स.पू.अंक-13,अक्टू-दिस-2011,पृ-42

ज्ञानकोश से
KHSadmin (वार्ता | योगदान)ने किया हुवा 16:18, 20 अगस्त 2012का अवतरण

(अंतर) ← पुराना संस्करण | वर्तमान संशोधन (अंतर) | नया संशोधन → (अंतर)
यहां जाएं: भ्रमण, खोज

Backward.png

कोर्गुमबेला

(मिजो भाषा से)
संकलन एवं भाषांतरण- श्री एच. वानलललोमा
वह नदी में कूदा और नहाने लगा और मछली के कहने के अनुसार चिकने पत्थर से उसने अपने बदन को कई बार रगड़ा। नहाने के बाद जब उसने खुद को ग़ौर से देखा तो उसका सारा बदन ग़ोरा हो गया था और बहुत सुंदर भी।

कोरदुमबेला अत्यधिक ही बदसूरत था। एक बार उसने अपने खेत के सीमांत बाहर ही एक फंदा बनाकर रख दिया। वह उसे रोज देखने जाता था पर उसमें फँसा कोई भी उसके हाथ न लगता था। कोरदुमबेला अब उसकी निगरानी करने लगा। कुछ देर बाद एक वजूनतेइ (एक काला पक्षी, कोयल से छोटा पर उसकी पूँछ लंबी होती है) आया और उसके फंदे में फँस गया। तभी पास ही में छिपे कोरदुमबेला ने उसे जा दबोचा। वाजूनतेइ ने उससे कहा – “मुझे छोड़ दो तो तुम्हारी भलाई की बात कहूँ।” कोरदुमबेला ने झट से कहा– “तो बताओ मेरी भलाई किसमें है ?” वाजूनतेह ने उत्तर दिया– “रात को तुम राजा के घर के पिछवाड़े जाना, और राजा से कहना – “हे राजा! यदि तुम अपनी बेटी का हाथ कोरदुमबेला को न दोगे तो तुम्हें दुश्मन मार डालेंगे, तुम्हारे गाँववालों को भी नहीं छोड़ेंगे, यदि तीन रातों तक यही करते आओगे तो तुम्हारी भलाई होगी।” कोरदुमबेला ने उसे छोड़ दिया और वह चुपचाप अपने घर का रास्ता नापने लगा।

रात को वाजूनतेइ के अनुसार वह राजा के घर के पिछवाड़े पहुँच गया, और कहा – “हे राजन! यदि तुम अपनी बेटी का हाथ कोरदुमबेला को न दोगे तो तुम्हें दुश्मन मार डालेंगे, तुम्हारे गाँववालों को भी नहीं छोड़ेंगे”। पहली बार सुनने में तो राजा को विश्वास नहीं हुआ परंतु जब वही लगातार तीन रातों तक सुनने में आया तो राजा बौखला गया। मगर अपनी सुशील और सुंदर बेटी का हाथ उसे दिया जाए जो गाँव के युवकों में भी सबसे कुरूप है, उसे गवारा न हुआ और अपनी बेटी से पूछ बैठा – बिटिया रानी! अपने पिता और सभी प्रजा को खोना चाहती हो या कोरदुमबेला को अपनाकर अपने पिता और सभी प्रजा को पाना ?” राजकुमारी असमंजस में पड़ गई। उसे कोरदुमबेला को पति के रूप में स्वीकारना कतई पसंद नहीं था। यदि वह कोरदुमबेला को नहीं अपनाती तो उसे अपने पिता और सभी प्रजा को खोना था, बेचारी ने अनिच्छा से उससे विवाह कर लिया।

कोरदुमबेला सचमुच बहुत प्रसन्न था, लेकिन राजकुमारी उससे घृणा करती थी और उसके साथ ऊब जाया करती थी। एक रोज सुबह कोरदुमबेला ने उससे कहा – “जाओ, अपने पिता के यहाँ जाकर जाल ले आओ, मैं नदी में मछली पकड़ने जाता हूँ।” राजकुमारी जाल लेने चली गई। कोरदुमबेला को देखने की इच्छा न होने के कारण वह काफी देर तक माइके में रूकी। उसके पिता ने उससे कहा – “अब वापस घर जल्दी जाओ.” न चाहते हुए भी उसने वह जाल कोरदुमबेला को दे दिया।

