हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-17

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मेरी यात्रा

बेसुजीन (द. कोरिया)
कक्षा-200


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मैं परीक्षा समाप्त होने के बाद अपनी सहेली तान्यानिन के साथ नेपाल गई थी। जाने से पहले हमने सोचा था कि जाएँ या नहीं? क्योंकि उस समय आगरा में थोड़ी ठंड थी। हमने सोचा शायद नेपाल आगरा से बहुत ठंडा होगा, और हमारे पास गरम कपड़े नहीं थे। हम वहाँ कैसे घूमेंगी। लेकिन अंत में हमने जाने का निश्चय किया।

पहले हम ट्रेकिंग करने के लिए पोकारा गए। पोकारा पहुँचने के दिन हमें ट्रेकिंग करने के लिए अनुमति मिली और इधर-उधर घूमते-घूमते हमने अच्छा खाना खाया। और अगले दिन सुबह जल्दी उठकर पहाड़ पर जाने के लिए हम तैयार हुए। ट्रेकिंग के लिए तान्यानिन ने 4 दिन और मैंने 7 दिन चुने, इसलिए हमने अपने-अपने मार्गदर्शक के साथ अलग-अलग ट्रेकिंग शुरू की। पर्वत पर आगे बढ़ते हुए मैंने अपने दोस्तों को याद किया। उन्होंने मुझसे कहा था कि "पर्वत पर ऊपर चढ़ते समय खाना महँगा होता जाता है।" इसलिए मैंने सोचा कि 'मैं खाना थोड़ा खाऊँगी, और खर्च कम करूँगी और पतली भी होऊँगी। इस तरह एक पंथ दो काज हो जाएगा।' मैं यह सोचते-सोचते भोजनालय में पहुँच गयी। उस दिन मैंने नाश्ता नहीं किया था, लेकिन थकान हो जाने के कारण मैं दोपहर में भी नहीं खाना चाहती थी। मैं सिर्फ पानी पी-पी कर कभी बीच-बीच में आराम करते-करते धीरे-धीरे आगे बढ़ती गयी। शाम को होटल पहुँचने के बाद नहायी और शाम को भोजन भी किया। कमरे में अकेली लेटी हुई मैंने सोचा कि "मैं अपने दोस्त जिसने मुझे ट्रेकिंग के बारे में बताया उसे मार ना डालूँ।"

दूसरे दिन सुबह छह बजे नाश्ता करने के बाद पुन: चलना शुरू किया और उस दिन शाम का खाना खाते समय मैंने सोचा कि 'खर्च कम करना और पतला होना अभी मेरे लिए जरूरी नहीं है। यदि मैं नहीं खाती हूँ तो मर जाऊँगी। मैं आगरा वापस जाना चाहती हूँ।' उस दिन से मैंने बहुत खाना शुरू कर दिया। तीसरा दिन भी पहले और दूसरे दिन की तरह सिर्फ खाते-चलते और सोते बीता और उस दिन मैंने अपने दोस्त के बारे में सोचा कि 'मेरे दोस्त ने मुझे ट्रेकिंग के बारे में सच बोला था या झूठ? वह मेरा दुश्मन था? मैं रोना चाहती थी, आगरा वापस जाना चाहती थी।

लेकिन अगले दिन फिर चलना शुरू किया। चौथे दिन अंत में मैं पर्वत के लक्ष्य स्थल पर पहुँच गई। वहाँ बहुत सुंदर दृश्य था। मुझे बहुत अच्छा लगा, लेकिन वहाँ बहुत ठंड थी और सिरदर्द के कारण मैं अच्छी तरह सो नहीं सकी थी। दो दिन के बाद सातवें दिन मैं पोकारा वापस आयी। पोकारा में तान्यानिन से मिलने के बाद हमने थोड़ा सा आराम किया और फिर हम दूसरी जगह चले गए।

नेपाल से भारत आते समय हम ट्रेकिंग के कारण बहुत थक गए थे। इसलिए हमने आगरा लौट जाने का सोचा, लेकिन फिर बोधगया और वाराणसी जाने का निश्चय किया। बोधगया हमने अच्छी तरह घूमा और स्वादिष्ट खाना भी खाया। दो दिन वहाँ पर आराम करने के बाद वाराणसी गए। मैं दूसरी बार वाराणसी गयी थी। मुझे वाराणसी बहुत पसंद है, विशेषकर आरती पूजा, घाट मंदिर आदि। वाराणसी में मेरे दोस्त भी यात्रा करने के लिए आये थे। उनसे मिलने के बाद मैं और तान्यानिन आगरा वापस आए।

इन छुट्टियों में मैं कम जगह घूमने गयी थी। लेकिन मेरे लिए यह बहुत अच्छा समय था। भारत को महसूस करने के लिए।


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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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