अगवानी पृ-36

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उद्वोधन

श्री योगेश्वर वर्मा

श्री योगेश्वर वर्मा
उप महानिदेशक
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली

मुझे बहुत खुशी है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान लगभग पचास साल से विदेशी विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ा रहा है। मैं जब दो हजार छ: से दो हजार नौ तक मंगोलिया में भारत का राजदूत था, तब हमारे पास मंगोलिया के पांच विद्यार्थियों को भेजने के लिए कोटा था। मंगोलिया से पांच छात्र हर साल आते थे और आगरा जाते थे, क्योंकि आगरा में ही उनके रहने का इंतजाम था। उन दिनों कठिनाई हमें होती थी, क्योंकि आगरा से हमारा कम्युनिकेशन नहीं हो पाता था। आजकल तो कहीं भी सम्पर्क हो जाता है।

हिंदी का प्रचार-प्रसार भारतीय दूतावासों में काफी होता रहा है और हो रहा है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की ओर से हम इस पर काफी ध्यान देते हैं। इसे उच्च दर्जे की प्राथमिकता दी जाती है। हमारे यहाँ से चेयर प्रोगाम्स में प्रोफेसर बाहर जाते हैं। अभी पैंसठ चेयर्स अभी हमारे चल रहे हैं। विदेशी के अच्छे विश्वविद्यालयों में तरह-तरह के विषयों में हमारे पाठ्यक्रम चल रहे हैं। इसको हम और बढ़ावा दे रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों से हिंदी, संस्कृत, बंगाली के अतिरिक्त इंडियन इकॉनॉमी, इंडियन पॉलिटिकल साइंस, इंडियन हिस्ट्री, तमाम विषयों की मांग आ रही है। इंडिया स्टडी के नाम पर तो काफी मांग आ रही है। भारत की पिछले आठ-दस सालों में तेजी से तरक्की हुई है, आज भारत एक ऐसे मुकाम पर आ गया है कि लोग जानना चाहते हैं कि भारत इतनी तेजी से तरक्की कैसे कर पा रहा है। एकैउमिक्स में, मीडिया में, जर्नलिज़्म में रुचि बढ़ गई है। विदेशों में खास करके लोग ये जानना चाहते हैं कि एक ऐसा देश जिसमें तरह-तरह की भाषाएँ बोली जाती हैं, आपस में विविधताएँ हैं, फिर भी एक लोकतांत्रिक प्रथा के अंदर इतने जोरदार तरीके से आर्थिक तरक्की कैसे कर रहा है, जहाँ खुशहाली बढ़ती जा रही है।

मुझे बहुत खुशी है कि यहाँ विदेशी विद्यार्थी आए हुए हैं, हिंदी सीख रहे हैं और हिंदी के माध्यम से भारत की संस्कृति को जानने-सीखने की, पहचानने की, अपनाने की उनमें एक रुचि जगी है। इसको हम चाहेंगे और बढ़ाना। भारतीय सांस्कृतिक परिषद की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा। हिंदी को आधुनिक तरीके से आगे बढ़ाने में अशोक चक्रधर जी ने काफी काम किया है, कम्प्यूटराइज करके हिंदी को और आगे बढ़ाया है इन्होंने। विदेशी विद्यार्थियों में हिंदी को विकसित करने का सबसे आसान तरीका है कि आप टेलिविजन पर प्राइम टाइम में 8 से 10-11 बजे तक अच्छे-अच्छे प्रोग्राम्स देखा कीजिए। इनमें जो संवाद होते हैं, गीत होते हैं, उनसे आप बहुत आसानी से सीख सकते हैं। मैं केंद्रीय हिंदी संस्थान को बधाई देता हूँ और निरंतर आगे बढ़ते रहने की शुभकामनाएँ देता हूँ।



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अगवानी स्वर्ण जयंती की
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अगवानी अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. अगवानी आवरण पृष्ठ 1
2. अगवानी स्वर्ण जयंती की 3
3. श्री कपिल सिब्बल संदेश 4
4. एक कविता 5
5. शुभकामना प्रो. अशोक चक्रधर 6
6. संपादकीय प्रो. के. बिजय कुमार 7
7. केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल : एक परिचय 8
8. मुख्यालय एवं केंद्र 10
9. मुख्यालय एवं केन्द्रों की गतिविधियां 14
10. शिक्षण-प्रशिक्षण एवं नवीकरण 18
11. पुरस्कार 19
12. प्रकाशन 20
13. अंतरराष्ट्रीय मानकहिंदी पाठ्यक्रम 21
14. विदेशी भाषा के रूप में हिंदी 22
15. हिंदी कॉर्पोरा परियोजना 24
16. भाषा-साहित्य सीडी निर्माण परियोजना 26
17. हिंदी लोक शब्दकोश 27
18. भव्य झांकियाँ 28
19. संस्थान की गतिविधियाँ 34
20. उद्धोधन 36
21. ज्योतित हो जन-जन का जीवन 37


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