समन्वय छात्र पत्रिका-2012 पृ-31

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"एक खत यार को"

नीतिश कुमार पति
Nitish Kumar Pati.jpg

काश! तुम न मिले होते मेरे यार
हमें इस जीवन में,
तो जीवन कितना आसान होता इस जहाँ में,
न तुमसे जुदा होने का गम होता
और न ही मरने की ये चाहत होती
मेरे दिल में।

हम तो रोना नहीं चाहते मेरे यार,
पर हम करें भी तो क्या करें
जब जलता है ये दिल हमारा
जुदाई की आग में
आँसू की बारिश करते हैं तभी ये नैन हमारे,
उस आग को बुझाने के लिए
बड़ी बेताबी में।

हम तो दौड़े चले आये थे तुम्हारे पास, बस तुम्हें अपने सीने
से लगाकर, बिरहा की आग में जलते इस दिल को
ठंडक पहुँचाने के लिए।

हम तो मिलना चाहते थे तुमसे मेरे यार, खुशी के सावन से तुमसे
मिलने की आस में भीगे इन आँखों की प्यास बुझाने के लिए।
पर तुमने तो इनकार कर दिया उस पल, हमारे पास आने के लिए।

हाँ, हम तो यह गलती कर बैठे कि शर्त रख दी तुम्हारे आगे,
माता के दर पे जाने के लिए, हमने उसी वक्त बहा दी
एक धारा लहू की, क्योंकि इस लहू कि विजय से ही, है ये जीवन हमारा
तुमसे बिछुड़ने के लिए।

माँ कसम! हम तो तभी पैदल चले आए होते तुम्हारे क्वार्टर पर,
अगर किसी एक ने भी हाँ की होती हमें
राह दिखाने के लिए।

हमने तो पहली बार गुजारिश की थी तुमसे, हमराही बनने को हमारे
बस एक रात के लिए।
हम राही बनकर जाने को माता के दर्शन के लिए, वह फिर उस माता
के पास, जिसने वरदान दिया है हमें साथ जीने मरने को
जन्म-जन्मांतर के लिए।

आखिर हमें भी तो बताओ वह कौन-सी ऐसी वजह थी, जिसके
लिए तुमने इनकार कर दिया,
हमारे साथ आने के लिए।

तुम क्या जानो कितने जतन किये थे हमने,
बस ये एक बात तुमसे कहने के लिए।
कितनी मिन्नतें न की थीं सबसे
बस एक बार फोन देने के लिए।

अरे! आँखें तो कब की भर चुकी थीं चश्मे के पीछे से,
बस बाकी था तो उन सबका पैर पकड़ना, सिर्फ एक 'कॉल' के लिए।

हम तो गए थे गाँव से, तुम्हारा साथ मांग कर
उस अनमोल पल को जीने के लिए,

तुमने तो यार न दिया अपना साथ, पर सबसे बड़ा गम दे दिया
तड़प-तड़प कर जीने के लिए।
हम तुम्हें दोष नहीं देते, अरे! गलती तो हमने की थी,
खामखाही पहले से आशा कर बैठे थे तुमसे
तुम्हारा साथ पाने के लिए।

ए दोस्त! हो सकता है तुम भूल सकते हो हमें
निकलने से पहले रेलवे प्लेटफार्म से
पर हम नहीं भूल सकते तुम्हें, ये जान जाने से पहले।
हमारे जिस्म से।

