स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-185

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4. संजीव : जंगल जहाँ शुरू होता है, राधाकृष्ण प्रकाशन, नई दिल्ली
5. वही पृ. स. 17
6. तेजिन्दर : काला पादरी, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली, पृ. स. 21
7. श्री प्रकाश मिश्र : जहाँ बास फूलते हैं, पाइर्व प्रकाशन, अहमदाबाद, पृ. स. 74
8. मैत्रेयी पुष्पा : अल्मा कबूतरी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, पृ. स. 37
9. भगवान दास मोरवाल : रेत, राजकमल प्रकासन, नई दिल्ली, पृ. स. 44
10. उमेश शास्त्री : हिंदी उपन्यास का उद्भव और विकास, देवनागर प्रकाशन
11. आदिवासी साहित्य यात्रा : रमणिका गुप्ता, राधाकृष्ण प्रकाशन, दिल्ली।
12. आधुनिकता और हिंदी उपन्यास : इन्द्रनाथ, राजकमल प्रकाशन, दिल्ली।

संपर्क सूत्र -
शोधार्थी, हिंदी विभाग,
पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय,
शिलांग – 793022 (मेघालय), मो. 08014108504


भाषा - शिक्षण

मिजोउरम और हिंदी शिक्षण

डॉ. (श्रीमती) लुइस हाउनहार
हिंदी शिक्षा के अथक प्रयास के परिणाम स्वरूप मिजोउ जन–जाति के मन में हिंदी के प्रति जो प्रेम उत्पन्न हुआ है वह काबिले तारीफ है। अब तो वे हिंदी फिल्म, धारावाहिक तथा हिंदी गीत तल्लीनता के साथ देखते, गाते और पसन्द करते हैं।

मिजोउरम भारत के उत्तर–पूर्वी क्षेत्र में बसा एक बहुत ही रमणीय प्रदेश है। इसका क्षेत्रफल लगभग 21 हजार वर्ग कि.मी. है। इसकी जनसंख्या लगभग दस लाख है। मिजोउरम की सुन्दरता देखने लायक है। इसमें कई सुन्दर–सुन्दर पहाड़, नदियाँ, पेड़–पौधे, फल–फूल तथा पशु–पक्षी अपनी सुंदरता दर्शाते हैं। यहाँ न अधिक गर्मी पड़ती है और न अधिक सर्दी। मिजोउरम की राजधानी आइजोल है। यहाँ रहने वालों को मिजोउ कहा जाता हैं। अंग्रेजों के आने के बाद से वे सभी इसाई धर्म को मानते हैं। यहाँ के अधिकांश लोग पढ़ना-लिखना जानते हैं। इस समय पूरे भारत में मिजोउरम साक्षरता के आधार पर तृतीय स्थान रखता है। मिजोउरम की राजभाषा मिजोउ और अंग्रेजी है।

मिजोउरम को हिंदीतर भाषा–भाषी प्रदेश कहा जाता है। इसके कई कारण हैं, एक तो इसकी भौगोलिक स्थिति है, जो अन्य प्रदेशों से लगभग अलग है। मिजोउरम प्रदेश का यह ऐतिहासिक सत्य है कि सन 1966 में जब केन्द्र सरकार ने मिजोउरम में विद्रोह रोकने के लिए सेना भेजी तो उस कार्यवाही में कई घर, गाँव जलकर राख हो गए, कई बच्चे अनाथ हुए और बहुत से लोग मारे गए। पहले से ही मिजोउ जन–जातियों की मानसिकता अलगाववादी विचारधारा से प्रेरित थी, वे अपने को भारतीय कहलाने से इंकार करते थे। इस कार्रवाई के कारण मिजोउ वासी भारत सरकार से और अधिक खिन्न रहे।

