स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-154

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सहायक पुस्तक सूची –
  1. डॉ. नेमिचन्द्र जैन–मोहन राकेश के सम्पूर्ण नाटक की भूमिका – पृष्ठ संख्या 5
  2. मोहन राकेश – बक़लम ख़ुद – सन् 1947 – पृष्ठ संख्या 112
  3. सं. शर्मा डॉ. सत्येन्द्रनाथ – भूमिका. ज्योतिप्रसाद रचनावली – पृष्ठ संख्या 3
  4. नेमिचन्द्र जैन – दिनमान – 10 दिसम्बर. 1972
  5. डॉ. सुरेश अवस्थी – धर्मयुग 17 दिसम्बर 1972 – पृष्ठ संख्या 23

संपर्क सूत्र:
बंगाईगाँव, असम, मो. 09435312702

असमिया उपन्यासकार बिरिंच कुमार बरुआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ

श्री आब्दुल मतिन
बिरिंच कुमार बरुआ ने प्रेमचंद की तरह दोनों नारी प्रधान उपन्यासों में नारी समस्याओं को अग्राधिकार दिया है।

बिरिंच कुमार बरुवा द्वारा रचित दोनों उपन्यास नायिका प्रधान हैं। ‘जीवनर बाटत’ उपन्यास में तगर और ‘सेउजी पातर काहिनीं’ में सोनिया मुख्य नारी चरित्र हैं। दूसरी ओर प्रेमचन्द द्वारा रचित दस उपन्यासों में नारी ही केन्द्रबिन्दु है। फिर भी प्रेमचन्द के ‘सेवासदन’, ‘प्रतिज्ञा’, ‘निर्मला’ तथा ‘ग़बन’ आदि चार उपन्यास नायिका प्रधान हैं। बिरिंच कुमार बरुआ ने प्रेमचन्द की तरह दोनों नारी प्रधान उपन्यासों में नारी समस्याओं को अग्राधिकार दिया है। नारी स्वातंत्र्य, नारी के सामाजिक राजनैतिक धार्मिक अधिकार आदि के प्रति चेतना की दृष्टि से बरुआ ने उपन्यासों की कथा का निर्माण किया है। नारी विमर्श दोनों उपन्यासों का प्रधान विषय है।

वीणा बरुआ के ‘जीवनर बाटत’ की तग्गारर

‘जीवनर बाटत’ एक अत्यन्त प्रख्यात नायिका प्रधान उपन्यास है। वर्तमान गोलाघाट महकुमा के अन्तर्गत मरंगी आहोम युग का एक बड़ा शहर है। तगर इसी मरंगी इलाके के एक सम्भ्रांत किसान बापुराम बरा की कन्या है। तगर फूल की तरह ही निष्पाप, निष्कलुष तथा रूप–गुणों में अति सुन्दर है। वह एक आदर्श नारी है। अन्यान्य दस नारी पात्र बाइदेउ मालती, नुमली, फुलेश्वरी आदि की तरह चंचल नहीं है। बुनाई–कटाई में भी पारंगत है। लड़कियों को अंग्रेज़ी पढ़ाने के विरोधी समाज के कारण तगर का जीवन स्तब्ध रह गया था। उसकी भी आशा थी कि कमलाकान्त के साथ उसका विवाह होगा पर सुप्रभा के साथ कमलाकान्त का विवाह हो जाता है, फिर अपमान के डर से ड्राइविंग मास्टर धरणी के साथ तगर का विवाह तय हो जाता है। बेटी, बहू, मातृ और अन्त तक विधवा की भूमिका निभानेवाली तगर पाश्चात्य सभ्यता का शिकार एक अबला नारी चरित्र है।

रास्ना बरुआ के ‘सेउजीया पातर काहिनी’ की सोनिया

रास्ना बरुवा उपनाम लेकर बिरिंच कुमार बरुवा ने इस उपन्यास की रचना की है। सोनिया केवल बिरिंच कुमार बरुवा की ही नहीं समग्र असमिया उपन्यास जगत की एक व्यतिक्रमी नारी चरित्र है।

