हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-65

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रोमन लिपि

काया ब्रिक्स (पोलैंड)
कक्षा-100
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भारत में बहुत सी भाषाएँ बोली जाती हैं और वे अलग-अलग लिपियों के द्वारा लिखि जाती हैं। यूरोप में भी अनेक भाषाओं के बोलने वाले लोग रहते हैं, परंतु भारत के विपरित वहाँ सिर्फ़ तीन तरह की लिपि प्रयोग की जाती है। उन तीन लिपियों में से यूनानी लिपि को यूनानी लोग और कुछ साइप्रसवासी इस्तेमाल करते हैं, दूसरी– सिरिलिक लिपि को पूर्वी और दक्षिणी स्लावनिक लोग इस्तेमाल करते हैं और तीसरी रोमन लिपि को ज़्यादातर यूरोपीय देशों के निवासी इस्तेमाल करते हैं। यूरोपीय संघ के अधिकारिक एवं कार्यकारी भाषाएँ तेईस हैं तथा उनमें से इक्कीस भाषाएँ रोमन लिपि द्वारा लिखि जाती हैं। यह यूरोप की लिपियों की दशा है। पर रोमन लिपि को न सिर्फ यूरोपीय लोग प्रयोग करते हैं बल्कि छह महाद्वीपों के निवासी उसे जानते हैं और उसके द्वारा लगभग अस्सी भाषाएँ लिखी जाती हैं। वास्तव में रोमन लिपि विश्व में सबसे अधिक प्रयुक्त लिपि है।

रोमन लिपि लातिनी भाषा की अपनी थी और उसकी वर्णमाला में सबसे पहले केवल उन्नीस वर्ण होते थे, जैसे– A(आ), B(ब), C(क्, ग्), D(द्), E(ए), F(फ्), H(ह्), I(ई, य्), L(ल्), M(म्), N(न्), O(ओ), P(प्), Q(क्व्), R(र्), S(स्), T(त्), V(ऊ, व्), X(क्स्)। आज से लगभग दो हज़ार साल पहले, जब रोमन साम्राज्य सबसे शक्तिशाली था, तब लातिनी भाषा आधे यूरोप में बोली जाती थी। उस समय में वर्णमाला में तेईस वर्ण थे। आगत ध्वनियाँ जो यूनानी शब्दों को लिखने के लिए जरूरी थीं K(क्), Z(ज़्), और Y(एक विशेष स्वर) प्रयोग में लाई गईं और ‘ग्’ के लिए एक नया वर्ण G-बनाया हुआ। बाद में, मध्य युग में एक गाथ (Goth) ध्वनि के लिए W वर्ण तथा लगभग सोलहवीं शताब्दी में U स्वर ‘ऊ’ के लिए और ग् व्यंजन ‘य्’ के लिए प्रयोग में लाया गया।

यूरोप में लातिनी भाषा अठारवीं शताब्दी तक मुख्य अंतर्राष्ट्रीय भाषा थी और छब्बीस वर्ण की वर्णमाला उस समय लातिनी में लिखने के लिए इस्तेमाल की जाती थी। लातिनी के अलावा यूरोपीय लोग अन्य भाषाएँ भी बोलते थे, किंतु उनके लिए कुछ समय तक कोई लिपि नहीं थी। उनको लिखने के लिए रोमन लिपि का प्रयोग करने लगे उच्चारण में अलग-अलग प्रकार पैदा हुए। कभी-कभी नई ध्वनियों के लिए नए वर्ण भी प्रयोग में लाए जाते थे। अलग होकर भी वे सब एक ही लिपि के प्रकार हैं और बहुत ज़्यादा अंतर उनमें नहीं है। इसलिए लिपि के एक प्रकार को जान लेने के बाद दूसरे रूप को समझने के लिए उसके अंतर के बारे में जानना काफ़ी है।

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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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