समन्वय छात्र पत्रिका-2012 पृ-8

ज्ञानकोश से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


चाँद बीबी एक पराक्रमी योद्धा

मनोज शिंदे
Manoj Shinde.jpg

चाँद बीबी जिन्हें चाँद खातून या चाँद सुल्ताना के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय मुस्लिम महिला योद्धा थीं। चाँद बीबी ने बीजापुर ई. स. 1596-1599 और अहमदनगर (ई. स. 1580-1590) की संरक्षक के रूप में काम किया था। चाँद बीबी सबसे ज्याद सम्राट अकबर की मुगल सेना से अहमदनगर की रक्षा के लिए जानी जाती हैं।

चाँद बीबी का प्रारम्भिक जीवन

चाँद बीबी अहमदनगर के हुसैन निजाम शाह की प्रथम बेटी थीं और अहमदनगर के सुल्तान बुरहान-उल-मुल्क की बहन थी। वह अरबी, फ़ारसी, तुर्की, मराठी और कन्नड़ सहित और कई भाषाएँ जानती थी। वह सितार बजाती थीं और फूलों का चित्र बनाना उनका शौक था।

बीजापुर सल्तनत

एक गठबंधन नीति का अनुसरण करते हुए चाँद बीबी की शादी बीजापुर के सुल्तान अली आदिलशाह प्रथम से हुई थी। 1580 में आदिलशाह की मृत्यु के बाद शिया रईसों ने अपने नौ वर्षीय भतीजे इब्राहीम आदिलशाह द्वितीय को शासक घोषित कर दिया। दखन के सेनानायक कमाल खान ने राज्य पर कब्जा कर लिया और संरक्षक बन गया। कमाल खान ने चाँद बीबी का अनादर किया, जिनको ऐसा लगा कि खान की सिंहासन हड़पने की महत्वाकांक्षा है। चाँद बीबी ने अन्य सेनानायक हाजी किश्वर खान की मदद से कमाल खान के खिलाफ हमले की साजिश रची। कमाल खान पकड़े गए, जब वो भाग रहे थे और उन्हें क़िले में मौत की सजा दी गई।

किश्वर खान इब्राहीम के दूसरे संरक्षक बन गए। धरासेओ में अहमदनगर सल्तनत के खिलाफ एक लड़ाई में उनके नेतृत्व में बीजापुर की सेना ने दुश्मन सेना के सब तोपखानों और हाथियों पर कब्जा कर लिया। जीत के बाद किश्वर खान ने अन्य बीजापुरी सेनानायकों को आदेश दिया कि वे कब्जाये गए सभी हाथियों को छोड़ दें। हाथी बेहद महत्त्वपूर्ण थे और अन्य सेनानायकों ने इसे भयंकर अपराध के रूप में ले लिया। चाँद बीबी के साथ उन्होंने बांकापुर के सेनानायक मुस्तफा खान की मदद से किश्वर खान को खत्म करने की साजिश रची। किश्वर खान के जासूसों ने उन्हें साजिश के बारे में बताया। किश्वर खान ने मुस्तफा खान के खिलाफ अपने सैनिकों को भेजा, जो लड़ाई में पकड़े गए और मार दिये गए। किश्वर खान बाकी सेनानायकों के बीच बहुत अलोकप्रिय हो गया था। वह उस समय भागने के लिए मजबूर हो गया, जब हब्शी सेनानायक इखलास खान के नेतृत्व में एक संयुक्त सेना ने बीजापुर पर हमला कर दिया। सेना में तीन हब्शी रईसों, इखलास खान, हामिद खान और दिलावर खान की सेनाएँ शामिल थीं। किश्वर खान ने अहमदनगर में अपनी किस्मत आजमाने की असफल कोशिश की और फिर गोलकुंडा के लिए भाग गया। वह निर्वासन में मुस्तफा खान के एक रिश्तेदार द्वारा मारा गया। इसके बाद चाँद बीबी ने थोड़े समय के लिए एक संरक्षक के रूप में काम किया।

