हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-52

ज्ञानकोश से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी)

वियोलेता (रूस)
कक्षा-300


पिछले जमाने की बात है। एक गाँव में एक बूढ़ा और एक बुड़िया रहते थे। जिनका नाम ईवान और मारिया था। वह काफ़ी साल से एक साथ रह रहे थे। जब वे दोनों जवान थे, उन्होंने अपना परिवार बसाया। उनका परिवार बहुत समृद्ध था। दोनों ही साफ़ दिल के इंसान थे, मगर उनके परिवार में सिर्फ एक कमी थी, जो उनके हाथ की बात नहीं थी। उनके समृद्ध परिवार में बच्चों की खिलखिलाहट का अभाव था। वे चाहते थे कि उनका घर बच्चों की हँसी और खिलखिलाहट से चहकता रहे। उनका घर बच्चों की शरारतों से आबाद हो जाये। मगर यह सब उनके हाथ में नहीं था। क्योंकि यह सब तो इंसान को नसीब से मिलता है। वे दूसरे परिवारों के बच्चों को देखकर खुश हो जाते थे। इस प्रकार वे अपना जीवन गुज़ार रहे थे।

Ice-Doll.jpg

एक दिन की बात है काफ़ी ठंड थी, बर्फ चारों तरफ़ जम गई थी। सभी घरों के बाहर भी बर्फ जमा हो चुकी थी। बूढ़ा और बुढ़िया खिड़की के पास बैठकर बाहर का नज़ारा देख रहे थे। आसपास के बच्चे बाहर इकट्ठे होकर बर्फ से खेल रहे थे। ये बच्चे बहुत खुश नज़र आ रहे थे। जैसे कि इस मौसम की पहली बार गिरी हुई बर्फ से खेल रहे हों, उन बुड्ढे और बुढ़िया को भी घर के बाहर बच्चों की खिलखिलाहट सुनाई दी। उन्होंने घर का सारा काम छोड़ दिया और खिड़की के पास आकर बच्चों का खेल देखने लगे मारिया के चेहरे पर मुस्कान थी मगर इसके साथ-साथ दु:ख भी झलक रहा था। वह बच्चों को देखकर दु:खी हो रही थी कि भगवान ने हमें संतान क्यों नहीं दी। अगर देते तो हम भी अभी अपने बच्चों के साथ खेलते होते। बच्चों को खेलते, खुश होते देखकर ईवान से बैठा नहीं गया। वह मारिया को लेकर बाहर निकला। उसने कहा भगवान ने हमें बच्चे नहीं दिए तो कोई बात नहीं मगर, हम क्यों दु:खी हो, क्यों न ‘हम भी’ बच्चों की तरह खुश होकर खेलें? उन्होंने सोचा क्यूं न हम भी खुद अपनी छोटी सी गुड़िया बर्फ से बनाऐं। इसके बाद वे दोनों बर्फ से गुड़िया बनाने में जुट गये। रूसी भाषा में बर्फ से बनायी गयी गुड़िया को "बाबा" कहते हैं।

बाबा (गुड़िया) बनाने के लिए उन्होंने पहले, एक बर्फ के पेड़ को एक दूसरे के ऊपर रखा और बोले वाह! यह तो गुड़िया का शरीर बन गया। कई लोगों ने देखा कि बूढ़ा-बुढ़िया बर्फ से बाबा बनाने में लगे थे। लोग यह बोलते हुए जा रहे थे कि भगवान आपकी मदद करे। भगवान आपका साथ दे। बुढ़िया ने सोचा भगवान ने बच्चे नहीं दिए हैं तो मैं अपने हाथों से बर्फ से गुड़िया बनाऊँगी। बूढ़े और बुढ़िया लोगों की यह दुआ सुनकर बहुत प्रसन्न हुए। यही तो उनके जीवन की इच्छा थी कि वे और उमंग बच्चों की तरह गुड़िया बनाने लगे। गुड़िया के चेहरे पर उन्होंने आँखों की जगह बटन लगाए। नाक और मुँह भी बनाए। उन्होंने देखा कि गुड़िया के चेहरे पर मुस्कान फैलने लगी है और गर्म हवा भी (मुँह) से निकलने लगी है। गाल भी गुलाबी भी होने लगे थे। यह देखकर बुड्ढा और बुढ़िया हैरान (आश्चर्य चकित) हो गए। उन्होंने भगवान को धन्यवाद दिया, जिसने उनकी इस बर्फ की गुड़िया में प्राण डाल दिए थे देखते ही देखते उनकी नन्हीं गुड़िया हाथ-पैर चलाने लगी। वह इस समय जैसे किसी अंडे से निकलने वाली चिड़िया के बच्चे की तरह लग रही थी। बूढ़े और बुड़िया की इच्छा पूरी हो गयी थी। उन्होंने वह सब पा लिया था, जिसे वे लंबे समय से पाना चाहते थे। अब उनका घर बच्चे की खिलखिलाहट से आबाद हो चुका था। उस गुड़िया का नाम बर्फीली गुड़िया पड़ गया, क्योंकि उसका जन्म बर्फ से हुआ था।

वे बूढ़ा और बुढ़िया उस बर्फीली गुड़िया को बहुत प्यार करते थे। उसे वे अपनी आँखों से जरा भी दूर नहीं जाने देते थे। उस बर्फीली गुड़िया के घर आ जाने से न सिर्फ वे बूढ़ा और बुढ़िया फिर से जवान महसूस करने लगे बल्कि उनके घर के आस-पास के लोग भी उस बर्फीली गुड़िया के आ जाने से खुश थे (हो गये)??? उनकी वह बर्फीली गुड़िया बहुत ही बुद्धिमान और सुरीली आवाज़ वाली थी। भले ही वह गुड़िया बर्फ की बनी थी, मगर सभी का दिल अपने प्यार से पिघला देती थी। वह सभी के दिलों को पगला देने वाला काम करती थी। वह सभी बच्चों की दोस्त और सहेली बन चुकी थी। थोड़ी-सी बड़ी होने पर वह एक दिन खुद अपने दोस्तों के साथ "बाबा" को बनाने लगी। बर्फीली गुड़िया को सर्दियाँ बहुत अच्छी लगी थी। उसे बर्फ से संबंधित चीज़े पसंद आती थी। एक दिन सूरज निकला आया। सूरज की किरणों के साथ ही ठंड भी कम होने लगी। बर्फ भी पिघलने लगी। सभी लोग बसंत ऋतु का स्वागत करने लगे। बर्फ पिघलने से छोटी-छोटी नदियाँ भी पिघलने लगीं। बर्फ से जमी हुई नदियाँ फिर से बहने लगी। इसके साथ ही पहले सफेद रंग के फूल खिलने लगे। सभी लोग अपने-अपने गर्म कपड़े हल्के कपड़ों में बदलने लगे। ज़मीन पर बर्फ पिघलने के बाद पहली घास की कोपलें फूटने लगीं। चिड़िया अपने गीतों को गुनगुनाने लगीं थीं। सभी छोटे और बड़े खुश होने लगे। मगर बर्फीली गुड़िया कुछ उदास रहने लगी। सूरज की चमकीली किरणें उसे चुभती थीं, वह पेड़ों की छाया में रहना पसंद करती थी। बुढ़िया अपनी बर्फीली गुड़िया की उदासी देखकर परेशान हुई। उसने अपनी गुड़िया से पूछा क्या हुआ बेटी? उसने संकोच में कहा– कुछ नहीं माँ। उसे गुड़िया की तबियत अच्छी नहीं लग रही थी। गुड़िया अब पहले से ज़्यादा खामोश रहने लगी। उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। एक दिन दोस्तों ने बर्फीली गुड़िया को जंगल में घूमने के लिए बुलाया। जब सूरज निकला हुआ था। बुढ़िया अपनी गुड़िया को भेजना नहीं चाहती थी, मगर दोस्तों ने बहुत कहा तो बुढ़िया ने उसे जाने दिया। वह उन्हें मना नहीं कर सकी। मगर उसे बहुत परेशानी महसूस हो रही थी। गुड़िया सभी दोस्तों (सहेलियों) के साथ जंगल में जाकर बसंत का स्वागत करने लगी। एक दूसरे के हाथ पकड़कर चक्कर लगाते हुए वे नाच रहे थे। गुड़िया पेड़ के नीचे ज़्यादा रहना चाहती थी। मगर दोस्तों ने उसे पकड़कर जर्बदस्ती नचाया। रूस में एक परंपरा है कि बसंत का स्वागत करने के लिए सभी लोग आग जलाकर उसके चारों ओर गीत-संगीत की धुनों पर नाचते हैं।

वे आग के चारों ओर घूम-घूमकर नाचते हुए आग के ऊपर से कूदते भी हैं। सभी सहेलियाँ आग के ऊपर नाचते हुए कूद रही थीं। उन्होंने बर्फीली गुड़िया को भी बुलाया। गुड़िया के मना करने पर भी वे गुड़िया को अपने साथ लेकर आयीं। उसे आग के ऊपर से कुदाया तो सारी बर्फ पिघल गयी। कुछ बूँदे पानी की बचीं थी। और किसी को पता भी नहीं चला। सभी बर्फीली गुड़िया को ढूँढ़ने लगे थे। जंगल में उसे पुकारने लगे, मगर उन्हें जलती हुई आग के पास सिर्फ पानी की बूंदे देखने को मिलीं। सहेलियों ने काफी दूर तक जंगल में दौड़ लगाकर गुड़िया को ढूँढ़ा। वे पहले सोच रहे थे कि गुड़िया कहीं खेल रही होगी और कहीं छिप गयी होगी। पर बाद में पता चला कि वह गायब हो गयी है। बुढ़िया को जब यह पता चला तो वह जोर-जोर से रोने लगी। जब सब लोगों को सारी बात समझ में आयी कि बर्फीली गुड़िया आग के ऊपर से कूदते समय ही पिघल गयी है। वह एक सफेद बादल बन गयी और खुश होकर आसमान में उड़ गयी। वह अभी भी खिलखिलाती हुई बर्फीली गुड़िया के रूप में बसी हुई है। वहीं आसमानी आँखों वाली, गुलाबी गालों वाली लाल ओंठ और सुंदर आकार वाली। बर्फीली गुड़िया।


पीछे जाएँ
51
52
54
आगे जाएँ


हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता