अनिता भटनागर जैन संदेश

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डॉ. अनिता भटनागर जैन (भा.प्र.से.)

संयुक्त सचिव
Dr. Anita Bhatanagar Jain (I.A.S.)
JOINT SECRETARY

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भारत सरकार

मानव संसाधन विकास
उच्चतर शिक्षा विभाग
शास्त्री भवन, नई दिल्ली – 110115
GOVERNMENT OF INDIA
MINISTER OF HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT
DEPARTMENT OF HIGHER EDUCATION
SHASTRI BHAVAN, NEW DELHI-110115
PHONE : +91 (11) 23384359
FAX : +91 (11) 23382689

दिनांक 23 मार्च, 2011

संदेश

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यह प्रसन्नता की बात है कि संस्थान ने अपनी स्थापना के 50 स्वर्णिम वर्ष पूरे कर लिए हैं। संस्थान के कार्यक्रम हिंदी के प्रचार-प्रसार और विकास से संबंधित हैं। विशेषकर हिंदी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नव लेखकों एवं प्राध्यापकों आदि के हिंदी प्रेम तथा सहयोग से हिंदी के प्रचार-प्रसार को निरंतर बल मिल रहा है। हिंदी न केवल भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है अपितु विदेशी भाषाओं को अपने साथ जोड़कर खुद को निरंतर समृद्ध कर रही है। भारत एवं विश्वभर में हिंदी की सहजता और वैज्ञानिकता सिद्ध है।

सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को आसान बनाने की दिशा में संस्थान द्वारा किये गए कार्य सराहनीय हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम, कोश निर्माण, पुस्तक प्रकाशन योजना जैसे अपने महत्वाकांक्षी कार्यकलापों में संस्थान की अहम भूमिका रही है।
वैश्वीकरण व आधुनिक तकनीक के इस युग में संस्थान अपने पाठ्यक्रमों को आन-लाइन उपलब्ध कराने जा रहा है। यह एक प्रशंसनीय कदम है। संस्थान सभी भारतीय तथा मुख्य अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में भी आन-लाइन हिंदी शिक्षण की ओर अग्रसर होगा। कम्प्यूटर के इस युग में कम्प्यूटर के माध्यम से हिंदी शिक्षण तथा हिंदी माध्यम से कम्प्यूटर शिक्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। संस्थान इन दोनों दिशाओं में कदम बढ़ाते हुए हिंदी को सिर्फ संपर्क भाषा ही नहीं बल्कि एक रोजगारपरक भाषा बनाने में समर्थ होगा। मुझे आशा है कि संस्थान अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बहुआयामी अस्तित्व प्राप्त करेगा।

समारोह की सफलता और स्मारिका के प्रकाशन हेतु हार्दिक बधाई।
(अनिता भटनागर जैन)

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क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. हिंदी वैकल्पिक हो गई है प्रो. रमानाथ सहाय 1
2. परिवर्तन और नए विश्वास....! प्रो. शंभुनाथ 3
3. जिन खोजा तिन पाइयाँ प्रो. सूरजभान सिंह 8
4. भाषा अध्ययन की नई प्रवृत्तियाँ प्रो. सुरेश कुमार 9
5. अनंत संभावनाएं....! प्रो. नित्यानंद पाण्डेय 12
6. आखिर आगरा क्यों? डॉ. न. वी. राजगोपालन 6
7. कम्प्यूटर-युग प्रो. माणिक गोविन्द चतुर्वेदी 19
8. हिंदी की ज्योति प्रो. वी. रा. जगन्नाथन 21
9. सर्वप्रथम पुरस्कार डॉ. बालशौरी रेड्डी 24
10. जापान में संस्थान प्रो. सुरेश ऋतुपर्ण 26
11. नाश्ता मुझे आज भी याद है डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा 29
12. एक वैश्विक उपस्थिति डॉ. हरजेन्द्र चौधरी 32
13. भेंट करायी.... हिंदी ने ए. अरविंदाक्षन 34
14. जहाँ हिंदी अपनी भूमि पर निश्चिंत होकर साँस लेती है... रंजना अरगड़े 38
15. श्रीलंका की पाती...! प्रो. इन्द्रा दसनायके 40
16. स्मृति के गलियारों से डॉ. मोहन लाल सर 44
17. लेखा - जोखा प्रो. अश्वनी कुमार श्रीवास्तव 49
18. बात करने का सलीका डॉ. अर्जुन तिवारी 51
19. जिम्मेदारी बढ़ती चली गई कैलाश चन्द भाटिया 53
20. पूर्वोत्तर भारत के वे दिन डॉ. पुष्पा श्रीवास्तव 55
21. आनंद की अनुभूति प्रो. पीतांबर ठासवाणी 59
22. सफर का सफरनामा डॉ. अरविंद कुलश्रेष्ठ 60
23. ऋण समिति का गठन डॉ. लक्ष्मी नारायण शर्मा 62
24. अब तुम्हारे हवाले शंकर लाल पुरोहित 63
25. नमन! उषा यादव 64
26. इंद्रधनुषी स्मृतियाँ डॉ. रश्मि दीक्षित 65
27. एक मुलाकात ने मेरा भाग्य ही बदल डाला प्रो. ठाकुर दास 67
28. यादों की बारात डॉ. श्रीभगवान शर्मा 69
29. पास-पड़ोस प्रो. राजेश्वर प्रसाद 71
30. आशा का अनुबंध डॉ. बी. रामसंजीवय्या 72
31. 'वसुधैव कुटुम्बकम' डॉ. रामलाल वर्मा 73
32. दूसरा आँगन डॉ. कान्तिभाई सी. परमार 75
33. जब पढ़ने आया प्रो. लक्ष्मन सेनेविरत्न 78
34. पहला शेकहैंड! डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी 80
35. सीखने के दिन! डॉ. जीतेन्द्र वर्मा 82
36. एक छोटा विश्व चक्रधर शतपथी 84
37. कुल 365 दिन डॉ. ऋषि भूषण चौबे 85
38. जब छात्र था विट्ठलनारायण चौधरी 87
39. हिंदी का विश्वरूप अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी 89
40. मेरे कैमरे से! डॉ. सत्यनारायण गोयल 'छविरत्न' 91


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