स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-157

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दोनों उपन्यासकार के उपन्यासों में विधवा जीवन की समस्या में एक समानता दिखाई पड़ती है। भारतीय समाज में विधवाओं को हर हालत में पुरुष की कामना का शिकार होना पड़ा है और इसी कारण विधवाओं का जीवन अन्धकारमय बन जाता है। प्रेमचन्द ने अपने उपन्यासों में विधवा विवाह के समर्थन में अपना मत स्पष्ट कर दिया है। परन्तु बिरिंचि कुमार बरूवा ने इस प्रसंग पर अपना मत कहीं भी प्रकट नहीं किया है। तत्कालीन समय में नारी शिक्षा के प्रति अवहेलित दृष्टिकोण का सुन्दर चित्रण दोनों उपन्यासकार ने स्पष्ट कर दिया है। सबसे चमत्कारी विषय तो यह है कि दोनों उपन्यासकार पुरूष होकर भी नारी विमर्श को इतने स्पष्ट रूपसे चित्रित किया है कि इनकी रचनाएँ कालजयी कीर्ति बन गई हैं। दोनों उपन्यासकार की रचनाओं को थामस हार्डी और रिचर्डसन की रचनाओं के साथ एक ही पंक्ति में रखा जा सकता है।

संदर्भ ग्रंथ
  1. हिंदी का गद्य साहित्य – डॉ. रामचन्द्र तिवारी
  2. हिंदी उपन्यास – शिवनारायण श्रीवास्तव
  3. समस्यामूलक उपन्यासकार – डॉ. महेश भटनागर
  4. प्रेमचन्द और उनका युग – डॉ. रामविलास शर्मा
  5. साहित्यर सत्य – डॉ. हीरेण गोंहाइ
  6. असमीया उपन्यास की भूमिका – सत्येन्द्रनाथ शर्मा
  7. हिस्ट्री ऑफ़ असमीज़ लिटरेचर – बिरिंचि कुमार बरूवा।

संपर्क सूत्र:
प्रवक्ता, खारूपेतिया कॉलेज
दरंग असम, मो. 09435312702

प्रेमचंद एवं शरतचंद के कथा साहित्य में स्त्री पात्र

डॉ. दिनेश कुमार चौबे
प्रेमचंद युगीन नवीन धार्मिक आन्दोलनों से प्रभावित होकर शरत चन्द ने प्राचीन धार्मिक मान्यताओं पर बल दिया है वहीं प्रेमचंद सुधारवादी दृष्टि स्वीकार करते हैं।

प्रकृति और पुरुष से सृष्टि का विकास होता है। स्त्री–पुरूष एक दूसरे के बिना अपूर्ण हैं। समाज के विकास के लिए दोनों की पूर्णता आवश्यक है। मानवता की दृष्टि से ‘माता’ का पद महान है क्योंकि वह पुरुष की जननी के साथ उसका पालक भी है। प्रत्येक जाति, संस्कृति, समाज में स्त्री का स्थान महत्त्वपूर्ण है। वैदिक काल से उपनिषद काल तक स्त्री का स्थान सर्वोच्च बना रहा। उसे केवल गृह–सेविका ही नहीं साम्राज्ञी के रूप में स्वीकार किया गया –

सम्राज्ञो श्वसुरे भव सम्राज्ञी श्वत्रंवा भवा।
ननान्दति सम्राजी भव सम्राजी अथिदेवृषु।[1]

रामायण काल में वह पति के अधीन तथा महाभारत काल में इसके दोनों रूपों अत्यन्त गौरव, सम्मान, योग्य और दूसरी और इसे पाप एवं समस्त दोषों का मूल बताया गया।

