डॉ. डी. पुरंदेश्वरी संदेश

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डॉ. डी. पुरंदेश्वरी
DR. D. PURANDESWARI
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राज्य मंत्री

मानव संसाधन विकास
भारत सरकार
नई दिल्ली-110115
MINISTER OF STATE
HUMAN RESOURCE DEVELOPMENT,
COMMUNICATIONS AND INFORMATION TECHNOLOGY
GOVERNMENT OF INDIA

NEW DELHI-110115
संदेश

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यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन केंद्रीय हिंदी संस्थान ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर वह अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है तथा एक स्मारिका का प्रकाशन भी कर रहा है।

कोई भी भाषा वैश्विक रूप तब धारण करती है जब उसके सांस्कृतिक, साहित्यिक और सामाजिक विचारों में उसकी प्रोढ़ता नजर आती है। हिंदी भाषा इस मापदंड पर हर प्रकार से खरी उतरती है क्योंकि उसमें अन्य भाषाओं को साथ लेकर चलने और अपने आपको समाहित करने की उदारता भी है और शायद यही कारण है कि अनेक देशों के अंदर हिंदी का प्रसार हो रहा है, जिसके कारण हिंदी "वैसुधैव कुटुंबकम्" की संकल्पना को साकार करती है।

आशा है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों के द्वारा हिंदी के निरंतर विकास हेतु प्रतिबद्ध रहेगा। संस्थान द्वारा स्वर्ण जयंती वर्ष में मनाए जाने वाले विभिन्न आयोजनों तथा स्मारिका के लिए शुभकामनाएँ।

(डी. पुरंदेश्वरी)

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क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. हिंदी वैकल्पिक हो गई है प्रो. रमानाथ सहाय 1
2. परिवर्तन और नए विश्वास....! प्रो. शंभुनाथ 3
3. जिन खोजा तिन पाइयाँ प्रो. सूरजभान सिंह 8
4. भाषा अध्ययन की नई प्रवृत्तियाँ प्रो. सुरेश कुमार 9
5. अनंत संभावनाएं....! प्रो. नित्यानंद पाण्डेय 12
6. आखिर आगरा क्यों? डॉ. न. वी. राजगोपालन 6
7. कम्प्यूटर-युग प्रो. माणिक गोविन्द चतुर्वेदी 19
8. हिंदी की ज्योति प्रो. वी. रा. जगन्नाथन 21
9. सर्वप्रथम पुरस्कार डॉ. बालशौरी रेड्डी 24
10. जापान में संस्थान प्रो. सुरेश ऋतुपर्ण 26
11. नाश्ता मुझे आज भी याद है डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा 29
12. एक वैश्विक उपस्थिति डॉ. हरजेन्द्र चौधरी 32
13. भेंट करायी.... हिंदी ने ए. अरविंदाक्षन 34
14. जहाँ हिंदी अपनी भूमि पर निश्चिंत होकर साँस लेती है... रंजना अरगड़े 38
15. श्रीलंका की पाती...! प्रो. इन्द्रा दसनायके 40
16. स्मृति के गलियारों से डॉ. मोहन लाल सर 44
17. लेखा - जोखा प्रो. अश्वनी कुमार श्रीवास्तव 49
18. बात करने का सलीका डॉ. अर्जुन तिवारी 51
19. जिम्मेदारी बढ़ती चली गई कैलाश चन्द भाटिया 53
20. पूर्वोत्तर भारत के वे दिन डॉ. पुष्पा श्रीवास्तव 55
21. आनंद की अनुभूति प्रो. पीतांबर ठासवाणी 59
22. सफर का सफरनामा डॉ. अरविंद कुलश्रेष्ठ 60
23. ऋण समिति का गठन डॉ. लक्ष्मी नारायण शर्मा 62
24. अब तुम्हारे हवाले शंकर लाल पुरोहित 63
25. नमन! उषा यादव 64
26. इंद्रधनुषी स्मृतियाँ डॉ. रश्मि दीक्षित 65
27. एक मुलाकात ने मेरा भाग्य ही बदल डाला प्रो. ठाकुर दास 67
28. यादों की बारात डॉ. श्रीभगवान शर्मा 69
29. पास-पड़ोस प्रो. राजेश्वर प्रसाद 71
30. आशा का अनुबंध डॉ. बी. रामसंजीवय्या 72
31. 'वसुधैव कुटुम्बकम' डॉ. रामलाल वर्मा 73
32. दूसरा आँगन डॉ. कान्तिभाई सी. परमार 75
33. जब पढ़ने आया प्रो. लक्ष्मन सेनेविरत्न 78
34. पहला शेकहैंड! डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी 80
35. सीखने के दिन! डॉ. जीतेन्द्र वर्मा 82
36. एक छोटा विश्व चक्रधर शतपथी 84
37. कुल 365 दिन डॉ. ऋषि भूषण चौबे 85
38. जब छात्र था विट्ठलनारायण चौधरी 87
39. हिंदी का विश्वरूप अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी 89
40. मेरे कैमरे से! डॉ. सत्यनारायण गोयल 'छविरत्न' 91


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