हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-48

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चीनी नया साल और लाल बसंत

चांग लू (चीन)
कक्षा-100


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चीन में अनेक त्योहार मनाये जाते हैं। इन त्योहारों में से कुछ अंतर्राष्ट्रीय हैं और कुछ परंपरागत। परंपरागत त्योहारों में बसंत का त्योहार सबसे प्रमुख है। बसंत त्योहार के विषय में एक रोचक कहानी है। बहुत समय पहले, ‘‘नीआं’’ नामक एक शैतान था। हर साल 31 दिसंबर को वह गाँव जाकर बच्चे खाता था। ‘‘जीआं’’ को लाल रंग और पटाखे की आवाज़ से डर लगता था। ग्रामवासी लाल कपड़े पहनते थे और पटाखे छोड़ते थे ताकि उसे भगा सकें। वे लोग जो ‘‘साल के आख़िरी दिन में शैतान से सुरक्षित बच जाते हैं।’’ उन्हें ‘‘ग्वो नीआं’’ कहते हैं। इसलिए चीनी भाषा में बसंत त्योहार को भी ‘ग्वो नोआं’ कहते हैं।

यह सिर्फ लोक-कहानी है। वास्तव में बसंत त्योहार का संबंध बसंत ऋतु से है। चीनी के अनुसार, 31 दिसंबर को सर्दियों का अंत होता है, और 1 जनवरी से बसंत ऋतु शुरू होती है। इसी कारण, सूर्यबंधी कैलेंडर में बसंत त्योहार का दिन निश्चित नहीं है। हर वर्ष इस त्योहार का दिन बदलता है। सामान्य रूप से बसंत का त्योहार मार्च में पड़ता है। भारत में भी सामान्यत: फरवरी-मार्च में बसंत का त्योहार मनाया जाता है। इस बार भारत में रहने के कारण मैंने यहाँ की बसंत ऋतु का भी आनंद लिया और इसकी विशेष परंपरा को भी देखा और जाना। भारत में बसंत ऋतु का स्वागत ज्ञान और कला की देवी सरस्वती की पूजा के साथ होता है।

चँकि बसंत त्योहार चीनी लोगों के लिए बड़ा महत्वपूर्ण और लोकप्रिय होता है इसलिए उसके साथ कुछ प्रथाएँ जुड़ी हैं। 28 दिसंबर को (चीनी चंद्र कलैंडर के अनुसार) हर परिवार अपने घर की सफाई करता है। चीनी भाषा में ‘धूल’ और ‘पुरानापन’ के लिए प्रयुक्त शब्दों के उच्चारण एक समान हैं इसलिए दोनों ही चीजें सफाई करने योग्य हैं। यानि कि पुरानी चीजें फेंकी जाती हैं, बुरा भाग्य छोड़ा जाता है और नई शुरूआत, खुशियाँ मनाई जाती हैं। उस दिन लोग मकान के हर कोने को साफ करते हैं। सभी कुछ चादरें, परदे, धोते हैं। ताज़ा फूल और दूसरे आभूषण घर में लाकर सजाते हैं। आवश्कता के अनुसार लोग बाल और नाखून काटते हैं और नहाते हैं। चीनी लोगों के विचार से, ऐसा करने से, नए साल में कोई बीमारी व कष्ट नहीं होता है।

29 दिसंबर को हर परिवार में ‘फ़ऊ’ दरवाज़े पर लगाते हैं। काग़ज की पट्टी पर (फ़ऊ) लिखकर दरवाजे के ऊपर लगाते है जैसे भारत में दरवाजे पर बंदनवार लगाते हैं। ‘फ़ऊ’ का अर्थ शुभकामनाएँ होता है। लेकिन इसे उलटा लगाना चाहिए। चीनी भाषा में ‘उलटना’ का उच्चारण ‘आना’ के उच्चारण के समान है। इसलिए उल्टा हुआ ‘फ़ऊ’ एक शुभ-शब्द माना गया-यानि भाग्य-नक्षत्र आ रहा है। इसके अलावा, लोग दरवाजे के बायीं और दायीं ओर तथा दरवाजे के ऊपर विशेष दो पंक्ति की कविता लगाते हैं। यह कविता लाल काग़ज़ पर लिखी जाती है, जिसके ज़रिये हम अपने कल्याण की कामना करते हैं।

