हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 पृ-8

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सिंहली लोक साहित्य

विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि (श्री लंका)
कक्षा-400


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श्री लंका के लोक-समाज में जो साहित्य उपलब्ध है, वह "सिंहली लोक साहित्य" कहलाता है। सिंहली में 'लोक साहित्य' को 'जन साहित्य' कहा जाता है।

श्री लंका में सिंहल लोगों के अतिरिक्त देश के आदिवासी समुदाय के रूप में ख्यात 'वॉदि' और 'रॉडी' जातियों और तमिल, मुसलमान, बर्गर आदि विभिन्न विदेशी जातियों के लोग भी निवास करते हैं। इन जातियों में भी किसी-न-किसी रूप में लोक साहित्य रहा होगा तथा इस लोक साहित्य का प्रभाव सिंहली लोक साहित्य पर पड़ना स्वाभाविक है।

सिंहली लोक साहित्य की उत्पत्ति के बारे में कोई प्रमाण प्राप्त नहीं किया जा सकता है, पंरतु प्राचीन शिला लेखों में नया 'सींगरि गीत' (सीगरि नामक पर्वत पर लिखे गये गीत) में लोक साहित्य का लक्षण दिखाई देता है। हिन्दी लोक साहित्य में लोक गीत, लोक कथा, लोक गाथा, लोक नाट्य और लोक सुभाषित वचन आदि जो विद्याएँ होती हैं, वे सभी विद्याएँ सिंहली लोक साहित्य में भी मिलती हैं।

समाज अथवा प्रदेश के अनुसार लोक साहित्य में थोड़ा परिवर्तन हो सकता है। प्रदेश के अनुसार सिंहली लोक-साहित्य की विधाओं में भी अंतर अवश्य दिखाई देता है। किंतु समय के परिवर्तन के साथ-साथ समस्त जनता का लोक साहित्य बन जाता है। उदाहरण के लिए 'तहंचि कवि' नामक सिंहली लोक गीत विशेषत: पहले सिर्फ श्रीलंका में 'उडरट' नामक देश के मध्य भाग के लोगों के बीच में ही प्रचलित था, परंतु कालानुरूप 'तहंचि कवि' देश के सारे लोगों के बीच में बहुश्रुत एवं प्रचलित हो गये। बहुत सी समकालीन लोकोक्तियाँ और मुहावरे भी ऐसे हैं। राजनीति और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न प्रदेशों में उत्पन्न हुई लोकोक्तियाँ कालानुरूप हर जगह प्रचलित हो जाती हैं।

हिंदी लोक साहित्य की तरह सिंहली लोक-साहित्य भी धार्मिक भावनाओं से प्रेरित है। बौद्ध धर्म के साथ-साथ हिन्दू धर्म का प्रभाव भी अवश्य रहता है। विशेषत: लोक गीत, लोक कथा और लोक नाट्य में धार्मिक झाँकी मिलती है।

सिंहली साहित्य के श्रेष्ठ लेखक मार्टिन विक्रम सिंह ने अपनी 'सम्प्रदाय हा विचारय' पुस्तक में सिंहली लोक साहित्य के बारे में निम्न प्रकार विचार प्रकट किए हैं-

'लोक-भाषा व्यवहार करने वाले लोक साहित्य का क्षेत्र हमारे लिए सीमित नहीं होना चाहिए। अभी तक सिंहली लोक साहित्य की उत्तम सम्पत्ति अत्यंत ग्रामीण लोग ही हैं। इसलिए मेरे विचार से लोक साहित्य वह है, जो दो हजार वर्ष से अधिक काल से वर्तमान समय तक विद्यमान है। सिंहली पद्य, गद्य, लोक कथा, लोक काव्य और समग्र सिंहली साहित्य, सिंहली और सिंहली जाति के रूप में बहुत समय से ही कष्ट सहते हुए शत्रुओं का संकट और लोगों के हर्ष-विषाद, हँसना-रोना आदि सभी बातों को संकुचित करके दिखाने वाली अविच्छिन्न देन है।'

यह कहा जाना भी आवश्यक है कि सिंहली लोक साहित्य के रूप में आजकल जो लोक साहित्य उपलब्ध हैं, इसका लोक समाज के दैनिक जीवन के प्रयोग में कम है। इस कथन का अर्थ यह है कि लोक जीवन से इसका संबंध प्राचीन काल की तरह दृढ़ नहीं है। कभी-कभी केवल मनो-विनोद के लिए था। लोक साहित्य की जानकारी की प्राप्ति के लिए लोग लोक गीत तथा लोक कथा सुनते हैं अथवा सुनाते हैं। परंतु यह भी कहना आवश्यक है कि सिंहली लोकोक्तियाँ और मुहावरे तो आज भी श्री लंका के लोगों के दैनिक जीवन में काम आते हैं, वे हर वक्त इनका प्रयोग कर रहे हैं।