कोरदुमबेला नदी में चला गया। उसने नदी में जाल फेंका। जाल में एक अजीब–सी झिंगुर की तरह की मछली फँसी, उसने भी कोरदुमबेला से कहा – “मुझे छोड़ दो तो तुम्हारी भलाई की बात कहूँ।” कोरदुमबेला ने झट से कहा – “तो बताओ मेरी भलाई किसमें है ?” उस मछली ने उत्तर दिया – “नदी में कूदो और नहाओ, अपने बदन को एक चिकने पत्थर से रगड़–रगड़कर देखो तो अच्छा हो।” फिर क्या था, वह नदी में कूदा और नहाने लगा और उस मछली के कहने के अनुसार चिकने पत्थर से उसने अपने बदन को कई बार रगड़ा। नहाने के बाद जब उसने स्वयं को गौर से देखा तो उसका सारा बदन गोरा हो गया था और बहुत सुंदर भी।

Forward.png

पाठ टिप्पणियाँ एवं संदर्भ सूची


संबंधित लेख

समन्वय पूर्वोत्तर अक्टूबर-दिसम्बर 2011 अनुक्रम
क्रमांक लेख का नाम लेखक पृष्ठ संख्या
संगीत-साहित्य के महाप्राण हज़ारिका का महाप्रयाण : विशेष आलेख
1. संस्कृति के महानायक भूपेन हज़ारिका का महाप्रस्थान डॉ. नवकांत शर्मा 1
2. भूपेन हज़ारिका का जीवन दर्शन और व्यक्तित्व डॉ. दिलीप मेधि 4
3. आम आदमी की पीड़ा ही भूपेन हज़ारिका के गीत थे श्री रविशंकर रवि 17
4. सुधाकंठ डॉ. भूपेन हज़ारिका : असमिया जाति के अलिखित दस्तावेज डॉ. प्रवीन कोच 19
5. असमिया संगीत और डॉ. भूपेन हज़ारिका श्री गौतम पातर 22
6. डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में समाज संहति और संप्रीति का प्रस्फुटन श्री अखिल चंद्र कलिता 25
7. असम के सांस्कृतिक दूत भूपेन हज़ारिका डॉ. माधवेन्द्र 29
8. असम रत्न डॉ. भूपेन हज़ारिका की कुछ अनमोल रचनाएँ भाषांतरण सुश्री नन्दिता दत्त 33
9. डॉ. भूपेन हज़ारिका का निधन... कलाक्षेत्र की एक अपूर्णीय क्षति श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 37
लोकमानस
लोककथा संकलन एवं भाषांतरण
1. राङगोला (कॉकबरक भाषा से) सुश्री रूपाली देबबर्मा 38
2. तीन भाई और एक बहन (पनार भाषा से) डॉ. संतोष कुमार 39
3. झील का रहस्य (ताङसा भाषा से) सुश्री मैखों मोसाङ 40
4. कोरदुमबेला (मिजो भाषा से) श्री एच. वानलललोमा 42
5. जायीबोने (गालो भाषा से) सुश्री किस्टिना कामसी 43
लोकगीत संकलन एवं भाषांतरण
1. कोम जनजाति के पारंपरिक गीत (मणिपुर से) सुश्री टी. जेलेना कोम 44
2. का तिङआब (कौआ) (खासी भाषा से) श्रीमती जीन एस. ड्खार 47
कथा-मंजरी
भाषांतरित
1. प्रगति–गान (असमिया भाषा से) मूल श्री उमेश वैश्य 49
भाषांतरण श्रीमती काकोली गोगोई 49
2. श्रीमती इंदिरा : एक शोक गीत (मिजो भाषा से) मूल स्व. (श्रीमती) ललसाङजुआली साइलो 50
भाषांतरण श्री एच. वानलललोमा 50
दो कविताएँ
1. The Heart मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
हृदय भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
2. The Truth of Gender मूल प्रो. (श्रीमती) एस. ड्खार 51
लिंग की सच्चाई भाषांतरण (श्रीमती) जीन एस. ड्खार 51
मौलिक
1. खासी राजा शहीद उतिरोत सिंह डॉ. (श्रीमती) फिल्मिका मारबनियाङ 52
2. त्रिपुरेश्वरी का त्रिपुरा सुश्री खुमतिया देबबर्मा 53
3. सूख रहे दुनिया के प्राण श्री लालसा लाल ‘तरंग’ 54
4. अवश्य साथ देना डॉ. सीताराम अधिकारी 55
5. फूल सुश्री उमा देवी 56
6. मंच सुश्री विनीता अकोइजम 56
कथा-मंजरी भाषांतरित
1. श्रृंखल मूल डॉ. (श्रीमती) रूपश्री गोस्वामी 57