इसके बाद इखलास खान संरक्षक बन गए, लेकिन वह शीघ्र ही चाँद बीबी द्वारा बर्खास्त कर दिए गए। बीजापुर की स्थिति का लाभ उठाते हुए अहमदनगर के निजाम शाही सुल्तान ने गोलकुंडा के कुतुबशाही के साथ मिलकर बीजापुर पर हमला बोल दिया। बीजापुर में उपलब्ध सैनिक संयुक्त हमले का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं थे। हब्शी सेनानायकों को एहसास हुआ कि वे अकेले शहर की रक्षा नहीं कर सकते और उन्होंने चाँद बीबी को अपना इस्तीफा दे दिया। चाँद बीबी द्वारा नियुक्त एक शिया सेनानायक अबू-उल-हसन ने कर्नाटक में मराठा सेना को बूलाया। मराठों ने आक्रमणकारियों की आपूर्ति सेनाओं पर हमला कर दिया और मजबूर होकर अहमदनगर गोलकुंडा की संयुक्त सेनाएँ वापस लौट गयीं। फिर इखलास खान ने बीजापुर पर अधिकार पाने के लिए दिलावर खान पर हमला कर दिया। हालांकि वह हार गये थे और 1582 से 1591 तक के लिए दिलावर खान संरक्षक बन गए। जब बीजापुर राज्य में शांति बहाल हुई, तो चाँद बीबी अहमदनगर लौट आईं।

अहमदनगर सल्तनत

ई. सन 1591 में मुगल सम्राट अकबर ने चारों दखन रियासतों को अपनी सर्वोच्चता को स्वीकार करने के लिए कहा। सभी रियासतों ने अनुपालन को टाल दिया और अकबर का राजदूत 1593 में लौट आया। 1595 में बीजापुर के शासक इब्राहीम शाह अहमदनगर से 40 मील दूर तक एक गंभीर कार्रवाई में मारे गए। उनकी मृत्यु के बाद ज्यादातर उत्कृष्ट लोगों ने महसूस किया कि चाँद बीबी के संरक्षण के तहत उनके शिशु पुत्र बहादुरशाह को राजा घोषित करना चाहिए।

हालांकि दखन मंत्री मियाँ मंजू ने 6 अगस्त, 1594 को शाह ताहिर के बारह वर्षीय बेटे अहमदशाह द्वितीय को राजा घोषित कर दिया। इखलास खान के नेतृत्व में अहमदनगर के हब्शी रईसों ने इस योजना का विरोध किया। रईसों के मध्य बढ़ते असंतोष ने मियाँ मंजू को इस बात के लिए प्रेरित किया कि वे अकबर के बेटे शाह मुराद (जो गुजरात में था) को अहमदनगर में अपनी सेना लाने के लिए आमंत्रित करे। मुराद मालवा आया जहाँ वे अब्दुल रहीम खान-ए-खाना के नेतृत्व वाली मुगल सेना में शामिल हो गए। राजा अली खान मांडु में उनके साथ हो गए और संयुक्त सेना अहमदनगर की ओर बढ़ गई। हालांकि जब मुराद अहमदनगर के लिए जा रहे थे, उस समय कई कुलीन व्यक्तियों ने इखलास खान को छोड़ दिया और मंजूर के साथ शामिल हो गए।


