स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-57

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कथा मंजरी

श्रंखल (असमिया भाषा से)

मूल - डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी
भाषांतरण - सुश्री राजश्री देवी

श्यामल की पूरी दुनिया जैसे मंत्री, विधायकों के साथ ही है। नौकरी के वृत्त से निकलकर दूसरी बातों की ओर ध्यान देने के लिए जैसे श्यामल के पास समय की कमी है। शायद श्यामल को उन्नति के शिखर तक पहुँचने की ज्यादा जल्दी हो रही है।

रास्ते से लोगों का आना–जाना अगर बढ़ा जाय या कोई दूसरा कुत्ता दौड़ता है, तो टाइगर जोर से भौंकने लगता है। हाथ–पाँव मारकर वह गले से बंधे हुए जंजीर से मुक्त होने की कोशिश करता है। टाइगर का यह दृश्य देखकर मुझे लोनी मौसी की याद आती है।

मेरी शादी से पहले लोनी मौसी ने मेरी माँ के सामने जो बाते कही थी, उन बातों की आवाज मेरे कानों मे गुँजने लगती हैं, "देख तो दीदी, बनु कितनी किस्मत वाली है! उसने कितने अच्छे लड़के को पसंद किया था। वह यहाँ–वहाँ नहीं भटकी। काश, हमारी मामोनि भी एक ऐसे ही लड़के को पसंद करती, तो हम कभी आपत्ति न करते। कितने धूम–धाम से हम उसकी शादी करवाते।" लोनी मौसी का एक यही बहुत बड़ा दु:ख है। अपनी इकलौती बेटी मामोनि की शादी अपनी इच्छानुसार धूम–धाम से नहीं करवा सकी। मामोनि ने अपने माँ–बाप को वह सुविधा ही नहीं दी। सुपरिण्टेंडिंग इंजीनियर बिपुल काठ हजारिका के विशाल वैभव और अभिजात्य के बीच बड़े प्यार से बड़ी होने वाली मामोनि ने कब पास की कचहरी में क्लर्क का काम करने वाले मन्मय बरूआ का बेटा विजन को अपना मन–प्राण सौंप दिया, मौसी को पता ही नहीं चला। जब पता चला, लोनी मौसी ने जोरदार विरोध किया। अच्छा गाना गाने के अलावा विजन का ऐसा क्या गुण है कि मामोनि बावरी हो गयी। पर लौनी मौसी के विरोध के बाद अपने प्यार का जोर दिखाने के लिए मामोनि एक दिन विजन के साथ भाग गयी। चारों ओर ढूँढने के बाद एक देहात गाँव से दोनों को लाया गया। प्रभावशाली मौसा ने विजन को पुलिस के द्वारा ऐसी सजा दिलवायी कि उसकी एक आँख हमेशा के लिए खराब हो गयी। इस घटना ने मामोनि को और जिद्दी बना दिया। एक साल तक वह कॉलेज आती–जाती रही और फिर वह गायब हो गयी। इस बार मामोनि ने जल्द ही कोर्ट में भी अपनी शादी रजिस्टर करवा ली।

रो–रोकर लौनी मौसी बिस्तर में ही लेटी रही। मौसा ने गरज कर मौसी को सावधान किया, "देखना, तुमने अगर फिर उसे इस घर में पाँव रखने दिया, तो मैं पूरा घर जला डालूँगा।"

उसके बाद मौसा का ब्लड प्रेशर हाई हो गया, पर जिद छोड़कर बेटी की खबर लेने नहीं गए। अपनी एकलौती बेटी से न मिल पाने के दु:ख से लोनी मौसी बेचैन हो गयी। पर मौसा के कारण वह जा भी नहीं पाती।

उस दिन मुझे बाहों में लेकर लोनी मौसी ने कहा था, "प्यार करना बुरी बात नहीं है। पर देखकर ही प्यार करना चाहिए।"