भाषांतरण सुश्री राजश्री देवी 57
मौलिक
1. गुरु–दक्षिणा श्री संजीब जायसवाल ‘संजय’ 60
2. नई सुबह श्रीमती रीता सिंह ‘सर्जना’ 66
3. तीन लघु प्रेरक कथाएँ डॉ. अकेलाभाइ 69
ललितनिबंध-मंजरी
1. बादलों को उतरने के लिए थोड़ी जगह दें' डॉ. अरूणेश ‘नीरन’ 72
2. पागल यौवन का विप्लवकारी महानर्तव डॉ. भरत प्रसाद 74
आलेख
संस्कृति और समाज
1. कारबि समाज का प्राचीन शैक्षिक डॉ. (श्रीमती) जूरि देवी 79
अनुष्ठान : जिरकेदाम (जिरछङ)
1. मणिपुरी संस्कृति की आधार भूमि मणिपुरी रास : प्रो. एच. सुवदनी देवी 86
2. दानवीर बलि के वंशज श्री शेखर ज्योतिशील 91
3. पूर्वोत्तर भारत की भाषा और संस्कृति पर अनुसंधान की असीम संभावनाएँ डॉ. संतोष कुमार 95
भक्ति-दर्शन
1. हिंदी एवं असमिया भक्ति काव्य समरूपता का सबल पक्ष : राष्ट्र के भावात्मक डॉ. राधेश्याम तिवारी 101
भाषा-चिंतन
1. हिंदी के प्रति दृष्टि – गांधी की डॉ. दिलीप मेधि 109
2. हिंदी के विकास में मानस का योगदान डॉ. राजेन्द्र परदेसी 120
3. पूर्वोत्तर भारत की भाषाएँ और संस्कृत–हिंदी का संबंध प्रो. शंभुनाथ 122
4. पूर्वोत्तर भारत में हिंदी : विकास की संभावनाओं का मूल्याँकन सुश्री एल. डिम्पल देवी 127
5. हिंदी परसर्गीय पदबंध श्री चंदन सिंह 131
6. नागा भूमि एवं हिंदी प्रचार–प्रसार की स्थिति डॉ. वी.पी. फिलिप जुविच 135
7. नोक्ते जनजाति की मौखिक लोक साहित्य की लेखन समस्या देवनागरी लिपि एक समाधान डॉ. अरुण कुमार पाण्डेय 140
तुलनात्मक अंतरण
1. मोहन राकेश और ज्योति प्रसाद अगरवाला के नाटक श्री अमरनाथ राम 149
2. असमिया उपन्यासकार विरिंचि कुमार बरूआ और प्रेमचंद के उपन्यासों की नायिकाएँ श्री आब्दुल मतिन 154
3. प्रेमचंद एवं शरतचंद्र के कथा–साहित्य में स्त्री पात्र डॉ. दिनेश कुमार चौबे 157
समालोचन
1. हिंदी यात्रा साहित्य को नागार्जुन का प्रदेय डॉ. श्यामशंकर सिंह 162
2. स्वातंव्योत्तर हिंदी कविता में बदलती प्रणयानुभूति डॉ. (श्रीमती) अनीता पंडा 169
3. जातीय स्वाभिमान : दलित कहानियों के विशेष संदर्भ में सुश्री उमा देवी 175
4. जनजातीय हिंदी उपन्यास : परिचयात्मक विवेचन सुश्री खुमतिया देबबर्मा 179
भाषा-शिक्षण
1. मिज़ोरम और हिंदी शिक्षण डॉ. (श्रीमती) लुईस हाउनहार 185
2. हिंदी शिक्षण की समस्याएँ : सिक्किम के संदर्भ में श्रीमती छुकी लेप्चा 190
लोक-जीवन
1. डाक की उक्तियाँ और असमिया लोकजीवन में उसका प्रभाव सुश्री नंदिता दत्त 192
2. मणिपुरी लोकसाहित्य : एक पूर्वावलोकन डॉ. (श्रीमति) बेमबेम देवी 197
इतिहास
1. अरुणाचल प्रदेश का इतिहास लेखन डॉ. राजेश वर्मा 201
2. मदन-कामदेव मंदिर : असम का खजुराहो श्रीमति काकोली गोगोई 204
व्यक्तित्व
1. स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना कनकलता बरूआ श्री अखिल चंद्र कलिता 206
2. महाराज कुमारी विम्बावती मंजरी : मणिपुरी मीरा प्रो. जगमल सिंह 208
लघु यात्रा-संस्मरण
1. एक नदी द्वीप में विकसित विशाल संस्कृति श्री अतुलेश्वर 212
साक्षात्कार
1. लेखक लिखे नहीं पढ़े भी साक्षात्कारकर्त्री : एन. कुंजमोहन सुश्री धनपति सुखाम 214
पुस्तक-समीक्षा
1. अज्ञेय के रचनाकर्म का एक अनछुआ पहलू समीक्षक “अज्ञेय और पूर्वोत्तर भारत” डॉ. जयसिंह ‘नीरद’ 218


वैयक्तिक औज़ार

संस्करण
क्रियाएं
सुस्वागतम्
सहायता