स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-66

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नई सुबह

श्रीमती रीता सिंह 'सर्जना'
मनोरमा स्तब्ध रह गई थी मंदीप के इस व्यवहार पर। जीवन में कोई भी घटना पहली बार ही होती है। वह बहुत आहत हो गई।

आज भी मंदीप शराब पीकर घर लौटा है। वह लड़खड़ाते हुए घर के अन्दर घुस गया और धम्म से वैसे ही बेड पर गिर गया। आज उसने कुछ ज्यादा ही पी रखी है। उसके पीने की आदत के कारण नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। प्राइवेट नौकरी थी। बगैर काम के भला कौन उसे पगार देता। जब से नौकरी छूटी है, वह ज्यादा पीने लगा है। जो रूपया–पैसा कमाया था, वह सब फूंकने लगा। उसे कुछ भी होश नहीं रहा। कब बच्चे स्कूल जाते, कब फीस भरती, बच्चे को क्या चाहिए आदि। मनोरमा का जीवन तो जैसे नरक बन चुका था। उसने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन उसका हश्र ऐसा भी होगा। मंदीप को वह बचपन से ही जानती थी। दोनों के परिवार– फैमिली फ्रेन्ड थे। अत: दोनों साथ–साथ पले–बड़े हुए। बी.ए. करने के पश्चात मंदीप को एक प्राइवेट फार्म में नौकरी मिल गयी तो घर वालों ने उसकी शादी कर देने के लिए लड़की देखना शुरू कर दिया। लेकिन मंदीप को कोई लड़की पसंद नहीं आई। एक दिन चुपके से उसने माँ को कहा – मुझे मनोरमा पसंद है। फिर क्या था, फैमली मित्रता रिश्ते में बदल गई। कुछ साल सब कुछ ठीक–ठाक चलता रहा। इसी बीच दोनों के जीवन में दो प्यारे बच्चों ने पदार्पण किया। दोनों बहुत खुश थे। लेकिन एक दिन !! यह क्या ??? यहीं से उसकी दुर्दशा शुरू हुई। मंदीप के मुँह से शराब की बू पहली बार मनोरमा ने महसूस किया। इससे पहले कि मनोरमा कुछ बोले मंदीप स्वयं कान पकड़कर मनोरमा से माफी मांगने लगा।

"गलती हो गई... प्लीज मुझे माफ कर दो। पार्टी में दोस्तों ने जबरदस्ती पिला दी थी। अब मैं कभी नहीं पिऊँगा।"

"चलो ठीक है, फ्रेश होकर खाना खालो।"

"मनु तुम खालो न प्लीज, मेरा पेट भरा है।"

"क्या मतलब !"

"दोस्तों ने खाने की जिद की तो मैंने खा लिया।" मनोरमा स्तब्ध रह गयी थी मंदीप के इस व्यवहार पर। जीवन में कोई भी घटना पहली बार ही होती है। वह बहुत आहत हो गई। क्योंकि शादी के बाद से आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था दोनों एक दूसरे को छोड़कर खाते। उस रात खाना खाये बिना ही वह सोने चली गई। बच्चे शांति से सो रहे थे। मासूम सोते बच्चों की तरफ देखकर अपनी आँखों में उभरे आँसू को पोंछते हुए वह सोने का असफल प्रयास करने लगी। मनोरमा को आज बहुत दु:ख हुआ। उसने कभी नहीं सोचा था की मंदीप शराब पीकर ऐसा व्यवहार करेगा ? क्योंकि मनोरमा को शराब से नफरत थी। क्योंकि वह जानती थी की शराब एक ऐसा राक्षसी पेय है, जो मासूम घरों को बर्बाद कर देता है। सादगी पसंद मनोरमा ने मंदीप को उसके शराब न पीने की आदत की वजह से पसंद किया था। शादी के बाद सास–ससुर जी गाँव के घर में रहने चले गये। उसने काफी कोशिश की कि सभी एक साथ रहें, पर उन्होंने यह कहकर मनोरमा को चुप करा दिया कि "बेटा हम आते रहेंगे।" तुम लोग भी छुट्टियों में आते रहना। मनोरमा के आहत दिल पर न जाने क्या–क्या सोच उभरती रही।

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क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
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1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
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1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
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2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
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