पीछे जाएँ
7:2
8
9
आगे जाएँ


समन्वय छात्र पत्रिका 2012 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संत कबीर की भक्ति भावना में श्री जगन्नाथ मदन मोहन दाश (पारंगत) 1
गजल ज्ञान प्रकाश पाण्डेय (पारंगत) 2:1
विरोधाभास तिलक राज शर्मा (पारंगत) 2:2
हिंदी की बिंदी क्षत्रिय भूपेन्द्र कुमार डी (निष्णात) 2:3
हिंदी की जय हो भबानि शंकर नाएक (प्रवीण) 2:4
स्वामी विवेकानन्द का शैक्षिक चिंतन धनंजय लहामगे (निष्णात) 3
गम ही सच्चा साथी भोसले उद्धव (निष्णात) 4:1
जिंदगी क्या है? तिरम सुनानी (पारंगत) 4:2
"हाय! ये दोस्ती क्या रंग लाती है" ध्रुति सुन्दर साहु (प्रवीण) 4:3
विद्या सबसे बड़ी शोभा अक्षय बल्लभ दाश (पारंगत) 5:1
ओड़िशा का सबसे बड़ा मेला "बालियात्रा" नब किशोर बेहेरा (पारंगत) 5:2
मत आओ मत आओ! श्रीमती सागरिका महाराणा (प्रवीण) 6:1
माँ रंजीत एम. मेश्राम (प्रवीण) 6:2
तेरी कमी धनजंय (निष्णात) 7:1
संस्थान की आरती अजित कुमार पंडा (प्रवीण) 7:2
चाँद बीबी एक पराक्रमी योद्धा मनोज शिंदे (निष्णात) 8
प्रार्थना (सन्तजनों के चरणों में) सुतारी राजेन्द्र रेड्डी (प्रवीण) 10:1
स्मृति मु. मुहिबुल्लाह (निष्णात) 10:2
वृक्ष की मानव से अपील नव किशोर बेहेरा (पारंगत) 11:1
सिर्फ पापा अभय अंजन दे (प्रवीण) 11:2
हमारा संस्थान प्रबीर कुमार पट्टायत (प्रवीण) 12:1
कभी नहीं भूलूँगा मैं हिंदी संस्थान को देबराज पधान (पारंगत) 12:2
चिंता विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 13:1
वजूद विष्णु खडसे (निष्णात) 13:2
तुम मुहम्मद गफूर यु. केरल (प्रवीण) 13:3
अपनी कक्षा पारंगत प्रमोद कुमार यादव (पारंगत) 14
हिंदी ही काम आई है प्रमोद कुमार यादव (पारगंत) 15:1
शर्म खाऊँ तो क्यों? तोफान पधान (पारंगत) 15:2
फतेहपुर सीकरी के दर्शन तोफान पधान (पारंगत) 16
नमस्ते गंगा सीताकांत पट्टनायक (पारंगत) 17
हे ताजमहल ! मिथुन दास (प्रवीण) 19
कौआ और पाँकपाँक चानवेनी किकोन (तृतीय वर्ष) 20:1
नेताजी-नेताजी, आप ये क्या कर रहे हो? भुरिया विनुभाई (निष्णात) 20:2
बेटा हो या बेटी संसारी नायक (पारंगत) 20:3
हाथी से बना हस्ती संसारी नायक (पारंगत) 21:1
बेटी शेख सगीर (प्रवीण) 21:2
कब मैं पराई हो गई? एस. तुलसी (पारंगत) 22
हे ईश्वर इतनी शक्ति दो! सुदाम पटेल (पारंगत) 23
प्रायश्चित (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 24
प्रेम परीक्षा (हिंदी नाटक) विष्णु खडसे (निष्णात) 25
जो भी हो... लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
मुस्कान लिलिश्री भोई (पारंगत) 26
उगादि एस. राजशेखर (निष्णात) 27:1
स्वयं करो पी. शिवशंकर पात्र (पारंगत) 27:2
संघर्ष विरेन्द्र कुमार नाग (पारंगत) 28:1
बदनाम एस. फाल्गुनी देवी (निष्णात) 28:2
भ्रष्टाचार तीर्थ बघार (पारंगत) 28:3
छोड़ दे। अर्चना सिंह (निष्णात) 28:4
अरलाउ न्यानो लोथा (तृतीय वर्ष) 29:1
चूजे भी शाहीनों से लड़ जाते हैं मोहम्मद तिर्जा जहिरूद्दीन (पारंगत) 29:2
परीक्षा भबानि शंकर नाएक 29:3
संस्थान में नुआँखाई का वह दिन कान्हा त्रिपाठी 30
"एक खत यार को" नीतिश कुमार पति 31
नूआँखाई पर्व तीर्थ बघार 32:1
तेरे आँसू शेख हारून 32:2
आतंकवाद जितेन्द्र पधान 32:3
कुछ कर दिखलाते हैं अर्चना सिंह 33:1
कैसा प्यार? बबन सिंह 33:2
मेरा जिला "नर्मदा जिला" वसावा रविन्द्र कुमार शांतिलाल 34
और कर भी क्या सकती हो तुम ! पंचानन मेहेर 36:1
भगवान की प्रतिज्ञा शेख हारून 36:2
"शहरीकरण का मानव पर प्रभाव" प्रमोद कुमार यादव 37
भ्रष्टाचार वृद्धि के कारण एवं समाधान सुश्री रश्मिता पाणिग्रही 38
राजभाषा हिंदी की संवैधानिक स्थिति जवीर सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, (सीनियर स्केल) 39
केंद्रीय हिंदी आगरा 43
साहित्य सभा का गठन 45
शिक्षणाभ्यास कार्यक्रम वर्ष : 2011-2012 45
भारत स्काउट एवं गाइड प्रशिक्षण शिविर 46
विषय- साहित्यिक प्रतियोगिताएँ 50
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 51
विजेताओं की सूची 51
खेलकूद प्रतियोगिता सत्र – 2011-12 53
विभागीय सांस्कृतिक प्रतियोगिताएँ 54
आंतरिक परीक्षा 55
अध्यापक शिक्षा विभाग के संकाय सदस्य 55
अध्यापक शिक्षा विभाग में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं की सूची 55
श्रद्धांजलि 57
केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल की शासी परिषद के सदस्यों की सूची 58
वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता