हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-54

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सुहाग

सुराजिनी दिसानायक (श्रीलंका)
कक्षा-400


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'सुहाग' का अर्थ सौभाग्यवती है। स्त्री की वह स्थिति जब उसका पति जीवित रहता है। पत्नी अपने पति को अपना सुहाग मानती है। पत्नी का सौभाग्य उसके पति से माना जाता है। पत्नी का पति ही उसका सुहाग है। पति जीवित होने पर ही उसके सुहाग की रक्षा होती है। शादी जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके आधार पर मनुष्य अच्छी तरह से जीवन यापन करता है। उसके जीवन में एक खुशी की बहार आ जाती है और ज़िंदगी भर पति-पत्नी एक दूसरे का सहयोग करते हैं। सारे संसार की नज़र में वह जोड़ा पति-पत्नी के रूप में पहचाना जाता है और पत्नी, पति के जीवन की बहुत ही महत्वाकांक्षी अंग बन जाती है। उसके हर सुख-दु:ख में साथ देती है। पति के हर कष्ट को पानी की तरह पी लेती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। उदाहरण के लिए जब राम के पिताजी ने वचन पूरा करने के लिए राम को चौदह वर्ष का वनवास दिया था, तब भी राम की पत्नी सीता ने राम का हर घड़ी में साथ दिया और राम के साथ वनवास में चौदह वर्ष गुज़ारे।

हर पति की ख्वाहिश होती है कि उसकी पत्नी उसके जीवन को नया मोड़ दे, वह सुख-दु:ख में उसका साथ दे। उसके लिए हर कार्य पूरा करे। पत्नी पति के जीवन का अहम हिस्सा है। पत्नी का पति की अनुमति के बिना कोई काम पूरा नहीं होता है। पत्नी ही पति के महत्वपूर्ण पहलुओं को समझ सकती है। पत्नी ही पति की जिंदगी भर सेवा करती है और पति भी पत्नी के लिए सब कुछ करता है। पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिए करवाचौथ का व्रत रखती है, वह पूरा दिन भूखी रहती है। पानी तक नहीं पीती। क्योंकि पत्नी अपने पति की देवता की तरह पूजा करती है। करवाचौथ के दिन अपने पति के सूरत चलनी में देखकर अपना व्रत तोड़ती है, और पति के पाँव छूकर आशीर्वाद लेती है। उस दिन पति उसे अपने हाथों से खाना खिलाता है। पति-पत्नी जीवन की एक डोर में बंधे रहते हैं। पति अपने पत्नी से संतान की आशा करता है। पत्नी भी संतान का पालन पोषण करती है और पति के वंश को आगे बढ़ाती है।

विवाह एक पवित्र और अटूट विधान है जो सात जन्मों का बंधन है, दिल का मिलन है, क्योंकि पत्नी अपने पति को परमेश्वर मानती है, देवता मानती है साथ ही साथ देवी बन जाती है। उसका दांपत्य जीवन स्वर्ग जैसा होता है। पत्नी का पूरा अधिकार पति के हाथों मे होता है। पत्नी हमेशा पति के ऊपर निर्भर रहती है। पर आधुनिक समाज में कुछ पति अपने वैवाहिक जीवन को समझौता समझते हैं। ऐसे वैवाहिक पति नहीं जानते कि वैवाहिक जीवन में उन्होंने संसार में एक साथ चलने का वचन ले लिया है। पत्नी हमेशा अपने पति को साँसों का निगाहों का, वादों, विश्वासों का बंधन मानती है।

शादी के बाद पति-पत्नी का प्रेम, विश्वास, स्नेह बढ़ता जाता है। पत्नी अपने पति की आँखों से दुनिया देखने लगती है और उसकी ही आवाज़ पत्नी को हमेशा सही रास्ता दिखाती है। अपने पति से आगे जाकर एक भी कदम नहीं उठाती और इतना आदर करती है कि उसके सामने तेज़ आवाज़ में बात नहीं करती। पत्नी की मनोहर वस्तु बनने की आशा नहीं, गृहस्थ तपोवन में संयम, सेवा और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है। इसलिए कहा जाता है कि प्रेम पुरुष के लिए जीवन का एक कोना भर है, जबकि स्त्री के लिए पूरा जीवन है। इसी भाँति हर गृहस्थी एक छोटी सी जेल बन जाती है और सुहाग एक ऐसा सुंदर बंधन है, जिसमें प्रेम के साथ गुस्सा, भय के साथ आत्मविश्वास तथा संघर्ष के साथ लगाव भी लिपटा रहता है। अन्य संबंधों की तुलना में पति-पत्नी का संबंध जितना ज़्यादा आनंदपूर्ण है, उतना ही जटिल है।

पति भी अपना सारा जीवन पत्नी के लिए व्यतीत करता है। हर हालत में पत्नी के ऊपर मेहरबान रहता है और उसकी परवाह अपने से बढ़कर करता है। उसकी देख-भाल ज़िंदगी भर करता है। कभी पति अपनी पत्नी का घनिष्ठ दोस्त बन जाता है तो, कभी-कभी उसके पिता की भूमिका निभाता है और कभी बड़े भाई की तरह उपदेश देता है, सुरक्षा करता है।

हर पत्नी अपने सौभाग्य की कामना करती है। पत्नी का सौभाग्य, कल्याण, भविष्य, उसका सोलह श्रृंगार, ईमान, शान, मान अपने पति से होता है। पत्नी केवल अपने पति से स्नेह और सहारे की आशा करती है। जैसे वृक्ष के सहारे से लता चढ़ती है और वही उसका एकमात्र सहारा होता है। पत्नी के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि वह सब कुछ सहन कर सकती है, भूख, गरीबी, फटे-पुराने कपड़े अगर उसके साथ अपने पति का सहारा है या पति उसके साथ जीवित रहता है। पति के सान्निध्य में रहकर उसे अपनी गरीबी का अहसास भी नहीं होता। क्योंकि पति के सहयोग से वह भूख, प्यास, गर्मी, सर्दी, गरीबी, निन्दा, उपेक्षा सहन करती है पत्नी का आदर्श पति होता है। सुख, दु:ख विपरीत परिस्थितियों में वे एक दूसरे का सहारा पति-पत्नी होते हैं।

सदा सुहागन बने रहना हर पत्नी की इच्छा होती है। इसलिए पत्नी दरवाजे पर खड़े रहकर अपने पति को बाहर जाते हुए देखती है और मन ही मन भीतर से उसके लिए प्रार्थना करती है कि "ईश्वर उसके सुहाग की रक्षा करे।"



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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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