हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-55

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मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा

सुराजिनी दिसानायक (श्रीलंका)
कक्षा-400


मैंने अपने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे भारत आने का सौभाग्य प्राप्त होगा। मुझे भारत आने का सुनहरा मौका मिला है। जो मन में छोटा सा सपना था वह सच हो गया। जिस तरह सोचा वैसा ही हुआ। जो मेरे कल्पना में बसा हुआ था, वह भारत न केवल आँखों से बल्कि दिल से देख रही हूँ और मुझे यकीन हो जाता है कि कायनात में सबसे महत्वपूर्ण सुन्दर भारतीय संस्कृति है। जितना मुझे अपने देश से लगाव है उतना ही मुझे भारत से भी है।

पढ़ाई का आखिरी समय चल रहा है। गर्मी का मौसम, बसंत ऋतु शुरू हुई है। जिस देश की संस्कृति, प्रकृति से इतना प्यार करती हूँ, उसे छोड़कर, मन ही मन में यादे लेकर जाने का वक्त आ गया है। इसलिए इस यात्रा की कहानी कहना कठिन है, क्योंकि मानसिक हलचल अनुभव करती हूँ। मगर मन से जिस देश को देखा है, आत्मा से अपनाया है, उसकी कहानी कहे बिना वापस लौट के जा ही नहीं सकती। कहते हैं कि मनुष्य की अव्यक्त भावनाएँ, अव्यक्त इच्छाएँ सपना बन जाती हैं, नहीं... नहीं यह कहानी मेरे लिए हकीकत है, सपना नहीं है।

भारत जैसा देश पूरे संसार में नहीं है। क्योंकि यहाँ बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी सम्मान के पात्र हैं। बुज़र्गों की इज़्जत करना यहाँ की सबसे महत्वपूर्ण संस्कृति है। जिसके अनुसार हमारे अंदर भी परिवर्तन आया है। नवउपनिवेशवाद, आधुनिक शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान पूरे विश्व की भाँति यहाँ भी आंदोलन पैदा करती है। परन्तु, कभी उस आँधी में भारतीय संस्कृति नहीं डूब सकती। सबसे बड़ी बात यह है कि जितना ही सांस्कृतिक परिवर्तन होता है उतना ही यह सुंदर संस्कृति शक्तिशाली हो जाती है, और परंपराएँ, प्रथाएँ आगे बढ़ती है। यहाँ गुरु को भगवान के बराबर मानते हैं। जिस तरह संत कबीर जी के दोहे में गुरु का आदर किया गया है उसी तरह गुरु का सम्मान सत्कार करना आँखों से देखा है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं है कि भारत की संस्कृति सबसे पवित्र है। क्योंकि हर रिश्ते में प्यार झलकता है और जिस रिश्ते में प्यार की, स्नेह की पवित्रता नहीं होती, वह नहीं माना जाता। इसलिए भारत को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। भारत एक ऐसे जवानों का देश है, जहाँ जब देश की इज़्जत को कोई ललकारता है तो यहाँ का बच्चा भी अपने देश पर न्यौछावर हो जाता है। मुझे ये अनुभव हुआ है कि यहाँ के देशवासी अपनी मातृभूमि से जान से भी ज़्यादा प्रेम करते हैं। यह कहना अनिवार्य हो जाता है कि अनुशासन ही देश को महान बनाता है।

