अगवानी पृ-40

ज्ञानकोश से
EditorG (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 18:21, 23 अगस्त 2012का अवतरण

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युवा-शक्ति ही है जो ओबामा को हमारे देश में खींच कर लाई। उन्हें हमारी संस्कृति भी खींच कर लाई। हिंदी की ताकत खींच कर लाई, ओबामा दम्पत्ति हमारे गीतों पर थिरके। ये ताकत हिंदी की है। हमें गीतों के माध्यम से भी हिंदी शिक्षण करना होगा। अपनी रूढ़वादिता से हट कर, थोड़ा सहज करना होगा अपनी हिंदी को। आप जीवन समाज में जाइए, भाषा तालाब का रुका हुआ पानी नहीं है। वह बहता हुआ नीर है। भाषा के बदलते हुए स्वरूप का भी हमें स्वागत करना होगा।
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अधिक भाषाओं के ज्ञान से मैत्री बढ़ती है। एक नई चीज हुई पिछले दिनों। भारत में बड़ी-बड़ी पावर परियोजनाएँ विदेशी सहायता से लगती रही हैं। ऐसा पहली बार हो रहा है कि चीन ने अपने यहाँ पावर जेनेरेटिंग प्लांट लगवाने के लिए हमारे देश की एक बड़ी कम्पनी के साथ करार किया है। अब सोचिए जब चीन में हमारे लोग जाकर संयंत्र लगाएंगे तो वहाँ किस भाषा में बोलेंगे? अगर वे चीनी भाषा सीख जाएं तो निर्माण में कितनी सुविधा हो जाएगी। हमारे संस्थान में इस समय छत्तीस विद्यार्थी हैं जो चीन से हिंदी सीखने आए हैं। और मैं अपने देश में पूछूं कि कितने विद्यार्थी जाते हैं चीन चाइनीज़ सीखने के लिए, मंदारिन सीखने के लिए? उच्च स्तर पर शोध करने वाले लोग हो सकते हैं, लेकिन भाषा सीखने वाले नहीं हैं। यह काम आईसीसीआर की सहायता से हमारे माध्यम से हो सकता है और बहुत अच्छी तरह हो सकता है। हम और कहीं क्यों जाएंगे अपने संस्थान के चीनी छात्रों से कहेंगे कि एक साल और रुक जाएं, आपकी हिंदी और अच्छी हो जाएगी, हमारे देशवासियों को चाइनीज़ सिखाएं। आज चीन से आने वाले, हिंदी सीखने आने वाले छात्रों ने नृत्य-संगीत प्रस्तुत किया। मंदारिन सिखाने में उन्हें निश्चित रूप से आनंद आएगा। और मैं समझता हूँ कि यह आदान-प्रदान ही हमें सच्चा दोस्त बनाएगा। एक नारा था 'हिंदी चीनी भाई-भाई', वह घिस गया। हिंदी चीनी भाई-भाई ही क्यों, हिंदी चीनी बहन-बहन क्यों नहीं? ये बड़ा पुरुषवादी सोच है, मैं इसका विरोध करता हूँ। हिंदी चीनी दोस्त-दोस्त ज़्यादा अच्छा रहेगा।

हिंदी शिक्षण के लिए हम नवीकरण कार्यक्रम चलाते हैं। पारंगत, प्रवीण आदि का प्रावधान है, लेकिन हमारी जानकारी में होना चाहिए कि बहुत सारी संस्थाएँ हैं जो वेबसाइट के माध्यम से हिंदी शिक्षण का कार्य ऑनलाइन कर रही हैं। बहुत सारे विश्वविद्यालय हैं जिन्होंने हिंदी-उर्दू शिक्षण के लिए अपनी वेबसाइट बनाई हैं। हम इन वेबसाइट पर जाएं और देखें कि वहाँ क्या काम हो रहा है। मल्टीमीडिया सहयोग से ऑनलाइन हिंदी शिक्षण लोकप्रिय होता जा रहा है। बहुत सारी वेबसाइट्स की सूची है मेरे पास, जो प्रो. वशिनी शर्मा और प्रतीक जी ने उपलब्ध कराई है। कोई अपनी वेबसाइट पर गीतों से हिंदी सीख रहा है, कोई फिल्मी संवादों के माध्यम से। पंजाबी ऑनलाइन पर हिंदी सीख सकते हैं। यहाँ प्रतीक होशंगाबादी बैठे हैं, इन्होंने अपनी वेबसाइट का नाम रखा है 'हिंदी लवर्स'। होशंगाबाद जैसे छोटे शहर में बैठकर हिंदी का एक पुस्तकालय बना चुके हैं।



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39
अगवानी स्वर्ण जयंती की
40
केंद्रीय हिंदी संस्थान
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अगवानी अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम पृष्ठ संख्या
1. अगवानी आवरण पृष्ठ 1
2. अगवानी स्वर्ण जयंती की 3
3. श्री कपिल सिब्बल संदेश 4
4. एक कविता 5
5. शुभकामना प्रो. अशोक चक्रधर 6
6. संपादकीय प्रो. के. बिजय कुमार 7
7. केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल : एक परिचय 8
8. मुख्यालय एवं केंद्र 10
9. मुख्यालय एवं केन्द्रों की गतिविधियां 14
10. शिक्षण-प्रशिक्षण एवं नवीकरण 18
11. पुरस्कार 19
12. प्रकाशन 20
13. अंतरराष्ट्रीय मानकहिंदी पाठ्यक्रम 21
14. विदेशी भाषा के रूप में हिंदी 22
15. हिंदी कॉर्पोरा परियोजना 24
16. भाषा-साहित्य सीडी निर्माण परियोजना 26
17. हिंदी लोक शब्दकोश 27
18. भव्य झांकियाँ 28
19. संस्थान की गतिविधियाँ 34
20. उद्धोधन 36
21. ज्योतित हो जन-जन का जीवन 37


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