक्रम वर्ष : 2011-2012 45
भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 46
विषय- साहित्यिक प्रतियोगिताएँ 50
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 51
विजेताओं की सूची 51
खेलकूद प्रतियोगिता सत्र – 2011-12 53
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 54
आंतरिक परीक्षा 55
अध्यापक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य 55
अध्यापक शिक्षा विभाग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सूची 55
श्रद्धांजलि 57
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल की शासी परिषद के सदस्यों की सूची 58
वैयक्तिक औज़ार

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