हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-47

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‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में

(रोमानियन भाषा से अनुवाद)
रालूका (रोमानिया)
कक्षा-100


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Mircea Eliade- मिर्चेआ ऐलियादे एक रोमानियन लेखक हैं। उनकी नज़र में भारत में कोई भी औरत एक देवी का रूप है। जब एक आदमी विवाहित या अविवाहित औरत से बात करता है तो वह उसका केवल नाममात्र नहीं लेता है, उसके नाम के बाद ‘‘देवी’’ लगाता है। जैसे मैडम इंदिरा सेन ‘इंदिरा देवी’ जी कहलाती हैं यह छोटी सी बात बहुत अर्थपूर्ण है। लड़की को कुमारी का दर्जा नहीं बल्कि भारत में देवी का मिलता है। इससे उसकी सृजन शक्ति का अहसास मिलता है। उसे ‘‘माँ’’ के रूप में देखते हैं। इसके आगे कोई दूसरा स्त्रियोचित गुण तुच्छ प्रतीत होता है। हर औरत की आराधना की जाती है, क्योंकि वो माता जी हैं या माता जी होगीं। भारतीय औरत को बहुत बुद्धिमान, होनहार कहा गया है। क्योंकि वे हम सभ्य बने पश्चिम देशों के लोगों की चापलूसी करती हैं। अभी एक भारतीय औरत की बात सुनिए। यह बात मैंने बहुत समय पहले एक शाम फरवरी में Bhowanipur भवानीपुर में सुनी।

‘‘अक्सर हमारी यूरोपीय और अमेरिकी दीदियों को हम पर दया आती है। वे सोचती हैं कि भारतीय औरत को अन्त:पुर में दबा कर रखा जाता है भारतीय औरतों को आमोद-प्रमोद की स्वतंत्रता नहीं है। वे अपनी मुक्ति चाहती हैं परन्तु आपने देखा कि ऐसे उदाहरण हिंदू समाज में नहीं हैं। वास्तव में यूरोपीय औरत सोचती है कि हमारी जिंदगी रोमांस और साहस के बिना है। इसलिए उन्होंने सोचा है हम यहाँ पर दु:खी और दयनीय है किंतु भारतीय स्त्री स्वतंत्रता पर ध्यानाकर्षित नहीं करती है। उसकी खुशी चंचलता नहीं है। वह खुशी तो क्षणभंगुर है। वह गैर जिम्मेदार, भावुक, कामुक और घमंडी भी नहीं है। विदेशी औरत सोचती (हैं) कि हमारी ज़िंदगी नीरस है और हम दास/दासी (Slaves) है।

अभी गुलामी या दास-प्रथा (Slaveny) की बात नहीं है। पत्नी गृह स्वामी है। उसके पास पैसा रखा जाता है, वह खरीदारी करती है, वह भी सबका नेतृत्व (netritva) करती है। हम युरोपियन औरतों की ज़िंदगी में केवल सिनेमा घर में उत्साह दिखता है। हमारे लिए युरोपियन औरत की स्थिति बहुत हास्यप्रद है क्योंकि वह आदमी का काम करती है। आप जानते हैं कितनी सुंदर भारतीय औरतों की ज़िंदगी है! कितनी जटिल (Complex) ज़िंदगी है विशेष रूप से जब हम अपने पति के साथ होती हैं, लेकिन हम अपना काम करती हुईं अपनी सोच अपने पति की सोच से मिलाती हैं। इसलिए वे हमको हमेशा गीत गा-गाकर सुनाते हैं।

हम प्यार की शादी नहीं करती हैं परन्तु हम शादी के बाद प्यार करने लगते हैं। हम अपने पति से प्यार करते हैं क्योंकि वह हमारा नियत/ईश्वरीय पति है। हर आदमी मानता है कि वह अपनी ज़िंदगी में तीन बड़ी घटनाओं में हस्तक्षेप नहीं करता है: अपने जन्म, मृत्यु और शादी के समय। हम अपने कर्म के अनुसार जन्म लेते हैं शादी करते हैं और मर जाते हैं। इसलिए हमारा पति हज़ार सालों से, हज़ारों पुर्नजन्मों के द्वारा सचमुच हमारा है। इसलिए भारत में केवल कुछ ही दु:खी शादी होती हैं।

हमारे सामने इतनी ऊँची नीतियाँ हैं तो हम चंचल स्वतंत्रता की हमारी युरोपियन दीदियों को क्या करें? हम इन्हें नदी में कमल की पंखुड़ी की तरह नष्ट कर देती है परन्तु फिर भी कुछ नदी के किनारे मंदिर में शेष रह जाती हैं। क्योंकि, आप जानते हैं, क्षणभंगुरता में खुशी नहीं है, खुशी या परमानंद केवल नित्यता में होता है।



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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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