स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-192

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लोक जीवन

डाक की उक्तियाँ और असमिया लोक जीवन में उसका प्रभाव

सुश्री नन्दिता दत्त
डाक की उक्तियों का प्रचलन केवल असम में ही नहीं बल्कि बंगाल, बिहार आदि प्रदेशों में भी है, परन्तु अन्य नामों से...।

असमिया लोक जीवन में डाक की उक्तियों का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। असमिया साहित्य में ये उक्तियाँ ‘डाकर वचन’ के नाम से प्रचलित है। ये असमिया के प्राचीन मौखिक लोक साहित्यों में से एक है, जो लिखित रूप से कहीं पर भी संरक्षित नहीं किया गया था, वह वचन तो केवल असम के लोगों के मुख में प्रचलित है। आधुनिक काल में आकर विद्वानों ने इन वचनों को संरक्षित करने का सुव्यवस्थित प्रयास किया, साथ ही लिखित रूप में छपवाने का भी प्रयास किया है, डाक की उक्तियों का प्रभाव खासकर असमिया किसानों के जन–जीवन में परिलक्षित होता है, उनके बीच इन वचनों का बहुत ही मान रखा जाता है और वे इन पर अटूट विश्वास भी रखते हैं। डाक की उक्तियों का प्रचलन केवल असम में ही नहीं बल्कि बंगाल, बिहार आदि प्रदेशों में भी है, परन्तु अन्य नामों से...। इन सभी विद्वानों ने डाक पुरूष का अपने–अपने प्रदेशों में होने का दावा किया है, प्रकृतार्थ में ‘डाक’ एक प्रवाद पुरूष है। इनका अस्तित्व सन्दिग्ध है तथा घटनाएँ विवादास्पद हैं, ‘डाकर वचन’ को जनश्रुतियाँ मानना अधिक युक्तिपूर्ण होगा। इसके रचनाकार तथा रचना का समय आदि सभी बातें संदिग्ध हैं।

‘डाक पुरूष’ असम के ही रहे हैं – ऐसा जन विश्वास असम प्रान्त में प्रचलित है, ऐसा माना जाता है ‘डाक नामक प्रवाद पुरूष का जन्म असम में ही हुआ था। उनके जीवन सम्बन्धी एक अर्वाचीन चरितपोथी भी प्राप्त हो चुकी है। सभी जनमत तथा प्रस्तुत पोथी के अनुसार ‘डाक’ ने बरपेटा जिले के ‘लेहि डाङरा’ नामक‘डाक–पुरूष’ ने एक कुम्हारिन के घर जन्म लिया था। एक दिन ‘मिहिर मुनि’ ने भ्रमण पर चलते कुम्हार के घर आतित्थ्य ग्रहण किया था। मिहिर मुनि कुम्हारिन के आतित्थ्य से प्रसन्न होकर उन्हें पुत्र लाभ का वरदान देकर चले गये। उसी वरदानुसार ‘डाक’ का जन्म हुआ। कहते है कि उन्होंने जन्म लेते ही प्रसव गृह में उपस्थित स्त्रियों को सम्बोधित किया था। जन्म लेने के तुरन्त बाद ही बोलने के कारण उनका नाम ‘डाक’ पड़ा। चरित–पोथी के अनुसार एक दिन जल से फूल तोड़ते समय ‘डाक’ को उनके सहपाठियों ने पानी में डुबोकर उनकी हत्या कर दी। ऐसा भी माना जाता है कि ‘डाक–पुरूष’ ने ‘एक दिन एक रात्रि’ के लिए ही जन्म लिया था। पर इस तथ्य का उनकी हत्या की घटना के साथ कोई सामंजस्य नहीं दिखाई देता है। ‘डाक चरित’ और जनश्रुतियों के बीच भी काफी विवाद रहा है।

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