प्रवीण


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समन्वय छात्र पत्रिका 2012 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संत कबीर की भक्ति भावना में श्री जगन्नाथ मदन मोहन दाश (पारंगत) 1
गजल ज्ञान प्रकाश पाण्डेय (पारंगत) 2:1
विरोधाभास तिलक राज शर्मा (पारंगत) 2:2
हिंदी की बिंदी क्षत्रिय भूपेन्द्र कुमार डी (निष्णात) 2:3
हिंदी की जय हो भबानि शंकर नाएक (प्रवीण) 2:4
स्वामी विवेकानन्द का शैक्षिक चिंतन धनंजय लहामगे (निष्णात) 3
गम ही सच्चा साथी भोसले उद्धव (निष्णात) 4:1
जिंदगी क्या है? तिरम सुनानी (पारंगत) 4:2
"हाय! ये दोस्ती क्या रंग लाती है" ध्रुति सुन्दर साहु (प्रवीण) 4:3
विद्या सबसे बड़ी शोभा अक्षय बल्लभ दाश (पारंगत) 5:1
ओड़िशा का सबसे बड़ा मेला "बालियात्रा" नब किशोर बेहेरा (पारंगत) 5:2
मत आओ मत आओ! श्रीमती सागरिका महाराणा (प्रवीण) 6:1
माँ रंजीत एम. मेश्राम (प्रवीण) 6:2
तेरी कमी धनजंय (निष्णात) 7:1
संस्थान की आरती अजित कुमार पंडा (प्रवीण) 7:2
चाँद बीबी एक पराक्रमी योद्धा मनोज शिंदे (निष्णात) 8
प्रार्थना (सन्तजनों के चरणों में) सुतारी राजेन्द्र रेड्डी (प्रवीण) 10:1
स्मृति मु. मुहिबुल्लाह (निष्णात) 10:2
वृक्ष की मानव से अपील नव किशोर बेहेरा (पारंगत) 11:1
सिर्फ पापा अभय अंजन दे (प्रवीण) 11:2
हमारा संस्थान प्रबीर कुमार पट्टायत (प्रवीण) 12:1
कभी नहीं भूलूँगा मैं हिंदी संस्थान को देबराज पधान (पारंगत) 12:2
चिंता विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 13:1
वजूद विष्णु खडसे (निष्णात) 13:2
तुम मुहम्मद गफूर यु. केरल (प्रवीण) 13:3
अपनी कक्षा पारंगत प्रमोद कुमार यादव (पारंगत) 14
हिंदी ही काम आई है प्रमोद कुमार यादव (पारगंत) 15:1
शर्म खाऊँ तो क्यों? तोफान पधान (पारंगत) 15:2
फतेहपुर सीकरी के दर्शन तोफान पधान (पारंगत) 16
नमस्ते गंगा सीताकांत पट्टनायक (पारंगत) 17
हे ताजमहल ! मिथुन दास (प्रवीण) 19
कौआ और पाँकपाँक चानवेनी किकोन (तृतीय वर्ष) 20:1
नेताजी-नेताजी, आप ये क्या कर रहे हो? भुरिया विनुभाई (निष्णात) 20:2
बेटा हो या बेटी संसारी नायक (पारंगत) 20:3
हाथी से बना हस्ती संसारी नायक (पारंगत) 21:1
बेटी शेख सगीर (प्रवीण) 21:2
कब मैं पराई हो गई? एस. तुलसी (पारंगत) 22
हे ईश्वर इतनी शक्ति दो! सुदाम पटेल (पारंगत) 23
प्रायश्चित (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 24
प्रेम परीक्षा (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 25
जो भी हो... लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
मुस्कान लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
उगादि एस. राजशेखर (निष्णात) 27:1
स्वयं करो पी. शिवशंकर पात्र (पारंगत) 27:2
संघर्ष विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 28:1
बदनाम एस. फाल्गुनी देवी (निष्णात) 28:2
भ्रष्टाचार तीर्थ बघार (पारंगत) 28:3
छोड़ दे। अर्चना सिंह (निष्णात) 28:4
अरलाउ न्यानो लोथा (तृतीय वर्ष) 29:1
चूजे भी शाहीनों से लड़ जाते हैं मोहम्मद तिर्जा जहिरूद्दीन (पारंगत) 29:2
परीक्षा भबानि शंकर नाएक 29:3
संस्थान में नुआँखाई का वह दिन कान्हा त्रिपाठी 30
"एक खत यार को" नीतिश कुमार पति 31
नूआँखाई पर्व तीर्थ बघार 32:1
तेरे आँसू शेख हारून 32:2
आतंकवाद जितेन्द्र पधान 32:3
कुछ कर दिखलाते हैं अर्चना सिंह 33:1
कैसा प्यार? बबन सिंह 33:2
मेरा जिला "नर्मदा जिला" वसावा रविन्द्र कुमार शांतिलाल 34
और कर भी क्या सकती हो तुम ! पंचानन मेहेर 36:1
भगवान की प्रतिज्ञा शेख हारून 36:2
"शहरीकरण का मानव पर प्रभाव" प्रमोद कुमार यादव 37
भ्रष्टाचार वृद्धि के कारण एवं समाधान सुश्री रश्मिता पाणिग्रही 38
राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति जवीर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, (सीनियर स्केल) 39
केंद्रीय हिंदी आगरा 43
साहित्य सभा का गठन 45
शिक्षणाभ्यास कार्यक्रम वर्ष : 2011-2012 45
भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 46
विषय- साहित्यिक प्रतियोगिताएँ 50
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 51
विजेताओं की सूची 51
खेलकूद प्रतियोगिता सत्र – 2011-12 53
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 54
आंतरिक परीक्षा 55
अध्यापक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य 55
अध्यापक शिक्षा विभाग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सूची 55
श्रद्धांजलि 57
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल की शासी परिषद के सदस्यों की सूची 58
वैयक्तिक औज़ार

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