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पाठ–टिप्पणी

  1. ऋग्वेद – 10–85–46

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क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
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1. संस्कृति के महानायक भूपेन हज़ारिका का महाप्रस्थान डॉ. नवकांत शर्मा 1
2. भूपेन हज़ारिका का जीवन दर्शन और व्यक्तित्व डॉ. दिलीप मेधि 4
3. आम आदमी की पीड़ा ही भूपेन हज़ारिका के गीत थे श्री रविशंकर रवि 17
4. सुधाकंठ डॉ. भूपेन हज़ारिका : असमिया जाति के अलिखित दस्तावेज डॉ. प्रवीन कोच 19
5. असमिया संगीत और डॉ. भूपेन हज़ारिका श्री गौतम पातर 22
6. डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में समाज संहति और संप्रीति का प्रस्फुटन श्री अखिल चंद्र कलिता 25
7. असम के सांस्कृतिक दूत भूपेन हज़ारिका डॉ. माधवेन्द्र 29
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लोककथा संकलन एवं भाषांतरण
1. राङगोला (कॉकबरक भाषा से) सुश्री रूपाली देबबर्मा 38
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लोकगीत संकलन एवं भाषांतरण
1. कोम जनजाति के पारंपरिक गीत (मणिपुर से) सुश्री टी. जेलेना कोम 44
2. का तिङआब (कौआ) (खासी भाषा से) श्रीमती जीन एस. ड्खार 47
कथा-मंजरी
भाषांतरित
1. प्रगति–गान (असमिया भाषा से) मूल श्री उमेश वैश्य 49
भाषांतरण श्रीमती काकोली गोगोई 49
2. श्रीमती इंदिरा : एक शोक गीत (मिजो भाषा से) मूल स्व. (श्रीमती) ललसाङजुआली साइलो 50
भाषांतरण श्री एच. वानलललोमा 50
दो कविताएँ
1. The Heart मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
हृदय भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
2. The Truth of Gender मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
लिंग की सच्चाई भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
मौलिक
1. खासी राजा शहीद उतिरोत सिंह डॉ. (श्रीमती) फिल्मिका मारबनियाङ 52
2. त्रिपुरेश्वरी का त्रिपुरा सुश्री खुमतिया देबबर्मा 53
3. सूख रहे दुनिया के प्राण श्री लालसा लाल ‘तरंग’ 54
4. अवश्य साथ देना डॉ. सीताराम अधिकारी 55
5. फूल सुश्री उमा देवी 56
6. मंच सुश्री विनीता अकोइजम 56
कथा-मंजरी भाषांतरित
1. श्रृंखल मूल डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी 57
भाषांतरण सुश्री राजश्री देवी 57
मौलिक
1. गुरु–दक्षिणा श्री संजीब जायसवाल ‘संजय’ 60
2. नई सुबह श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 66
3. तीन लघु प्रेरक कथाएँ डॉ. अकेलाभाइ 69
ललितनिबंध-मंजरी
1. बादलों को उतरने के लिए थोड़ी जगह दें' डॉ. अरूणेश ‘नीरन’ 72
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संस्कृति और समाज
1. कारबि समाज का प्राचीन शैक्षिक डॉ. (श्रीमती) जूरि देवी 79
अनुष्ठान : जिरकेदाम (जिरछङ)
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7. नोक्ते जनजाति की मौखिक लोक साहित्य की लेखन समस्या देवनागरी लिपि एक समाधान डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय 140
तुलनात्मक अंतरण
1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
3. प्रेमचंद एवं शरतचंद्र के कथा–साहित्य में स्त्री पात्र डॉ. दिनेश कुमार चौबे 157
समालोचन
1. हिंदी यात्रा साहित्य को नागार्जुन का प्रदेय डॉ. श्यामशंकर सिंह 162
2. स्वातंव्योत्तर हिंदी कविता में बदलती प्रणयानुभूति डॉ. (श्रीमती) अनीता पंडा 169
3. जातीय स्वाभिमान : दलित कहानियों के विशेष संदर्भ में सुश्री उमा देवी 175
4. जनजातीय हिंदी उपन्यास : परिचयात्मक विवेचन सुश्री खुमतिया देबबर्मा 179
भाषा-शिक्षण
1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
लोक-जीवन
1. डाक की उक्तियाँ और असमिया लोकजीवन में उसका प्रभाव सुश्री नंदिता दत्त 192
2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
इतिहास
1. अरुणाचल प्रदेश का इतिहास लेखन डॉ. राजेश वर्मा 201
2. मदन-कामदेव मंदिर : असम का खजुराहो श्रीमति काकोली गोगोई 204
व्यक्तित्व
1. स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना कनकलता बरूआ श्री अखिल चंद्र कलिता 206
2. महाराज कुमारी विम्बावती मंजरी : मणिपुरी मीरा प्रो. जगमल सिंह 208
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1. एक नदी द्वीप में विकसित विशाल संस्कृति श्री अतुलेश्वर 212
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1. लेखक लिखे नहीं पढ़े भी साक्षात्कारकर्त्री : एन. कुंजमोहन सुश्री धनपति सुखाम 214
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