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हिंदी विश्व भारती छात्र पत्रिका-2011 अनुक्रम
लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
हिन्दी लोक-नाटक तक्षिला मेंडिस 6:1
मेरा जन्म दिन बोल्द 6:2
होरी और मृत्यु... तक्षिला मेन्डिस 7:1
कैसे छोडूँ? 7:2
सिंहली लोक साहित्य विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 8
प्यार का गुलशन आदम 9:1
ऋणी हूँ मैं विसाला दनंजनी मल्लव आरच्चि 9:2
मेरा तुर्कमेनिस्तान आगान्थाजोवा शैकेर 10:1
देना: सबसे बड़ा सुख आगान्थाजोवा शैकेर 10:2
आइये चलें, ट्रिनिडाड और टुबेगो.....! वासुदेव 11
रूस में क्रिसमस वाल्या पोगोदीना 12
हमारी अपेक्षा..... अदुम इद्रीस अदुम 13
मधुरानी (अनुवादित रचना) तुरेब अबूज़र 14:1
ताजिकी (मूल रचना) जोनी शिरीन 14:2
भारत और श्रीलंका का अटूट रिश्ता के.वी.जे. कोषली 15:1
मैं चला जाता हूँ 15:2
गरीब साजन 15:3
मंगोलिया उंदरमा 16
मेरी यात्रा बेसुजीन 17
मेरी जिंदगी में भारत उमीदा 18
क्षणिकाएँ.... उमीदा 19:1
जापान की कथा यूकी तामागावा 19:2
चाड को जानिए नूर ब्राहीम 20
रूसी साहित्य अन्ना स्तेपानोवा और वाल्या पोगोदीना 21
सिरिलिक लिपिक याना यार्वोस्काया 22:1
जाना है मुझे कौशल्या समली 22:2
शोध क्या है? कौशल्या समली 23
म्याँमार (बर्मा) में भारतीयों की स्थित : कल और आज राकेश 24
हैदर अलीयेव मिरज़ायेवा साईदा 25
म्याँमार देश (बर्मा) के प्रमुख सांस्कृतिक त्यौहार राकेश 26
मेरा शहर उलानबाथर नारनतुया 27
अर्मेनिया मनात्साकानयान नारिने 28
तुम्हारी दोषी हूँ मनात्साकानयान नारिने 29
हंगरी को पहचानिए बैआता यकुशोब्स्कि 30
राजा मात्यारा और बूढ़ा आदमी बैआता यकुशोब्स्कि 31
मेरी भारत यात्रा वितावात रेक्ताविलजय 32:1
मेरा देश वितावात रेक्ताविलजय) 32:2
मेरी गोवा यात्रा अलगिरमा 33:1
मैं और भारत ओन्द्रह 33:2
मेरा देश कोरिया शिनजोंग 34
चीनी ड्रम मंदिग 43
‘मेरी दीवाली’ जंग यांग ए 44
भाषा सीखने का शौक श्रीमती समर बारी 45:1
मेरा देश मिस्त्र श्रीमती समर बारी 45:2
मर्जीशोर के त्योहार रालूका 46
‘श्रीमती देवी’ मिर्चआ ऐलियादे की नज़र में रालूका 47
चीनी नया साल और लाल बसंत चांग लू 48
मुझे तड़पाया-अनुदित रचना मोहम्मद खालिद 49:1
हर चा व जुरावलम पश्तो-मूल रचना मोहम्मद खालिद 49:2
अफगानिस्तान। मोहम्मद खालिद 50
रूसी भाषा वियोलेता 51
बर्फीली गुड़िया (रूसी कहानी) वियोलेता 52
सुहाग सुराजिनी दिसानायक 54
मेरी भारत यात्रा– जीवन की सुहानी यात्रा सुराजिनी दिसानायक 55
कुछ नहीं बदला सुराजिनी दिसानायक 56:1
चलिए, कोई बात नहीं सुराजिनी दिसानायक 56:2
तुर्की भाषा जानान एर्देमीर 57:1
सूर्य की देवी आसूमी तानाका 57:2
हिन्दी प्रेमी–श्रीमती इंद्रा दसनायक इंद्राकुमारी दसनायक 58
थ्रेशन लोग रोसित्सा 59
चालाक पेतर और दो झूठे रोसित्सा 60
मंगोलिया का राष्ट्र ध्वज मुन्ह–एतेनि 61
भाषा सीखना चीका ओगुरी 62
बाल्कन देशों का खान-पान गालेना त्स्वेत्कोवा 63
रोमन लिपि काया ब्रिक्स 65
सूरज सुगन्धि मधुभाषिनी 66:1
दिल का बाग सुगन्धि मधुभाषिनी 66:2
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी शिक्षण विभाग
साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ 67
विभाग के सदस्यों की सूची 69
वार्षिक प्रतिवेदन 70
विभागीय सेमिनार का प्रतिवेदन (सत्र 2010–2011) 71
छात्र सूची 2010-11 73
वैयक्तिक औज़ार

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