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समन्वय पूर्वोत्तर अक्टूबर-दिसम्बर 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संगीत-साहित्य के महाप्राण हज़ारिका का महाप्रयाण : विशेष आलेख
1. संस्कृति के महानायक भूपेन हज़ारिका का महाप्रस्थान डॉ. नवकांत शर्मा 1
2. भूपेन हज़ारिका का जीवन दर्शन और व्यक्तित्व डॉ. दिलीप मेधि 4
3. आम आदमी की पीड़ा ही भूपेन हज़ारिका के गीत थे श्री रविशंकर रवि 17
4. सुधाकंठ डॉ. भूपेन हज़ारिका : असमिया जाति के अलिखित दस्तावेज डॉ. प्रवीन कोच 19
5. असमिया संगीत और डॉ. भूपेन हज़ारिका श्री गौतम पातर 22
6. डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में समाज संहति और संप्रीति का प्रस्फुटन श्री अखिल चंद्र कलिता 25
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लोककथा संकलन एवं भाषांतरण
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लोकगीत संकलन एवं भाषांतरण
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कथा-मंजरी
भाषांतरित
1. प्रगति–गान (असमिया भाषा से) मूल श्री उमेश वैश्य 49
भाषांतरण श्रीमती काकोली गोगोई 49
2. श्रीमती इंदिरा : एक शोक गीत (मिजो भाषा से) मूल स्व. (श्रीमती) ललसाङजुआली साइलो 50
भाषांतरण श्री एच. वानलललोमा 50
दो कविताएँ
1. The Heart मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
हृदय भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
2. The Truth of Gender मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
लिंग की सच्चाई भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
मौलिक
1. खासी राजा शहीद उतिरोत सिंह डॉ. (श्रीमती) फिल्मिका मारबनियाङ 52
2. त्रिपुरेश्वरी का त्रिपुरा सुश्री खुमतिया देबबर्मा 53
3. सूख रहे दुनिया के प्राण श्री लालसा लाल ‘तरंग’ 54
4. अवश्य साथ देना डॉ. सीताराम अधिकारी 55
5. फूल सुश्री उमा देवी 56
6. मंच सुश्री विनीता अकोइजम 56
कथा-मंजरी भाषांतरित
1. श्रृंखल मूल डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी 57
भाषांतरण सुश्री राजश्री देवी 57
मौलिक
1. गुरु–दक्षिणा श्री संजीब जायसवाल ‘संजय’ 60
2. नई सुबह श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 66
3. तीन लघु प्रेरक कथाएँ डॉ. अकेलाभाइ 69
ललितनिबंध-मंजरी
1. बादलों को उतरने के लिए थोड़ी जगह दें' डॉ. अरूणेश ‘नीरन’ 72
2. पागल यौवन का विप्लवकारी महानर्तव डॉ. भरत प्रसाद 74
आलेख
संस्कृति और समाज
1. कारबि समाज का प्राचीन शैक्षिक डॉ. (श्रीमती) जूरि देवी 79
अनुष्ठान : जिरकेदाम (जिरछङ)
1. मणिपुरी संस्कृति की आधार भूमि मणिपुरी रास : प्रो. एच. सुवदनी देवी 86
2. दानवीर बलि के वंशज श्री शेखर ज्योतिशील 91
3. पूर्वोत्तर भारत की भाषा और संस्कृति पर अनुसंधान की असीम संभावनाएँ डॉ. संतोष कुमार 95
भक्ति-दर्शन
1. हिंदी एवं असमिया भक्ति काव्य समरूपता का सबल पक्ष : राष्ट्र के भावात्मक डॉ. राधेश्याम तिवारी 101
भाषा-चिंतन
1. हिंदी के प्रति दृष्टि – गांधी की डॉ. दिलीप मेधि 109
2. हिंदी के विकास में मानस का योगदान डॉ. राजेन्द्र परदेसी 120
3. पूर्वोत्तर भारत की भाषाएँ और संस्कृत–हिंदी का संबंध प्रो. शंभुनाथ 122
4. पूर्वोत्तर भारत में हिंदी : विकास की संभावनाओं का मूल्याँकन सुश्री एल. डिम्पल देवी 127
5. हिंदी परसर्गीय पदबंध श्री चंदन सिंह 131
6. नागा भूमि एवं हिंदी प्रचार–प्रसार की स्थिति डॉ. वी.पी. फिलिप जुविच 135
7. नोक्ते जनजाति की मौखिक लोक साहित्य की लेखन समस्या देवनागरी लिपि एक समाधान डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय 140
तुलनात्मक अंतरण
1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
3. प्रेमचंद एवं शरतचंद्र के कथा–साहित्य में स्त्री पात्र डॉ. दिनेश कुमार चौबे 157
समालोचन
1. हिंदी यात्रा साहित्य को नागार्जुन का प्रदेय डॉ. श्यामशंकर सिंह 162
2. स्वातंव्योत्तर हिंदी कविता में बदलती प्रणयानुभूति डॉ. (श्रीमती) अनीता पंडा 169
3. जातीय स्वाभिमान : दलित कहानियों के विशेष संदर्भ में सुश्री उमा देवी 175
4. जनजातीय हिंदी उपन्यास : परिचयात्मक विवेचन सुश्री खुमतिया देबबर्मा 179
भाषा-शिक्षण
1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
लोक-जीवन
1. डाक की उक्तियाँ और असमिया लोकजीवन में उसका प्रभाव सुश्री नंदिता दत्त 192
2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
इतिहास
1. अरुणाचल प्रदेश का इतिहास लेखन डॉ. राजेश वर्मा 201
2. मदन-कामदेव मंदिर : असम का खजुराहो श्रीमति काकोली गोगोई 204
व्यक्तित्व
1. स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना कनकलता बरूआ श्री अखिल चंद्र कलिता 206
2. महाराज कुमारी विम्बावती मंजरी : मणिपुरी मीरा प्रो. जगमल सिंह 208
लघु यात्रा-संस्मरण
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1. लेखक लिखे नहीं पढ़े भी साक्षात्कारकर्त्री : एन. कुंजमोहन सुश्री धनपति सुखाम 214
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