समन्वय छात्र पत्रिका-2012 पृ-46

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केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा

अध्यापक शिक्षा विभाग

भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर

शैक्षिक सत्र : 2011-2012


भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर राष्ट्रीय स्तर पर अध्यापक शिक्षा विभाग के पूर्ण सत्रीय स्नातक पाठ्यक्रमों का आवश्यक अंग है। संस्थान के शैक्षिक सत्र 2011-2012 में हिंदी शिक्षण पारंगत, हिंदी शिक्षण प्रवीण, हिंदी शिक्षण डिप्लोमा तृतीय वर्ष एवं निष्णात कक्षा के एक छात्र के पूर्ण सत्रीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण हेतु दिनांक 17.10.2011 से 21.10.2011 तक पांच दिवसीय स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर के संयोजन का दायित्व डॉ. कु. मीनाक्षी दुबे एवं विभाग के अन्य सदस्यों ने निभाया।

दिनांक 17.10.2011 को पूर्वाह्न 10.30 बजे अध्यापक शिक्षा विभाग के शैक्षिक वर्ग के सभी सदस्यों, स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षणार्थियों, संस्थान के निदेशक डॉ. मोहन, कुल सचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी, अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष तथा प्रशिक्षक श्री विजय सिंह लवानियाँ, डॉ. राधेश्याम शर्मा की उपस्थिति में शिविर का शुभारंभ संस्थान के खेल मैदान पर किया गया।

जहाँ शिविर के इस प्रथम दिन के औपचारिक उद्घाटन कार्यक्रम में स्काउट गाइड के नियमों का पालन करते हुए सर्वप्रथम स्काउट एवं गाइड का झंडारोहण संस्थान के निदेशक डॉ. मोहन जी के कर कमलों से हुआ। झंडा गीत एवं गाइड प्रार्थना के पश्चात निदेशक महोदय ने अपने संबोधन भाषण में शिविर की सफलता के लिए प्रशिक्षणार्थियों को शुभकामनाएँ दीं तथा शिविर के उद्देश्यों, जिम्मेदारियों के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ होने की कामना की। कुल सचिव ने अपने संदेश में प्रशिक्षणार्थियों को लक्ष्य के प्रति सच्ची आत्म निष्ठा के साथ कार्य करने के महत्त्व को समझाया।

तत्पश्चात शिविर की दिनचर्या निर्धारित की गई। जिसमें प्रशिक्षक डॉ. राधेश्याम शर्मा ने स्काउट एवं गाइड संस्था का परिचय दिया, साथ ही साथ संस्था के नियम और उद्देश्य बताए।

प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन दिनांक 18.10.2011 को शिविर के झंडारोहण, झंडा गीत और प्रार्थना के साथ दिनचर्या प्रारम्भ हुई। शारीरिक सौष्ठव के विकास के लिए योगाभ्यास तथा मार्च पास का प्रशिक्षण दिया गया। भोजनावकाश के पश्चात अपराह्न 2 बजे से सांय 5 बजे तक नजीर सभागार में प्रशिक्षणार्थियों को प्रथम चरण में अध्यापन कार्य कराया गया। दूसरे चरण में विभिन्न प्रकार की गाँठें, लैशिंग तथा आपात स्थिति में सीमित संसाधन और टैंट बनाकर भी जीवन जीने की कला का प्रशिक्षण प्रशिक्षणार्थियों को दिया गया।

प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन दिनांक 19.10.2011 को प्रात: 8.00 बजे संस्थान परिसर में ही प्रशिक्षणार्थियों को चुने गए संस्थान पर टोलियों के अनुसार टैंट निर्माण करने के साथ ही भोजन बनाने का कार्य सौंपा गया।

सर्वप्रथम प्रशिक्षणार्थियों ने संस्थान परिसर में टैंट निर्माण कर परिसर के वातावरण में सतरंगी छटा बिखेर दी। कहीं कलिंग की स्थापत्य कला मूर्तवान हो रही थी तो कहीं पूर्वोत्तर भारत का सांस्कृतिक परिवेश गुनगुना रहा था। महाराष्ट्र की वीरता, दक्षिण भारत की आलंकारितकता से समूचा परिवेश महिमामंडित हो रहा था। संस्थान के निदेशक, कुल सचिव, अध्यापक शिक्षा विभाग के सदस्य अन्य विभागों के सदस्यों के साथ साथ निर्णायक मंडल के सदस्यों ने शिविर का निरीक्षण किया। साथ ही सीमित संसाधनों से निर्धारित समय पर प्रशिक्षणार्थियों के द्वारा बनाए गए भोजन का भी परीक्षण किया गया।