मैं भी अपने आपको भारत का ही नागरिक मानती हूँ। क्योंकि मैं अपने देश की तुलना भारत से करती हूँ। केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर ही जानती थी कि श्री लंकाई और भारतीय संस्कृति में कोई अंतर नहीं है। सांस्कृतिक समानताएँ अधिक हैं। अब मैं अनुभव कर रही हूँ कि ये बात सच है जो मैंने पहले सुनी है। मुझे लगता है कि एक ही देश है, पर नाम के अनुसार बदल गया है। मैं अपने देश से दूर नहीं हूँ। न केवल यहाँ लोग बल्कि प्रकृति भी मुझसे कहती है कि "तुम विदेशी नहीं हो, आओ हम एक साथ रहेंगे।" मेरी धरती पर जो खुशबू आती थी मुझे, वही खुशबू यहाँ से भी आती है वही हवा, वही शाम सवेरा, वही रंगीला मौसम, वही मिट्टी धूल महसूस होती है। यहाँ के गेहूँ के खेत जो हवा से बातें करते हैं हरे-भरे सरसों के खेत, विशालकाय वृक्ष भी अपनी प्यार भरी सरसराहट के साथ मेरा स्वागत करते हैं। तभी मुझे लगता है कि यह मेरा देश है।

गंदा है शहर पर लोगों के दिल में नहीं है ज़हर मुझे विश्वास है कि आगरा तो सारे शहरों में सबसे अच्छा है। यह भी कहना गलत नहीं है प्रशासनिक कारणों के अलावा यहाँ सब कुछ अच्छा है। मैंने सुना है और सुनती रहती हूँ कि बड़े-बड़े शहरों के कई लोग लापरवाही से आगरा की बुराई करते हैं, मुझे लगता है कि यह बात जो मेरे अंतर्मन को मथ रही है, जो मुझे यह लिखने को मज़बूर कर रही है। क्योंकि मैंने अनुभव किया है कि आगरे की सुगंध सड़क पर नहीं यहाँ के लोगों की मानवीयता में, भाईचारे में बसी हुई है। यहाँ बाहर से आने वाले लोग भी कुछ ही दिनों में अपने आपको आगरा का ही समझने लगते हैं। क्योंकि यहाँ के लोगों के दिल में बहुत मिठास है, और कोई भी अपने आपको अजनबी नहीं समझ सकता। यहाँ के लोग दिल ही दिल से अतिथि सत्कार सम्मान करते हैं और मेहमान को भगवान मानते हैं।

मेरे विचार से आगरे के लोग काफी खुशनसीब हैं। क्योंकि यहाँ के लोगों के दिल में ईर्ष्या, घृणा, क्रोध नहीं है। सब लोग मददगार हैं। एक दूसरे की बहुत सहायता करते हैं। आपस में भाईचारा स्नेह, प्यार से जीवन बिताते हैं। मैंने यहाँ से बहुत कुछ सीखा है। काफी लोग कहते हैं कि यहाँ बहुत अनपढ़ लोग हैं। मगर मैंने यहाँ अनुभव किया है कि ये लोग अनपढ़ होते हुए भी पढ़े लिखे से बढ़कर हैं, समझदार हैं। उन्होंने जीने की कला सीखी है और हमें सिखाई है कि ‘बड़प्पन अमीरी में नहीं, ईमानदारी और सज्जनता में ही सन्निहित है। आगरा एक ऐसा शहर है जिसमें न केवल किसान मजदूर के परिश्रम का पसीना बल्कि सुशिक्षित महान् विद्वानों को हिन्दी में योगदान आज भी विराजमान है।

एक माँ गरीब़ी से जूझते हुए अपने बच्चों का पेट पालती है तो उसका बच्चा काफी हष्टपुट रहता है। यहाँ मिट्टी धूल में खेलते-खेलते जो बच्चा जीता है, दिन-पर दिन बड़ा होता जाता है वह जानता है कि मेरी माँ कितने प्यार से हमारे लिए रोटी बनाती है खिलाती है और रोज़ी-रोटी के लिए उसके पापा कितनी मेहनत करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि मजदूर, किसान लोग जिन्होंने कभी स्कूल, कॉलेज के दर्शन नहीं किये फिर भी उन्होंने जीवन का पाठ पढ़ा है। जीवन का यथार्थ सीख लिया है। उनमें दूसरों की भलाई करने की क्षमता है।



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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता