हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-51

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रूसी भाषा

वियोलेता (रूस)
कक्षा-300


पूरे विश्व में माना जाता है कि रूसी भाषा का अपना महान इतिहास रहा है, इसलिए यह भाषा बहुत ही इज़्जत के साथ सीखी और पड़ी-लिखी जाती है। मगर सवाल उठता है कि रूसी भाषा महान भाषा क्यों है? इस विषय पर मैं आज कुछ अपने विचार आपके सामने रखना चाहती हूँ।

प्रश्न यह है कि रूसी भाषा महान क्यों है? इसका एक कारण तो यही है कि रूसी भाषा का अपना इतिहास बहुत ही समृद्ध और गौरवशाली है। दूसरा–सांस्कृतिक दृष्टि से भी रूसी भाषा ने अन्य भाषाओं को पीछे छोड़ दिया है। रूसी भाषा, बोलने वाले हम कह सकते हैं कि रूसी भाषा का साहित्य और संस्कृति से गहरा वास्ता रहा है। रूसी उपन्यासों, कहानियों और कविताओं के अलावा नाट्य कृतियों का दुनिया की भाषाओं में अनुवाद किया गया है। पूरे विश्व में रूसी भाषा के महान साहित्यकारों की रचनाओं का रंगमंच पर प्रदर्शन भी होता रहा है। रूसी साहित्य का वैचारिक दृष्टिकोण से भी बहुत महत्व रहा है। रूसी साहित्य पर साम्यवादी विचारों का बहुत प्रभाव पड़ा है। रूसी साहित्य में रचनाकारों ने हमेशा किसानों, मज़दूरों और छोटे कामगारों की तरफ़दारी करते हुऐ अपने साहित्य की रचना की है।

इसके उदाहरण– रूसी उपन्यास, कहानियों और कविताओं में भी मिलते है। उदाहरण के लिए जैसे– पुश्किन से लेकर उनकी रचना (1) "मेदनीय वसाडनीक’", (2) गोगल–शिनेल, (3) दोस्तोयेवस्कीय– "बेदनीए लयुदी–ग़रीब लोग", (4) गोरपकीय– "ना दने", उपन्यास "मात्य", पोवेस्त्य–बचपन रूसी साहित्य पूरे विश्व के मार्ग का प्रकाशित करता रहा है। उदाहरण के लिए–

  1. तोलस्तोय– "आन्ना कारेनिना" और "वोपना ई मीर"
  2. चेहोव की कहानियाँ
  3. दोस्तोयेवस्कीय– #इदिओत", "प्रेस्तुपलेनिए ई नकाज़निए।"

इसके अलावा यह भी सच है कि साहित्यकारों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए तरसना पड़ा है, क्योंकि रूसी साहित्य को तानाशाही (dictators) और साम्यवादी शासन में इतनी आज़ादी नहीं दी जाती थी, जोकि अन्य भाषाओं के साहित्य को मिली है। जो शासकों के विचारों को अपनी रचनाओं में शामिल नहीं करते थे, उनको लिखने नहीं दिया जाता था। जैसे पुश्किन, गेरसेन आदि। साहित्यिक लेखकों के मानक तय कर दिये जाते थे। रूस की धरती माँ महान और शक्तिशाली है, उसमें जिन लोगों ने जन्म लिया– वे महान हैं। रूसी लोगों और उनकी भाषा को महान इसलिए भी माना जाता है, क्योंकि रूसी साहित्य में साहित्यकारों द्वारा दिल, आत्मा और जीवन की गहराईयों की बात प्रस्तुत की गई हैं। इसलिए उसे महान भाषा कह सकते हैं। रूसी लोगों के बारे में कहा जाता है कि उनका मन बहुत गहरा और बड़ा होता है, इसलिए उनके द्वारा बोली जाने वाली भाषा को भी महान माना जाता है। पूरे विश्व में हमारे साहित्यकारों की रचनाएँ फ़ैली हुई हैं। इस दृष्टि से भी रूसी भाषा महान भाषा है। दिल को छूने वाली रचनाएँ हैं। हमें अपनी भाषा पर गर्व है।

एक और बात भी है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर और लेव निकोलायेवीच तोलस्तोय में समानता के अनेक बिंदु उनके विचारों, दर्शन और भाषा के प्रति विराट चिंतन में दिखाई देते हैं। यद्यपि दोनों की भाषा और संस्कृति अलग-अलग है। लेकिन वैचारिक पृष्ठभूमि एक जैसी है। महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर के साहित्य में भी यह वैचारिक समानता देखी जा सकती है। जैसे दोनों की अहिंसा की नीति दोनों का मानवता वादी चिंतन था। जैसे–तोलस्तोय के विचार थे कि किसी के प्राण लेने का कोई हक हमें नहीं है। उन्होंने अपने पेट को बढ़ाने के लिए कब्रस्तान न बनाने की सलाह दी। वह अपने विचार सिर्फ कहते ही नहीं थे, बल्कि उनका अपने जीवन में भी पालन करते थे। दोनों ने शिक्षा के क्षेत्रों में बहुत बड़े आदर्श संस्थानों की स्थापना की। जैसे रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता में जंगल में मंगल करते हुए "शांति निकेतन" स्थापित किया, वहीं तोलस्तोय ने "यास्नाया पोलयाना" पाठशाला की नींव रखी।


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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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