हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-63

ज्ञानकोश से
यहां जाएं: भ्रमण, खोज


Galena.jpg

बाल्कन देशों का खान-पान

गालेना त्स्वेत्कोवा (बुल्गारिया)
कक्षा-300


भारतीय खाना कितना सुगन्धित और स्वादिष्ट है, मुझे भारत में आने से पहले ही पता था। परन्तु इसके बारे में सोचा तक नहीं कि भारत में मुझे वह सब प्रिय खाना नहीं मिलेगा, जो मैं अपने देश में बड़ी प्रसन्नता से खाती हूँ। मैं काफी बार बुल्गारिया से बाहर गई हूँ, बाल्कन के अनेक देशों में घूमने गई हूँ और सभी जगहों पर मैंने वही खाया, जो घर पर भी खाती हूँ। यह इसलिए संभव है, क्योंकि बाल्कन में सभी देशों के खान-पान मिलते-जुलते हैं। यह निबन्ध इस मनोरंजक तथ्य के ऊपर प्रकाश डालता है– कई उदाहरण दिखाता है और उसके मुख्य कारण समझाने का विनीत प्रयास करता है।

बाल्कन प्रायद्वीप एक भौगोलिक क्षेत्र है जो दक्षिण पूर्वी यूरोप में पड़ता है। इसमें बहुत सारे देश शामिल हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसका क्षेत्रफल बड़ा है। वास्तव में वह 5,50,000 वर्ग मीटर में फैला है और उसकी जनसंख्या भी ज़्यादा नहीं– साढ़े 5 करोड़ के करीब है। यानि जनसंख्या की दृष्टि से बाल्कन लगभग राजस्थान के बराबर है और उसका क्षेत्रफल राजस्थान और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों के समान है। "बाल्कन" शब्द दोनों भौगोलिक और ऐतिहासिक क्षेत्रों का नाम है। पूरी तरह बाल्कन प्रायद्वीप में न होते हुए भी इतिहास की दृष्टि से रोमानिया और तुर्की बाल्कन देश माने जाते हैं।

भूगोल और इतिहास की दृष्टि से बाल्कन क्षेत्र के देशों का गहरा सम्बन्ध है। दुनिया के इस हिस्से में स्थित देशों की हवा-पानी में कोई बड़ा अंतर नहीं है। सभी देशों में बसंत, ग्रीष्म, पतझड़ तथा शीतकाल– 4 ऋतुएँ हैं और फसल एक ही बार होती है। पेड़-पोधे और फ़सलें जिनको लोग खेतों में उगाते हैं और खाने में प्रयोग करते हैं, वे एक ही हैं। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि ये देश पास-पास स्थित हैं और जो चीज एक स्थान पर नहीं मिलती है, वह व्यापार द्वारा दूसरे स्थान से वहाँ पहुँचाई जा सकती है। बाल्कन के सारे देश कई शताब्दियों तक उस्मानी साम्राज्य का अंग थे। जैसे कि भारत में मुगलों के आने से सांस्कृतिक स्तर पर संयोजन की प्रक्रिया शुरू हो गई और उसके परिणाम आज भी भाषा, पहनावा, वास्तुकला आदि में देखे जा सकते हैं। उसी प्रकार उस्मानियों के बाल्कन प्रायद्वीप में आने से एक सम्मिलन की प्रक्रिया शुरू हो गई। उस्मानी साम्राज्य पश्चिमी तथा पूर्वी सभ्यताओं के लिए विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक सेतु की तरह था। अभी देखें कि खान-पान को लेकर यह साम्राज्य बाल्कन देशों के खाने पर क्या प्रभाव डालता है।

Image-63a.jpg
सामान्य व्यंजनों के कुछ उदाहरण– भोजन का वर्णन करते हुए व्यंजनों के बल्गारियन नाम दिये गए हैं। जहाँ तक संभव है दूसरे देशों में प्रयोग किए जाने वाले उन पकवानों के नामों का भी उल्लेख किया गया है।
Image-63b.jpg
Image-63c.jpg

सलाद, स्नेजांका– बल्गारिया में इस सलाद का नाम "स्नेजांका" यानी "Snow White" इसलिए रखा गया है क्योंकि वह सफेद रंग का है। यह थोड़ा-बहुत रायते के समान है। उसमें हम गाढ़ी दही, खीरा, लहसुन, अखरोट एवं शतपुष्प डालते हैं। तुर्की और यूनान में इस सलाद में कभी-कभी पानी भी डालते हैं और इसको जाजक या त्सत्सीकि कहते हैं।

सूप

श्केम्बे चोर्बा– इस शोरबा ने अपना नाम फारसी भाषा से लिया है। मिर्च, प्याज़ आदि सब्जियों को तलकर उनको पशु की आंत के साथ उबालते हैं। यह शोरबा तुर्की, यूनान, बल्गारिया, सार्बिया और रोमानिया के लोगों को पसन्द है और किंवदंती के अनुसार यह खुमार का इलाज है।

तरतोर– बल्गारिया में तरतोर गर्मियों के समय सबसे लोकप्रिय शोरबा है। वह स्नेजांका सलाद से मिलता-जुलता है, लेकिन इसमें ज़्यादा पानी होता है। उसमें अखरोट भी डालते है। तरतोर की ताज़गी से अल्बानिया, सार्बिया, मेसेडोनिया, बल्गारिया, यूनान, तुर्की और आर्मेनिया तथा ईरान के लोग परिचित हैं।[1]


पीछे जाएँ
62
63
64
आगे जाएँ


हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73

टीका टिप्पणी

  1. उसमानी साम्राज्य सन 1299 में स्थापित हुआ और सन 1923 तक अस्तित्व में रहा। सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में अपने चरम शक्ति पर जब था, वह दक्षिण-पूर्वी यूरोप, मध्य-पूर्व एशिया और उत्तरी अफ्रीका पर विस्तृत था।
वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता