हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-59

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थ्रेशन लोग

रोसित्सा (बुल्गारिया)
कक्षा-300


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थ्रेशन लोग विभिन्न भारतीय-यूरोपीय जातियों से बने समुदाय के सदस्य थे, जो मुख्य रूप से दक्षिणी-पूर्वी यूरोप में रहते थे। पुरात्वविद् अनुमान लगाते हैं कि कुछ आदि थ्रेशन लोग लगभग 1500 साल ईसा पूर्व बॉल्कन प्रायद्वीप में बस गए और स्थानीय निवासियों से मिलकर-जुलकर उन्होंने अलग-अलग थ्रेशन जातियों को उत्पन्न किया। बल्गारियन भाषा में थ्रैस को त्राकिया बोला जाता है।

त्राकिया का अधिकतर भाग आजकल के बल्गेरिया, यूनान और तुर्की में पड़ता है। पहली बार थ्रेशन लोगों का नाम होमर के इलियट में लिया जाता है। होमर ने कहा कि थ्रेशन लोग त्रोजनों के पक्ष में युद्ध करते थे। हेरेदोतस ने लिखा है कि भारतीय लोगों के बाद सबसे बहुसंख्यक थ्रेशन लोग हैं। बॉल्कन प्रायद्वीप पर रहने वाली थ्रेशन जातियों की ऐसी एकता नहीं थी जो यूनानी नगरों में रहने वालों की एक विशेषता थी। तथापि 5 शताब्दी ईसा पूर्व के करीब कई प्रबल और प्रभावशाली राज्य अस्तित्व में आए। उदाहरण के लिए ओद्रिसों के राजा तेरेस ने कई जातियों पर शासन करके एक मज़बूत राज्य की स्थापना की। बाद में यूनान के प्रसिद्ध नेता फ़िलिप और सिकन्दर ने त्राकिया पर आक्रमण किया और उसे बहुजातीय साम्राज्यों से जोड़ दिया। सन 46 ईसवी में लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई के बाद त्राकिया रोमन साम्राज्य का एक प्रांत बना। थ्रेशन लोग लड़ने में बड़ी कुशलता और हिम्मत दिखाते थे और इसी कारण उन्होंने पेशवर लड़ाकों (ग्लेडिएतर) के रूप में बड़ा यश कमाया। 46 शताब्दी ईसवी को हुन, गोथ, स्लाव आदि जातियों द्वारा बार-बार किए गए आक्रमणों ने थ्रेशन लोगों की संख्या, भाषा और सांस्कृतिक प्रभाव को घटा दिया। बॉल्कन प्रायद्वीप पर आदि बल्गेरियन जाति (Proto Bularians) का निवास होने के साथ और बल्गेरिया राष्ट्र की स्थापना हुई। जिसमें थ्रेशन, स्लाव आदि बल्गेरियन लोगों के साथ-साथ नये बल्गेरियन भी थे।

त्राकिया के पहाड़ों में पशुपालन होता था तथा खेतों और घाटियों में अधिकतर लोग खेतीबाड़ी करते थे। इनके समाज में अंगूर की उपज का महत्व उल्लेखनीय है, क्योंकि अंगूर से बनी हुई शराब को थ्रेशन लोग महत्वपूर्ण मानते थे। त्राकिया के घरों में पुरुष सच्चे अर्थों में गृहस्वामी और एक बहुपत्नी परिवार का मालिक होता था। महिलाएँ कोई अधिकार नहीं रखती थीं और उनको घर पर और खेत पर भारी काम करना पड़ता था। पुरुष साधारणत: अपनी पत्नियाँ उनके माता-पिता से खरीदते थे।

थ्रेशन लोग युद्ध को एक सम्मानीय काम समझते थे। वे सब युद्धप्रिय जातियों में से एक मानी जाती थी, जिस कारण पूरे प्राचीन काल में विदेशी सेनाओं के लिए त्राकिया भाड़े के सैनिकों का एक स्त्रोत था। यूनान और रोम के बाशिन्दे थ्रेशन लोगों को बर्बर समझते थे और सचमुच युद्ध उनके जीवन का हमेशा साथी था। तथापि वे अच्छे व्यापारी और शिल्पकार भी थे। बल्गेरिया के क्षेत्र में की गई पुरातात्विक खुदाइयों के बाद अनेक समाधियाँ और दफन टीले (burial mounds) निकाले गए थे, जिनमें सोने और चाँदी के बने हुए बर्तन और गहने बरामद हुए।

पुराने ज़माने में शराब एक पवित्र पेय पदार्थ माना जाता था। शुरू में शराब केवल अनुष्ठान विषयक स्थितियों में पी जाती थी। शराब में मानवीय "आत्मा" बदलने की क्षमता है, जो पुराने लोग एक दैवी हस्तक्षेप समझते थे। वे मानते थे कि शराब स्वयं ईश्वर था जो मनुष्य में प्रवेश करता है और निकली हुई आत्मा की जगह पर आता है। उसके अलावा शराब बनाने की यह लंबी और जटिल प्रौद्योगिकी शराब को "संस्कृति" का लेबिल लगाती है। पुराने लोगों के लिए जानवर और मनुष्य में यह बड़ा अंतर था कि मनुष्य अपने काम का फल खाता है। जानवर कच्चे फल, मेवा आदि खाते हैं और पानी पीते हैं परंतु जो मानव है, वह रोटी खाता है और शराब पीता है। क्योंकि ये दो चीज़े आग द्वारा पकायी हुई हैं और पकाने की इस प्रक्रिया ने उनसे सभ्यता के उत्पादन बनाए हैं। यूनानी लोग थ्रेशन को इसलिए बर्बर मानते थे, क्योंकि वे शुद्ध शराब पीते थे। यूनान में शराब हमेशा पानी में मिलाई जाती थी और वहाँ के लोगों के अनुसार शुद्ध शराब विष था। पर त्राकिया के लोगों के लिए शराब पीना अक्सर प्रतियोगिता के रूप में होता था। इसका अर्थ यह था कि शराब पीना पुरुषार्थ का परीक्षण था और असली वीर होने के लिए पुरुष को युद्ध और मेज़ पर दोनों स्थितियों में साहस प्रदर्शन करना चाहिए था। यूनानी लेखकों ने थ्रेशन धर्म का वर्णन किया है। वे कहते हैं कि इस धर्म में कई जटिल पूजा करने की विधियाँ थीं और पुजारी भिन्न-भिन्न गाने गाते थे पर उनको लिखते नहीं थे। उनमें बहुत-से देवताओं के नाम लिए जाते थे और उनमें से कई देवता यूनानी धर्म में आए बेन्दिस, दियोनिसस और निके ऐसे देवता थे।

त्राकिया में ‘थ्रेशन घुड़सवार’ की प्रतिमा बहुत प्रसारित है। उसका थ्रेशन नाम हेरोस काराबाज़्मोस था और साधारणत: वह दफ़न के टीलों के चित्रों पर घुड़सवार के रूप में चित्रित है, जो एक पशु को बरछी से मार डालता है। बाद में ईसाई काल में वह एक ईसाई साधु बन गया, जिसका नाम जार्ज एंड द ड्रेगण। थ्रेशन लोग बहुसंख्यक और शक्तिशाली जातियाँ थीं, पर राजनैतिक एकता के बिना वे विदेशी आक्रमणों का शिकार बन गईं। तथापि संस्कृति ने यूनानों और रोमनों पर इतना प्रभाव डाला कि उन्होंने कई त्राकिया में पैदा हुए देवताओं और धार्मिक रिवाज़ों को अपनाया।


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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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सुस्वागतम्
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