स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-60

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मैं नि:सहाय होकर टाइगर की ओर देखने लगी। मुझे देखकर वह थोड़ा शांत हो गया। मैंने उसका सर सहला दिया। उसने जैसे मेरे मन का भाव पढ़ लिया। उसने अपना सर मेरे पैरों से सटा दिया और उसने जैसे मुझे सहानुभूति दिखाना चाहा।

संर्पक सूत्र-
ग्रम – बरभगिया
पो. चराईवहीं
जीला – मरिगाँव (असम) – 782103
मो. 9863456742, 9854720379

मौलिक

गुरु दक्षिणा

श्री संजीव जायसवाल ‘संजय’
"मेरे घर वाले कल बाहर जा रहे हैं। सिर्फ दो रातों के लिये तुम मेरे घर आ जाओ। तुम्हारी थीसिस क्लियर हो जायेगी", प्रो. कुमार ने कहा।

लखनउ विश्वविद्यालय के पीछे गोमती तट पर दीपा, प्रकाश की गोद में सिर रख कर लेटी हुई थी। उसकी आंखो में अनगिनत सपने समाये हुए थे और चेहरे पर असीम शांति छायी हुई थी। प्रकाश के सानिध्य में उसे सुख के साथ–साथ सुरक्षा की अनुभूति भी होती थी।

अचानक आये तेज हवा के झोंकों ने दीपा की लटों को बिखेर दिया। उसका पूरा चेहरा बालों से यूँ ढँक गया, जैसे बदली से चांद। प्रकाश ने हाथ बढ़ा कर उसकी बिखरी हुइ लटों को सवाँरा फिर उसके चेहरे को दोनों हाथों के बीच लेता हुआ बोला, "दीप, हम लोग कब तक यूँ छिप–छिप कर मिलते रहेगें। आखिर तुम कब इस प्रकाश के आँगन में प्रकाश बिखरने के लिए राजी होंगी।"

दीपा अपनी आंखे प्रकाश के चेहरे पर टिकाते हुए मुस्करायी, "प्रकाश तो दीप का अंतिम लक्ष्य होता है। प्रकाश के बिना उसका अस्तित्व अर्थहीन है लेकिन ..."

"लेकिन क्या ?" प्रकाश अधीर हो उठा।

"तुम तो जानते हो, जो रिसर्च मैं कर रही हूँ, वह कितना महत्वपूर्ण है। थीसिस पूरी करने के लिए मेरे पास 24 घंटों का समय भी कम पड़ रहा है। ऐसे में अगर मैं शादी कर लेती हूँ तो अपने दायित्वों को पूरा नहीं कर पाऊँगी" दीपा ने अपनी तर्जनी प्रकाश के होठों पर टिकाते हुए कहा।

"हमारे घर में इतने नौकर हैं कि तुम्हें कोई काम करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। तुम आराम से अपनी थीसिस पूरी करना", प्रकाश ने समझाने की कोशिश की।

दीपा खिलखिलाते हुए उठ बैठी और कपड़ों में लगी रेत को झाड़ते हुए बोली, "जानती हूँ बुद्धुराजा, लेकिन तुम भी ये जान लो कि मैं जो भी काम करती हूँ, पूर्णता के साथ करती हूँ। जब तक थीसिस लिख रही हूँ, सिर्फ थीसिस लिखूँगी। जब प्यार करूँगी तो सिर्फ प्यार करूँगी। उस समय मैं किसी नौकर को न तो तुम्हारे पास चाय की प्याली लेकर भटकने दूँगी और न ही किसी को तुम्हारे कपड़े छूने दूँगी। सिर्फ मैं और तुम। हमारे बीच तीसरा कोई नहीं आने पायेगा। इसलिए फिलहाल थोड़ा-सा इन्तजार और करो। मेरी थीसिस बस पूरी होने ही वाली है। उसके बाद हम अपने–अपने घर वालों को अपने प्यार के बारे में बता देंगे।"

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समन्वय पूर्वोत्तर अक्टूबर-दिसम्बर 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संगीत-साहित्य के महाप्राण हज़ारिका का महाप्रयाण : विशेष आलेख
1. संस्कृति के महानायक भूपेन हज़ारिका का महाप्रस्थान डॉ. नवकांत शर्मा 1
2. भूपेन हज़ारिका का जीवन दर्शन और व्यक्तित्व डॉ. दिलीप मेधि 4
3. आम आदमी की पीड़ा ही भूपेन हज़ारिका के गीत थे श्री रविशंकर रवि 17
4. सुधाकंठ डॉ. भूपेन हज़ारिका : असमिया जाति के अलिखित दस्तावेज डॉ. प्रवीन कोच 19
5. असमिया संगीत और डॉ. भूपेन हज़ारिका श्री गौतम पातर 22
6. डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में समाज संहति और संप्रीति का प्रस्फुटन श्री अखिल चंद्र कलिता 25
7. असम के सांस्कृतिक दूत भूपेन हज़ारिका डॉ. माधवेन्द्र 29
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9. डॉ. भूपेन हज़ारिका का निधन... कलाक्षेत्र की एक अपूर्णीय क्षति श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 37
लोकमानस
लोककथा संकलन एवं भाषांतरण
1. राङगोला (कॉकबरक भाषा से) सुश्री रूपाली देबबर्मा 38
2. तीन भाई और एक बहन (पनार भाषा से) डॉ. संतोष कुमार 39
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5. जायीबोने (गालो भाषा से) सुश्री किस्टिना कामसी 43
लोकगीत संकलन एवं भाषांतरण
1. कोम जनजाति के पारंपरिक गीत (मणिपुर से) सुश्री टी. जेलेना कोम 44
2. का तिङआब (कौआ) (खासी भाषा से) श्रीमती जीन एस. ड्खार 47
कथा-मंजरी
भाषांतरित
1. प्रगति–गान (असमिया भाषा से) मूल श्री उमेश वैश्य 49
भाषांतरण श्रीमती काकोली गोगोई 49
2. श्रीमती इंदिरा : एक शोक गीत (मिजो भाषा से) मूल स्व. (श्रीमती) ललसाङजुआली साइलो 50
भाषांतरण श्री एच. वानलललोमा 50
दो कविताएँ
1. The Heart मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
हृदय भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
2. The Truth of Gender मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
लिंग की सच्चाई भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
मौलिक
1. खासी राजा शहीद उतिरोत सिंह डॉ. (श्रीमती) फिल्मिका मारबनियाङ 52
2. त्रिपुरेश्वरी का त्रिपुरा सुश्री खुमतिया देबबर्मा 53
3. सूख रहे दुनिया के प्राण श्री लालसा लाल ‘तरंग’ 54
4. अवश्य साथ देना डॉ. सीताराम अधिकारी 55
5. फूल सुश्री उमा देवी 56
6. मंच सुश्री विनीता अकोइजम 56
कथा-मंजरी भाषांतरित
1. श्रृंखल मूल डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी 57
भाषांतरण सुश्री राजश्री देवी 57
मौलिक
1. गुरु–दक्षिणा श्री संजीब जायसवाल ‘संजय’ 60
2. नई सुबह श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 66
3. तीन लघु प्रेरक कथाएँ डॉ. अकेलाभाइ 69
ललितनिबंध-मंजरी
1. बादलों को उतरने के लिए थोड़ी जगह दें' डॉ. अरूणेश ‘नीरन’ 72
2. पागल यौवन का विप्लवकारी महानर्तव डॉ. भरत प्रसाद 74
आलेख
संस्कृति और समाज
1. कारबि समाज का प्राचीन शैक्षिक डॉ. (श्रीमती) जूरि देवी 79
अनुष्ठान : जिरकेदाम (जिरछङ)
1. मणिपुरी संस्कृति की आधार भूमि मणिपुरी रास : प्रो. एच. सुवदनी देवी 86
2. दानवीर बलि के वंशज श्री शेखर ज्योतिशील 91
3. पूर्वोत्तर भारत की भाषा और संस्कृति पर अनुसंधान की असीम संभावनाएँ डॉ. संतोष कुमार 95
भक्ति-दर्शन
1. हिंदी एवं असमिया भक्ति काव्य समरूपता का सबल पक्ष : राष्ट्र के भावात्मक डॉ. राधेश्याम तिवारी 101
भाषा-चिंतन
1. हिंदी के प्रति दृष्टि – गांधी की डॉ. दिलीप मेधि 109
2. हिंदी के विकास में मानस का योगदान डॉ. राजेन्द्र परदेसी 120
3. पूर्वोत्तर भारत की भाषाएँ और संस्कृत–हिंदी का संबंध प्रो. शंभुनाथ 122
4. पूर्वोत्तर भारत में हिंदी : विकास की संभावनाओं का मूल्याँकन सुश्री एल. डिम्पल देवी 127
5. हिंदी परसर्गीय पदबंध श्री चंदन सिंह 131
6. नागा भूमि एवं हिंदी प्रचार–प्रसार की स्थिति डॉ. वी.पी. फिलिप जुविच 135
7. नोक्ते जनजाति की मौखिक लोक साहित्य की लेखन समस्या देवनागरी लिपि एक समाधान डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय 140
तुलनात्मक अंतरण
1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
3. प्रेमचंद एवं शरतचंद्र के कथा–साहित्य में स्त्री पात्र डॉ. दिनेश कुमार चौबे 157
समालोचन
1. हिंदी यात्रा साहित्य को नागार्जुन का प्रदेय डॉ. श्यामशंकर सिंह 162
2. स्वातंव्योत्तर हिंदी कविता में बदलती प्रणयानुभूति डॉ. (श्रीमती) अनीता पंडा 169
3. जातीय स्वाभिमान : दलित कहानियों के विशेष संदर्भ में सुश्री उमा देवी 175
4. जनजातीय हिंदी उपन्यास : परिचयात्मक विवेचन सुश्री खुमतिया देबबर्मा 179
भाषा-शिक्षण
1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
लोक-जीवन
1. डाक की उक्तियाँ और असमिया लोकजीवन में उसका प्रभाव सुश्री नंदिता दत्त 192
2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
इतिहास
1. अरुणाचल प्रदेश का इतिहास लेखन डॉ. राजेश वर्मा 201
2. मदन-कामदेव मंदिर : असम का खजुराहो श्रीमति काकोली गोगोई 204
व्यक्तित्व
1. स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना कनकलता बरूआ श्री अखिल चंद्र कलिता 206
2. महाराज कुमारी विम्बावती मंजरी : मणिपुरी मीरा प्रो. जगमल सिंह 208
लघु यात्रा-संस्मरण
1. एक नदी द्वीप में विकसित विशाल संस्कृति श्री अतुलेश्वर 212
साक्षात्कार
1. लेखक लिखे नहीं पढ़े भी साक्षात्कारकर्त्री : एन. कुंजमोहन सुश्री धनपति सुखाम 214
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