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समन्वय पूर्वोत्तर अक्टूबर-दिसम्बर 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संगीत-साहित्य के महाप्राण हज़ारिका का महाप्रयाण : विशेष आलेख
1. संस्कृति के महानायक भूपेन हज़ारिका का महाप्रस्थान डॉ. नवकांत शर्मा 1
2. भूपेन हज़ारिका का जीवन दर्शन और व्यक्तित्व डॉ. दिलीप मेधि 4
3. आम आदमी की पीड़ा ही भूपेन हज़ारिका के गीत थे श्री रविशंकर रवि 17
4. सुधाकंठ डॉ. भूपेन हज़ारिका : असमिया जाति के अलिखित दस्तावेज डॉ. प्रवीन कोच 19
5. असमिया संगीत और डॉ. भूपेन हज़ारिका श्री गौतम पातर 22
6. डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में समाज संहति और संप्रीति का प्रस्फुटन श्री अखिल चंद्र कलिता 25
7. असम के सांस्कृतिक दूत भूपेन हज़ारिका डॉ. माधवेन्द्र 29
8. असम रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका की कुछ अनमोल रचनाएँ भाषांतरण सुश्री नन्दिता दत्त 33
9. डॉ. भूपेन हज़ारिका का निधन... कलाक्षेत्र की एक अपूर्णीय क्षति श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 37
लोकमानस
लोककथा संकलन एवं भाषांतरण
1. राङगोला (कॉकबरक भाषा से) सुश्री रूपाली देबबर्मा 38
2. तीन भाई और एक बहन (पनार भाषा से) डॉ. संतोष कुमार 39
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लोकगीत संकलन एवं भाषांतरण
1. कोम जनजाति के पारंपरिक गीत (मणिपुर से) सुश्री टी. जेलेना कोम 44
2. का तिङआब (कौआ) (खासी भाषा से) श्रीमती जीन एस. ड्खार 47
कथा-मंजरी
भाषांतरित
1. प्रगति–गान (असमिया भाषा से) मूल श्री उमेश वैश्य 49
भाषांतरण श्रीमती काकोली गोगोई 49
2. श्रीमती इंदिरा : एक शोक गीत (मिजो भाषा से) मूल स्व. (श्रीमती) ललसाङजुआली साइलो 50
भाषांतरण श्री एच. वानलललोमा 50
दो कविताएँ
1. The Heart मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
हृदय भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
2. The Truth of Gender मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
लिंग की सच्चाई भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
मौलिक
1. खासी राजा शहीद उतिरोत सिंह डॉ. (श्रीमती) फिल्मिका मारबनियाङ 52
2. त्रिपुरेश्वरी का त्रिपुरा सुश्री खुमतिया देबबर्मा 53
3. सूख रहे दुनिया के प्राण श्री लालसा लाल ‘तरंग’ 54
4. अवश्य साथ देना डॉ. सीताराम अधिकारी 55
5. फूल सुश्री उमा देवी 56
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कथा-मंजरी भाषांतरित
1. श्रृंखल मूल डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी 57
भाषांतरण सुश्री राजश्री देवी 57
मौलिक
1. गुरु–दक्षिणा श्री संजीब जायसवाल ‘संजय’ 60
2. नई सुबह श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 66
3. तीन लघु प्रेरक कथाएँ डॉ. अकेलाभाइ 69
ललितनिबंध-मंजरी
1. बादलों को उतरने के लिए थोड़ी जगह दें' डॉ. अरूणेश ‘नीरन’ 72
2. पागल यौवन का विप्लवकारी महानर्तव डॉ. भरत प्रसाद 74
आलेख
संस्कृति और समाज
1. कारबि समाज का प्राचीन शैक्षिक डॉ. (श्रीमती) जूरि देवी 79
अनुष्ठान : जिरकेदाम (जिरछङ)
1. मणिपुरी संस्कृति की आधार भूमि मणिपुरी रास : प्रो. एच. सुवदनी देवी 86
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3. पूर्वोत्तर भारत की भाषा और संस्कृति पर अनुसंधान की असीम संभावनाएँ डॉ. संतोष कुमार 95
भक्ति-दर्शन
1. हिंदी एवं असमिया भक्ति काव्य समरूपता का सबल पक्ष : राष्ट्र के भावात्मक डॉ. राधेश्याम तिवारी 101
भाषा-चिंतन
1. हिंदी के प्रति दृष्टि – गांधी की डॉ. दिलीप मेधि 109
2. हिंदी के विकास में मानस का योगदान डॉ. राजेन्द्र परदेसी 120
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4. पूर्वोत्तर भारत में हिंदी : विकास की संभावनाओं का मूल्याँकन सुश्री एल. डिम्पल देवी 127
5. हिंदी परसर्गीय पदबंध श्री चंदन सिंह 131
6. नागा भूमि एवं हिंदी प्रचार–प्रसार की स्थिति डॉ. वी.पी. फिलिप जुविच 135
7. नोक्ते जनजाति की मौखिक लोक साहित्य की लेखन समस्या देवनागरी लिपि एक समाधान डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय 140
तुलनात्मक अंतरण
1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
3. प्रेमचंद एवं शरतचंद्र के कथा–साहित्य में स्त्री पात्र डॉ. दिनेश कुमार चौबे 157
समालोचन
1. हिंदी यात्रा साहित्य को नागार्जुन का प्रदेय डॉ. श्यामशंकर सिंह 162
2. स्वातंव्योत्तर हिंदी कविता में बदलती प्रणयानुभूति डॉ. (श्रीमती) अनीता पंडा 169
3. जातीय स्वाभिमान : दलित कहानियों के विशेष संदर्भ में सुश्री उमा देवी 175
4. जनजातीय हिंदी उपन्यास : परिचयात्मक विवेचन सुश्री खुमतिया देबबर्मा 179
भाषा-शिक्षण
1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
लोक-जीवन
1. डाक की उक्तियाँ और असमिया लोकजीवन में उसका प्रभाव सुश्री नंदिता दत्त 192
2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
इतिहास
1. अरुणाचल प्रदेश का इतिहास लेखन डॉ. राजेश वर्मा 201
2. मदन-कामदेव मंदिर : असम का खजुराहो श्रीमति काकोली गोगोई 204
व्यक्तित्व
1. स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना कनकलता बरूआ श्री अखिल चंद्र कलिता 206
2. महाराज कुमारी विम्बावती मंजरी : मणिपुरी मीरा प्रो. जगमल सिंह 208
लघु यात्रा-संस्मरण
1. एक नदी द्वीप में विकसित विशाल संस्कृति श्री अतुलेश्वर 212
साक्षात्कार
1. लेखक लिखे नहीं पढ़े भी साक्षात्कारकर्त्री : एन. कुंजमोहन सुश्री धनपति सुखाम 214
पुस्तक-समीक्षा
1. अज्ञेय के रचनाकर्म का एक अनछुआ पहलू समीक्षक “अज्ञेय और पूर्वोत्तर भारत” डॉ. जयसिंह ‘नीरद’ 218


वैयक्तिक औज़ार

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