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समन्वय पूर्वोत्तर अक्टूबर-दिसम्बर 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संगीत-साहित्य के महाप्राण हज़ारिका का महाप्रयाण : विशेष आलेख
1. संस्कृति के महानायक भूपेन हज़ारिका का महाप्रस्थान डॉ. नवकांत शर्मा 1
2. भूपेन हज़ारिका का जीवन दर्शन और व्यक्तित्व डॉ. दिलीप मेधि 4
3. आम आदमी की पीड़ा ही भूपेन हज़ारिका के गीत थे श्री रविशंकर रवि 17
4. सुधाकंठ डॉ. भूपेन हज़ारिका : असमिया जाति के अलिखित दस्तावेज डॉ. प्रवीन कोच 19
5. असमिया संगीत और डॉ. भूपेन हज़ारिका श्री गौतम पातर 22
6. डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में समाज संहति और संप्रीति का प्रस्फुटन श्री अखिल चंद्र कलिता 25
7. असम के सांस्कृतिक दूत भूपेन हज़ारिका डॉ. माधवेन्द्र 29
8. असम रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका की कुछ अनमोल रचनाएँ भाषांतरण सुश्री नन्दिता दत्त 33
9. डॉ. भूपेन हज़ारिका का निधन... कलाक्षेत्र की एक अपूर्णीय क्षति श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 37
लोकमानस
लोककथा संकलन एवं भाषांतरण
1. राङगोला (कॉकबरक भाषा से) सुश्री रूपाली देबबर्मा 38
2. तीन भाई और एक बहन (पनार भाषा से) डॉ. संतोष कुमार 39
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4. कोरदुमबेला (मिजो भाषा से) श्री एच. वानलललोमा 42
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लोकगीत संकलन एवं भाषांतरण
1. कोम जनजाति के पारंपरिक गीत (मणिपुर से) सुश्री टी. जेलेना कोम 44
2. का तिङआब (कौआ) (खासी भाषा से) श्रीमती जीन एस. ड्खार 47
कथा-मंजरी
भाषांतरित
1. प्रगति–गान (असमिया भाषा से) मूल श्री उमेश वैश्य 49
भाषांतरण श्रीमती काकोली गोगोई 49
2. श्रीमती इंदिरा : एक शोक गीत (मिजो भाषा से) मूल स्व. (श्रीमती) ललसाङजुआली साइलो 50
भाषांतरण श्री एच. वानलललोमा 50
दो कविताएँ
1. The Heart मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
हृदय भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
2. The Truth of Gender मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
लिंग की सच्चाई भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
मौलिक
1. खासी राजा शहीद उतिरोत सिंह डॉ. (श्रीमती) फिल्मिका मारबनियाङ 52
2. त्रिपुरेश्वरी का त्रिपुरा सुश्री खुमतिया देबबर्मा 53
3. सूख रहे दुनिया के प्राण श्री लालसा लाल ‘तरंग’ 54
4. अवश्य साथ देना डॉ. सीताराम अधिकारी 55
5. फूल सुश्री उमा देवी 56
6. मंच सुश्री विनीता अकोइजम 56
कथा-मंजरी भाषांतरित
1. श्रृंखल मूल डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी 57
भाषांतरण सुश्री राजश्री देवी 57
मौलिक
1. गुरु–दक्षिणा श्री संजीब जायसवाल ‘संजय’ 60
2. नई सुबह श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 66
3. तीन लघु प्रेरक कथाएँ डॉ. अकेलाभाइ 69
ललितनिबंध-मंजरी
1. बादलों को उतरने के लिए थोड़ी जगह दें' डॉ. अरूणेश ‘नीरन’ 72
2. पागल यौवन का विप्लवकारी महानर्तव डॉ. भरत प्रसाद 74
आलेख
संस्कृति और समाज
1. कारबि समाज का प्राचीन शैक्षिक डॉ. (श्रीमती) जूरि देवी 79
अनुष्ठान : जिरकेदाम (जिरछङ)
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3. पूर्वोत्तर भारत की भाषा और संस्कृति पर अनुसंधान की असीम संभावनाएँ डॉ. संतोष कुमार 95
भक्ति-दर्शन
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1. हिंदी के प्रति दृष्टि – गांधी की डॉ. दिलीप मेधि 109
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5. हिंदी परसर्गीय पदबंध श्री चंदन सिंह 131
6. नागा भूमि एवं हिंदी प्रचार–प्रसार की स्थिति डॉ. वी.पी. फिलिप जुविच 135
7. नोक्ते जनजाति की मौखिक लोक साहित्य की लेखन समस्या देवनागरी लिपि एक समाधान डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय 140
तुलनात्मक अंतरण
1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
3. प्रेमचंद एवं शरतचंद्र के कथा–साहित्य में स्त्री पात्र डॉ. दिनेश कुमार चौबे 157
समालोचन
1. हिंदी यात्रा साहित्य को नागार्जुन का प्रदेय डॉ. श्यामशंकर सिंह 162
2. स्वातंव्योत्तर हिंदी कविता में बदलती प्रणयानुभूति डॉ. (श्रीमती) अनीता पंडा 169
3. जातीय स्वाभिमान : दलित कहानियों के विशेष संदर्भ में सुश्री उमा देवी 175
4. जनजातीय हिंदी उपन्यास : परिचयात्मक विवेचन सुश्री खुमतिया देबबर्मा 179
भाषा-शिक्षण
1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
लोक-जीवन
1. डाक की उक्तियाँ और असमिया लोकजीवन में उसका प्रभाव सुश्री नंदिता दत्त 192
2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
इतिहास
1. अरुणाचल प्रदेश का इतिहास लेखन डॉ. राजेश वर्मा 201
2. मदन-कामदेव मंदिर : असम का खजुराहो श्रीमति काकोली गोगोई 204
व्यक्तित्व
1. स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना कनकलता बरूआ श्री अखिल चंद्र कलिता 206
2. महाराज कुमारी विम्बावती मंजरी : मणिपुरी मीरा प्रो. जगमल सिंह 208
लघु यात्रा-संस्मरण
1. एक नदी द्वीप में विकसित विशाल संस्कृति श्री अतुलेश्वर 212
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1. लेखक लिखे नहीं पढ़े भी साक्षात्कारकर्त्री : एन. कुंजमोहन सुश्री धनपति सुखाम 214
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1. अज्ञेय के रचनाकर्म का एक अनछुआ पहलू समीक्षक “अज्ञेय और पूर्वोत्तर भारत” डॉ. जयसिंह ‘नीरद’ 218


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