भारत के अलग-अलग प्रांतों की विशिष्टता का परिचय देते हुए व्यंजनों को प्लेटों में सजा दिया गया। भोजन व्यवस्था देखने में जितनी आकर्षक लग रही थी, उससे कहीं अधिक उसका रसास्वादन था।

प्रशिक्षण शिविर के चौथे दिन दिनांक 20.10.2011 को शिविर की गतिविधियों में झंडारोहण के साथ सर्वप्रथम खोजी चिह्नों की जानकारी प्रशिक्षणार्थियों को दी गई। फिर हाईकिंग के लिए खोजी चिह्नों के सहारे संस्थान रोह होते हुए लॉयर्स कालौनी स्थित राधा कृष्ण मंदिर प्रशिक्षणार्थी पहुँचे। जहाँ देश की उन्नती और प्रगति के लिए प्रार्थना की गई। यहाँ प्रशिक्षक के सहयोग से बौद्धिक खेल खेले गये। इसमें शैक्षिक वर्ग के सदस्य एवं प्रशासनिक वर्ग के सदस्यों का सहयोग प्राप्त हुआ।

पांचवें दिन और अंतिम दिन दिनांक 21.10.2011 को प्रात: 8.00 बजे दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। इस अवरस पर शैक्षिक वर्ग के सदस्य तथा संस्थान के कुल सचिव डॉ. चंद्रकांत त्रिपाठी उपस्थित थे। दीक्षा ग्रहण करने के पश्चात नजीर सभागार में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहाँ प्रशिक्षणार्थियों ने राजनैतिक, सामाजिक, धार्मिक विषयों पर अपनी अपनी प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत कीं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के पश्चात पांच दिवसीय शिविर की अवधि में प्रशिक्षणार्थियों द्वारा शिविर में अपनाये गए व्यवहार, आचार-विचार, संयम-नियमों का पालन करने के लिए प्रशिक्षणार्थियों की टोलियों को टैंट निर्माण कला, भोजन प्रस्तुति तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने पर प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान के परिणामों की घोषणा की गई, जिसका विवरण इस प्रकार है-


