अशोक चक्रधर संदेश

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प्रो. अशोक चक्रधर
(उपाध्यक्ष)
Prof. Ashok Chakradhar
(Vice Chairman)
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जे-116, सरिता विहार, नई दिल्ली-110076

j-116, Sarita Vihar, New Delhi-110076
फोन : 26949494/26941616, फ़ॅक्स : 41401636
मो. : 9811812361
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केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, आगरा

(मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार)
Kendriya Hindi Shikshan Mandal, Agra
(Min. of Human Resource Dev, Govt. of India)


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केंद्रीय हिंदी संस्थान ने अपनी पचास वर्ष की विकास यात्रा में महत्त्वपूर्ण पड़ावों को पार किया है। पच्चीस वर्ष पहले जब रजत जयंती समारोह हुआ था, उस समय भी संस्थान भाषा सर्वेक्षण, शब्द-संपदा-संकलन, बोलियों के अनुसंधान, शिक्षण प्रविधियों के निर्माण, पाठ्य-सामग्री की निर्मिति आदि अनेक दिशाओं में, सक्रिय रहते हुए, उस समय के आधुनिकतम संसाधनों का प्रयोग कर रहा था। हमारे पास उस समय भी भाषा प्रयोगशालाएँ थीं। समय बड़ी तेजी से बदल रहा है। संस्थान अब नई प्रौद्योगिकी का प्रयोग करते हुए हिंदी के प्रचार-प्रसार और शिक्षण को एक व्यापक स्वरूप देना चाहता है।
मुझे प्रसन्नता है कि इस अवसर पर स्मारिका का प्रकाशन किया जा रहा है। यह स्मारिका अधिकतम लोगों तक केंद्रीय हिंदी संस्थान के कार्यों एवं नए संकल्पों से परिचित कराएगी, ऐसी मुझे आशा है। माननीय श्री कपिल सिब्बल एक दूरदर्शी विचारक और श्रेष्ठ कवि हैं। वे संस्थान के विकास के प्रति सदैव सकारात्मक सोच रखते हुए संवेदनशीलता से मार्गदर्शन देते हैं। मुझे उम्मीद है कि पूरा स्वर्ण जयंती वर्ष हमारे अभियानों को एक सार्थकता प्रदान करेगा। अनंत शुभकामनाएं।



(अशोक चक्रधर)

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क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
1. हिंदी वैकल्पिक हो गई है प्रो. रमानाथ सहाय 1
2. परिवर्तन और नए विश्वास....! प्रो. शंभुनाथ 3
3. जिन खोजा तिन पाइयाँ प्रो. सूरजभान सिंह 8
4. भाषा अध्ययन की नई प्रवृत्तियाँ प्रो. सुरेश कुमार 9
5. अनंत संभावनाएं....! प्रो. नित्यानंद पाण्डेय 12
6. आखिर आगरा क्यों? डॉ. न. वी. राजगोपालन 6
7. कम्प्यूटर-युग प्रो. माणिक गोविन्द चतुर्वेदी 19
8. हिंदी की ज्योति प्रो. वी. रा. जगन्नाथन 21
9. सर्वप्रथम पुरस्कार डॉ. बालशौरी रेड्डी 24
10. जापान में संस्थान प्रो. सुरेश ऋतुपर्ण 26
11. नाश्ता मुझे आज भी याद है डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा 29
12. एक वैश्विक उपस्थिति डॉ. हरजेन्द्र चौधरी 32
13. भेंट करायी.... हिंदी ने ए. अरविंदाक्षन 34
14. जहाँ हिंदी अपनी भूमि पर निश्चिंत होकर साँस लेती है... रंजना अरगड़े 38
15. श्रीलंका की पाती...! प्रो. इन्द्रा दसनायके 40
16. स्मृति के गलियारों से डॉ. मोहन लाल सर 44
17. लेखा - जोखा प्रो. अश्वनी कुमार श्रीवास्तव 49
18. बात करने का सलीका डॉ. अर्जुन तिवारी 51
19. जिम्मेदारी बढ़ती चली गई कैलाश चन्द भाटिया 53
20. पूर्वोत्तर भारत के वे दिन डॉ. पुष्पा श्रीवास्तव 55
21. आनंद की अनुभूति प्रो. पीतांबर ठासवाणी 59
22. सफर का सफरनामा डॉ. अरविंद कुलश्रेष्ठ 60
23. ऋण समिति का गठन डॉ. लक्ष्मी नारायण शर्मा 62
24. अब तुम्हारे हवाले शंकर लाल पुरोहित 63
25. नमन! उषा यादव 64
26. इंद्रधनुषी स्मृतियाँ डॉ. रश्मि दीक्षित 65
27. एक मुलाकात ने मेरा भाग्य ही बदल डाला प्रो. ठाकुर दास 67
28. यादों की बारात डॉ. श्रीभगवान शर्मा 69
29. पास-पड़ोस प्रो. राजेश्वर प्रसाद 71
30. आशा का अनुबंध डॉ. बी. रामसंजीवय्या 72
31. 'वसुधैव कुटुम्बकम' डॉ. रामलाल वर्मा 73
32. दूसरा आँगन डॉ. कान्तिभाई सी. परमार 75
33. जब पढ़ने आया प्रो. लक्ष्मन सेनेविरत्न 78
34. पहला शेकहैंड! डॉ. बालेन्दु शेखर तिवारी 80
35. सीखने के दिन! डॉ. जीतेन्द्र वर्मा 82
36. एक छोटा विश्व चक्रधर शतपथी 84
37. कुल 365 दिन डॉ. ऋषि भूषण चौबे 85
38. जब छात्र था विट्ठलनारायण चौधरी 87
39. हिंदी का विश्वरूप अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी 89
40. मेरे कैमरे से! डॉ. सत्यनारायण गोयल 'छविरत्न' 91


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