30 दिसंबर को सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। सुबह से लोग रात की दावत के लिए खाना तैयार करते हैं। हर खाना प्रतीकात्मक अर्थ देता है। उसका उच्चारण शुभ चीजों से संबंधित है। जैसे चावल केक, जिसका उच्चारण लम्बी उम्र के जैसा है। उसका सुनहरा और सफेद रंग धन जैसा है। मछली का विशेष अर्थ धन हो जाएगा। मुर्गी का अर्थ भाग्य है। इस दिन के भोजन में जीऔज़ (मोमो) बड़ा जरूरी है, क्योंकि उसका अर्थ मिलना-जुलना, भाग्य और धन होता है। लोग एक या दो जीऔज़ में सिक्का या मेवा रख देते हैं। कोई आदमी जो यह विशेष प्रकार का जीऔज़ खा लेता है, दूसरे लोग उसको मुबारकबाद देते हैं और पूरे साल की शुभकामनाएँ देते हैं। जब रात होती है, तो सभी नातेदार-रिश्तेदार मिलकर खाना खाते हैं, ताश खेलते हैं, और टी.वी. पर रात्रि-समारोह देखते हैं। जब तक नया साल शुरू न हो जाये तब तक हम जागते रहते हैं। जागने का पहला अर्थ पालन-पोषण होता है, और दूसरा लम्बी उम्र मिल सकती है। बारह बजते ही एकाएक पटाखे की आवाज़ चारों ओर से सुनाई पड़ती है। बच्चों को अपने बड़ों ‘शुभ पैसा-त्योहारी’ मिलती हैं ‘त्योहारी’ को लाल लिफ़ाफे में रखा जाता है। लिफ़ाफा बच्चों के पलंग के ऊपर लटकाया जाता है। यह सोते हुए बच्चों के तकिये के नीचे भी रखा जाता है।

1 जनवरी को लोग सुबह जल्दी उठते हैं। नए कपड़े पहनकर और तोहफ़ा लेकर अपने नातेदार-रिश्तेदारों के घर जाते हैं। जो लोग रास्ते में मिलते हैं, उन्हें शुभकामनाएँ देते हैं, जैसे ‘खूब लम्बी उम्र हो’ और ‘धनी हो।’ उस दिन कैंची और चाकू जैसी अमंगलसूचक चीजें छिपा कर रखी जानी चाहिए। सफाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि भाग्य-नक्षत्र भी उसके साथ जा सकता है। अस्पताल नहीं जाना चाहिए, और दवाई नहीं खानी चाहिए।

2 जनवरी के जो विवाहित बेटियाँ हैं वे अपने पति के साथ अपने माता-पिता के घर जाती हैं। 3 जनवरी को लोग अपने पूर्वजों की पूजा के लिए कब्रस्तान जाते हैं। लोगों को लगता है कि 4 जनवरी को देवी-देवता आदमियों के घर जाते हैं, इसलिए उस दिन (चीनी देवता) के सामने पूजा-अर्चना करते हैं। 5 जनवरी को धन के देवता के लिए एक विशेष पूजा करते हैं। 6 जनवरी से सभी बाजार-दुकानें खुलती हैं और सभी व्यापार शुरू करते हैं। बसंत का त्योहार 15 दिन तक बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, इसके बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है।

मैंने महसूस किया कि भारत और चीन में यह त्योहार अलग-अलग तरह से मनाया जाता है लेकिन दोनों त्योहारों के बीच एक मुख्य समानता है। पुरानी, खराब हो चुकी चीजों को छोड़कर नयी और शुभ चीजों और विचारों का स्वागत करते हैं।



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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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सुस्वागतम्
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