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समन्वय छात्र पत्रिका 2012 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संत कबीर की भक्ति भावना में श्री जगन्नाथ मदन मोहन दाश (पारंगत) 1
गजल ज्ञान प्रकाश पाण्डेय (पारंगत) 2:1
विरोधाभास तिलक राज शर्मा (पारंगत) 2:2
हिंदी की बिंदी क्षत्रिय भूपेन्द्र कुमार डी (निष्णात) 2:3
हिंदी की जय हो भबानि शंकर नाएक (प्रवीण) 2:4
स्वामी विवेकानन्द का शैक्षिक चिंतन धनंजय लहामगे (निष्णात) 3
गम ही सच्चा साथी भोसले उद्धव (निष्णात) 4:1
जिंदगी क्या है? तिरम सुनानी (पारंगत) 4:2
"हाय! ये दोस्ती क्या रंग लाती है" ध्रुति सुन्दर साहु (प्रवीण) 4:3
विद्या सबसे बड़ी शोभा अक्षय बल्लभ दाश (पारंगत) 5:1
ओड़िशा का सबसे बड़ा मेला "बालियात्रा" नब किशोर बेहेरा (पारंगत) 5:2
मत आओ मत आओ! श्रीमती सागरिका महाराणा (प्रवीण) 6:1
माँ रंजीत एम. मेश्राम (प्रवीण) 6:2
तेरी कमी धनजंय (निष्णात) 7:1
संस्थान की आरती अजित कुमार पंडा (प्रवीण) 7:2
चाँद बीबी एक पराक्रमी योद्धा मनोज शिंदे (निष्णात) 8
प्रार्थना (सन्तजनों के चरणों में) सुतारी राजेन्द्र रेड्डी (प्रवीण) 10:1
स्मृति मु. मुहिबुल्लाह (निष्णात) 10:2
वृक्ष की मानव से अपील नव किशोर बेहेरा (पारंगत) 11:1
सिर्फ पापा अभय अंजन दे (प्रवीण) 11:2
हमारा संस्थान प्रबीर कुमार पट्टायत (प्रवीण) 12:1
कभी नहीं भूलूँगा मैं हिंदी संस्थान को देबराज पधान (पारंगत) 12:2
चिंता विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 13:1
वजूद विष्णु खडसे (निष्णात) 13:2
तुम मुहम्मद गफूर यु. केरल (प्रवीण) 13:3
अपनी कक्षा पारंगत प्रमोद कुमार यादव (पारंगत) 14
हिंदी ही काम आई है प्रमोद कुमार यादव (पारगंत) 15:1
शर्म खाऊँ तो क्यों? तोफान पधान (पारंगत) 15:2
फतेहपुर सीकरी के दर्शन तोफान पधान (पारंगत) 16
नमस्ते गंगा सीताकांत पट्टनायक (पारंगत) 17
हे ताजमहल ! मिथुन दास (प्रवीण) 19
कौआ और पाँकपाँक चानवेनी किकोन (तृतीय वर्ष) 20:1
नेताजी-नेताजी, आप ये क्या कर रहे हो? भुरिया विनुभाई (निष्णात) 20:2
बेटा हो या बेटी संसारी नायक (पारंगत) 20:3
हाथी से बना हस्ती संसारी नायक (पारंगत) 21:1
बेटी शेख सगीर (प्रवीण) 21:2
कब मैं पराई हो गई? एस. तुलसी (पारंगत) 22
हे ईश्वर इतनी शक्ति दो! सुदाम पटेल (पारंगत) 23
प्रायश्चित (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 24
प्रेम परीक्षा (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 25
जो भी हो... लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
मुस्कान लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
उगादि एस. राजशेखर (निष्णात) 27:1
स्वयं करो पी. शिवशंकर पात्र (पारंगत) 27:2
संघर्ष विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 28:1
बदनाम एस. फाल्गुनी देवी (निष्णात) 28:2
भ्रष्टाचार तीर्थ बघार (पारंगत) 28:3
छोड़ दे। अर्चना सिंह (निष्णात) 28:4
अरलाउ न्यानो लोथा (तृतीय वर्ष) 29:1
चूजे भी शाहीनों से लड़ जाते हैं मोहम्मद तिर्जा जहिरूद्दीन (पारंगत) 29:2
परीक्षा भबानि शंकर नाएक 29:3
संस्थान में नुआँखाई का वह दिन कान्हा त्रिपाठी 30
"एक खत यार को" नीतिश कुमार पति 31
नूआँखाई पर्व तीर्थ बघार 32:1
तेरे आँसू शेख हारून 32:2
आतंकवाद जितेन्द्र पधान 32:3
कुछ कर दिखलाते हैं अर्चना सिंह 33:1
कैसा प्यार? बबन सिंह 33:2
मेरा जिला "नर्मदा जिला" वसावा रविन्द्र कुमार शांतिलाल 34
और कर भी क्या सकती हो तुम ! पंचानन मेहेर 36:1
भगवान की प्रतिज्ञा शेख हारून 36:2
"शहरीकरण का मानव पर प्रभाव" प्रमोद कुमार यादव 37
भ्रष्टाचार वृद्धि के कारण एवं समाधान सुश्री रश्मिता पाणिग्रही 38
राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति जवीर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, (सीनियर स्केल) 39
केंद्रीय हिंदी आगरा 43
साहित्य सभा का गठन 45
शिक्षणाभ्यास कार्यक्रम वर्ष : 2011-2012 45
भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 46
विषय- साहित्यिक प्रतियोगिताएँ 50
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 51
विजेताओं की सूची 51
खेलकूद प्रतियोगिता सत्र – 2011-12 53
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 54
आंतरिक परीक्षा 55
अध्यापक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य 55
अध्यापक शिक्षा विभाग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सूची 55
श्रद्धांजलि 57
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल की शासी परिषद के सदस्यों की सूची 58
वैयक्तिक औज़ार

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