हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-50

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अफगानिस्तान

मोहम्मद खालिद (अफगानिस्तान)
कक्षा-200
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अफगानिस्तान–इस्लामिक गणराज्य दक्षिणी मध्य एशिया में स्थित है। देश में लगातार चल रहे संघर्षों ने इसे कभी मध्य पूर्वी कभी दक्षिण एशिया से जोड़ दिया है। इसके पूर्व में पाकिस्तान उत्तर पूर्व में भारत तथा चीन उत्तर में ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तथा पश्चिम में ईरान हैं। यह प्राचीन काल में फारस तथा शक साम्राज्यों का अंग रहा है। अफगानिस्तान की कर्मभूमि रहा है। इनमें सिकन्दर, फारसी शासक दारा प्रथम तुर्क, मुगल शासक बाबर, मुहम्मद गौरी, नादिर शाह इत्यादि के नाम प्रमुख हैं। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल है। यहाँ कई नस्ल के लोग रहते हैं। पख़तुन ‘‘पठान या अफगान’’ सबसे अधिक हैं। इसके अलावा उज़्बेक, ताज़िक, तुर्कमेनी, और हज़ारा शामिल हैं। यहाँ की मुख्य भाषा पख्तो है। फारसी भाषा के अफगानी रूप को दारी कहते हैं अफगानिस्तान का नाम अफगान और स्तान से मिलकर बना है। जिसका शाब्दिक अर्थ है अफगानों की भूमि ‘स्तान’ इस क्षेत्र के कई देशों के नाम में है। जैसे– हिन्दुस्तान, कज़ाकिस्तान, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान इत्यादि, जिसका अर्थ भूमि या देश है। अफगान यहाँ के सबसे अधिक वसित नस्ल ‘‘पख़तन या पशुन’’ को कहते हैं। अफगान शब्द को संस्कृत अवगान से निकला हुआ माना जाता है।

मानव बसाहट 10,000 साल से अधिक पुरानी हो सकती है। ईसा के ‘‘1800’’ साल पहले आर्यों का आगमन इस क्षेत्र में हुआ। ईसा के ‘‘700’’ साल पहले इसके उत्तरी क्षेत्र में ‘‘गांधार’’ महाजनपद था, जिसके बारे में भारतीय स्त्रोत महाभारत तथा अन्य ग्रंथों में वर्णन मिलता है। ईसापूर्व ‘‘500’’ में फारस के हखामनी शासकों ने इसे जीत लिया। सिकन्दर के फारस की विजय अभियान के तहत अफगानिस्तान भी यूनानी साम्राज्य का अंग बन गया। इसके बाद यह शको के शासन में आए। शक स्कीथियों के भारतीय अंग थे। ईसापूर्व ‘‘230’’ में मोर्य शासन के तहत अफगानिस्तान का संपूर्ण इलाका आ चुका था। पर मौर्य शासन अधिक दिनों तक नहीं रहा। इसके बाद पर्शियन और फिर सासनी शासकों ने फारस में केंद्रित अपने साम्राज्यों का हिस्सा इसे बना लिया।

सासनी वंश (जो फारसी मूल के पर ‘सुन्नी’ थे) ने (987) ईसवी में अपना शासन गजनबियों के हाथों खो दिया, जिसके फलस्वरूप लगभग संपूर्ण अफगानिस्तान गज़नबियों के हाथ में आ गया। गोर के शासकों ने गज़नी पर अधिकार कर लिया। अफगानिस्तान में कुल ‘‘34’’ प्रशासनिक विभाग हैं। इनके नाम हैं-

काबुल, बदखशान, बादगीस, बागलान, बाम्यान, दायकुंदी, फराह, फारयाब, गज़नी, गोर, हेलमंद, हेरात, जोज़जान, कांदहार, कापीसा, खोसत, कोनर, कन्दुज़, लगमान, लोगर, नागंरहार, निमरूज, नुरेस्तान, आरूज्गान, पक्तिया, पक्तिका, पंजशिर, परवान, समंगान, सरै पोल, तख़ार, वारदग, ज़ाबोल। अफगानिस्तान में अंगूर, अनार, सेब, नाशपाती, शहतूत, खरबूजा, खठके तरबूजा आदि फल पाये जाते हैं। बादाम, पिस्ता, अंजीर, अखरोट जैसे सूखे मेवों का बादशाह अफगानिस्तान है। मेहमान नवाजी के लिए हमें अपने देश पर गर्व है।


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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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